यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 13, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Delhi-NCR में सरकारी गाड़ियों को स्वच्छ ईंधन पर लाने लिए CAQM ने दिया निर्देश, नीति बनाने के लिए भी कहा
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने सरकारी विभागों को स्वच्छ ईंधन वाले वाहन ...और पढ़ें

HighLights
- CAQM का निर्देश, सरकारी विभागों को खरीदनी होंगी इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड गाड़ियां
- Delhi-NCR के प्रदूषण में 42% हिस्सेदारी वाहनों से, सख्त नीति बनाने की मांग
- नोएडा-गाजियाबाद ने की पहल, गुरुग्राम, फरीदाबाद समेत कई जिले अब भी पीछे
- CAQM ने दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान को जारी किए निर्देश
राज्य ब्यूरो, जागरण, नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में प्रदूषण की रोकथाम के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) अब सरकारी महकमों में इस्तेमाल होने वाहनों पर भी ध्यान दे रहा है।
CAQM ने सभी एनसीआर के राज्यों की सरकारों को इस संबंध में पुख्ता नीति बनाने का परामर्श दिया है। आयोग ने कहा है कि स्वच्छ ईंधन वाले वाहनों की खरीद अनिवार्य होनी चाहिए।
दिल्ली-एनसीआर को देश ही नहीं बल्कि दुनिया के सबसे ज्यादा प्रदूषित हिस्से में शामिल किया जाता है। यहां के प्रदूषण में सबसे बड़ी हिस्सेदारी वाहनों से निकलने वाले उत्सर्जन की होती है।
आयोग द्वारा जारी परामर्श में कहा गया है कि सरकार के विभागों, संस्थानों व सार्वजनिक उपक्रमों को ही इसकी पहल लेनी चाहिए। इस बाबत नीति बनानी चाहिए और इसे क्रियान्वित करने के उपाय किए जाने चाहिए।
स्वच्छ परिवहन समय की जरूरत
सीएक्यूएम ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में वाहनों की संख्या बहुत ज्यादा है। इसे ध्यान में रखते हुए यह समय की जरूरत बन गई है कि परिवहन के स्वच्छ साधनों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए।
पेट्रोल और डीजल जैसे जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल वाले वाहनों से स्वच्छ ईंधन वाले वाहनों की तरफ बढ़ा जाए जो अपेक्षाकृत कम उत्सर्जन करते हैं।
इन स्वच्छ ईंधन वाले वाहनों पर जोर
आयोग ने अपने निर्देश में बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन (बीईवी), कांप्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी), स्ट्राॅंग हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहन (एसएचईवी), ज्यादा एथनाल वाले फ्लेक्स फ्यूल वाहन (एफएफवी) व फ्लेक्स फ्यूल स्ट्राॅंग हाईब्रिड वाहन (एफएफ-एसएचईवी) जैसे स्वच्छ ईंधनों पर चलने वाले वाहनों को अनिवार्य करने का परामर्श दिया है।
42 प्रतिशत से ज्यादा प्रदूषण वाहनों से
वाहनों से निकलने वाला धुआं दिल्ली-एनसीआर के लिए मुसीबत बन गया है। दिल्ली के प्रदूषण पर हुए अलग-अलग शोध बताते हैं कि राजधानी के प्रदूषण में वाहनों से होने वाले उत्सर्जन की हिस्सेदारी 42 प्रतिशत से ज्यादा हो सकती है।
स्वच्छ ईंधन पर चल रहे कहां और कितने सरकारी वाहन
| जिला | इलेक्ट्रिक | हाईब्रिड |
| दिल्ली | 150 | 100 |
| नोएडा | 32 | 12 |
| गाजियाबाद | 25 | 10 |
| रेवाड़ी | 5 | 10 |
| महेंद्रगढ़ | 0 | 0 |
| नूंह | 0 | 0 |
| पलवल | 0 | 0 |
| फरीदाबाद | 0 | 0 |
| गुरुग्राम | 0 | 0 |
इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहन कैसे कम करते प्रदूषण
हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहन पारंपरिक आंतरिक दहन इंजन को इलेक्ट्रिक प्रणाली के साथ जोड़ता है। ये दो शक्ति स्रोत वाहन की ईंधन दक्षता में सुधार और उत्सर्जन को कम करने के लिए मिलकर काम करते हैं।
इलेक्ट्रिक वाहन पर स्विच करना वाहन प्रदूषण को कम करने और पैसे बचाने में बहुत कारगर हो सकता है। इलेक्ट्रिक वाहन से नाइट्रोजन ऑक्साइड और पीएम 2.5 के साथ ध्वनि प्रदूषण को भी कम करते हैं।
इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहन, डीजल और पेट्रोल वाहनों की तुलना में बेहतर हैं क्योंकि उनमें स्थानीय प्रदूषण का कारक नहीं होता है। ऐसे वाहनों का अधिक प्रभाव डालने के लिए बदलाव की आवश्यकता है, केवल कुछ वाहन लाने से अधिक प्रभाव नहीं होगा। चीन, अमेरिका और यूरोप में ऐसे वाहन पर्यावरण की बेहतरी में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
- सुनीता नारायण, महानिदेशक, सेंटर फार साइंस एंड एन्वायरनमेंट (सीएसई)
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