नई दिल्ली, एएनआइ। दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार एक व्यापक कार्य योजना बनाई है। बृहस्पतिवार को राज्यसभा में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने राज्यसभा में कहा कि वायु प्रदूषण कम करने के लिए केंद्र सरकार ने कई कार्यक्रम चलाए हैं। प्रधानमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया गया है। लगातार समीक्षा बैठकें भी हुई हैं।

पर्यावरण मंत्री ने कहा कि वायु प्रदूषण को कम करने के लिए केंद्र सरकार हर संभव कोशिश कर रही है। आने वाले समय में इसमें सुधार देखा जाएगा। 

बता दें कि दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का मुद्दा संसद में उठाया गया था। भाजपा समेत कई दलों के सांसदों ने प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए इस पर चिंता जताई थी। सांसदों ने इसे रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकार से कदम उठाने की अपील की थी। 

प्रदूषित क्षेत्रों में औद्योगिक इकाइयां लगाने की व्यवस्था में हो बदलाव : एनजीटी


नेशनल ग्रीन टिब्यूनल (एनजीटी) ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को गंभीर रूप से प्रदूषित क्षेत्रों में नई औद्योगिक इकाइयां लगाने और पुरानी इकाइयों के विस्तार के मामले में व्यवस्था में बदलाव लाने के निर्देश दिए हैं। एनजीटी चेयरपर्सन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अगुआई वाली पीठ ने प्रावधानों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने में असफल रहने वाले राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डो (एसपीसीबी) के प्रमुखों पर कार्रवाई करने की भी चेतावनी दी है।

एनजीटी ने कहा कि सीपीसीबी के आंकड़ों से बढ़ते वायु, जल और मृदा प्रदूषण का पता चलता है। ऐसे में कानून का उल्लंघन करने वालों को पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य की कीमत पर बख्शा नहीं जा सकता।

प्रदूषण फैलाने वालों के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई

एनजीटी ने कहा कि एसपीसीबी द्वारा अर्थपूर्ण कदम उठाए जाने चाहिए और इस बारे में रिपोर्ट तैयार करनी चाहिए। रिपोर्ट में प्रदूषण फैलाने वालों की संख्या, प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर अंकुश, पर्यावरण मुआवजे की वसूली और पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई पर आने वाली लागत दर्शाई जानी चाहिए। एनजीटी ने सीपीसीबी को 15 फरवरी, 2020 तक ईमेल के जरिये एकीकृत रिपोर्ट सौंपने को कहा है। पीठ ने हाल में जारी आदेश में कहा, ‘इस मामले में अनुपालन नहीं होने की स्थिति में एनजीटी के समक्ष राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन और उसके सदस्य सचिवों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के अलावा कोई विकल्प नहीं रह जाएगा। यह कार्रवाई एनजीटी कानून, 2010 की धारा-25 के तहत सीपीसी की धारा-51 को शामिल करते हुए की जाएगी।

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Posted By: Mangal Yadav

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