नई दिल्ली, जागरण संवाददाता। राजधानी में एकीकृत बाल विकास योजना (आईसीडीएस) और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई) के कार्यान्वयन और निगरानी सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (डीसीपीसीआर) ने उत्तरदायी विधानसभा निगरानी समितियों के सदस्यों के लिए उन्मुखीकरण-सह-प्रशिक्षण सत्र के पहले भाग का आयोजन किया।

यह सत्र गैर सरकारी संगठन इंडस एक्शन के सहयोग से आयोजित किया गया। जिसमें करीब आठ विधानसभा के सदस्यों ने भाग लिया। इस सत्र में समितियों के सदस्यों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों पर चर्चा करने के साथ-साथ आईसीडीएस और पीएमएमवीवाई के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए क्षेत्र की स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के साथ संबंध बनाने, क्षेत्र पर संभावित चुनौतियों और समाधानों को समझने और डीपीसीआर द्वारा शुरु की जाने वाली आईसीडीएस हेल्पलाइन से संबंधित गतिविधियों पर विचार किया गया।

कोरोना महामारी में सरकारी योजनाओं के बेहतर कार्यान्वयन पर दिया जोर

सत्र के दौरान बच्चों की समय से पहले होने वाली मौत और पोषण संबंधी संज्ञानात्मक विकास के लिए पोषण और टीकाकरण को सबसे महत्वपूर्ण कवच बताते हुए डीपीसीआर के अध्यक्ष अनुराग कुंडू ने कोरोना महामारी में सरकारी योजनाओं के बेहतर कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास विभाग ने आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से टीकाकरण का काम शुरू किया है। अनुराग ने कहा कि महामारी के कारण आहार की बिगड़ती गुणवत्ता और पोषण में आ रही समस्याओं के कारण अधिकतर बच्चे और महिलाएं कुपोषित हो रहे हैं। इसलिए मातृ और शिशु पोषण के लिए प्रतिरक्षण कार्यक्रमों को फिर से शुरू करना होगा।

उल्लेखनीय है कि डीसीपीसीआर ने दिल्ली की सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों में विधानसभा निगरानी समितियों का गठन किया है। प्रत्येक समिति में तीन सदस्य शामिल हैं। ये समितियां मुख्य रूप से आईसीडीएस और पीएमएमवीवाई के लाभार्थियों की पहचान करने में, आईसीडीएस पोषण की खुराक के वितरण और बच्चों के टीकाकरण की निगरानी के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का सहयोग करेंगी।

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