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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 03, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Lok Sabha Elections: दिल्ली में 4 नए चेहरे उतारने के पीछे BJP की ये रणनीति, 2017 में भी किया था खास 'प्रयोग'

Published: Sun, 03 Mar 2024 10:51 PM (IST)

दिल्ली में चार सांसदों के टिकट काटकर भाजपा ने केंद्र की राजनीति में चार नए चेहरों को भेजने का निर्णय ...और पढ़ें

दिल्ली में 4 नए चेहरे उतारने के पीछे BJP की ये है रणनीति
दिल्ली में 4 नए चेहरे उतारने के पीछे BJP की ये है रणनीति

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के लिए दिल्ली में चार सांसदों के टिकट काटकर भाजपा ने केंद्र की राजनीति में चार नए चेहरों को भेजने का निर्णय लेकर चौका दिया है। पर, यह सब भाजपा की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत भाजपा अगली पीढी को दिल्ली की राजनीति के लिए तैयार कर रही है।

इसके तहत वह नए कमलजीत सहरावत, बांसुरी स्वराज और प्रवीन खंडेलवाल जैसे नए चेहरों का कद बढ़ाकर अपनी राजनीतिक पकड़ को और मजबूत करना चाहती है। यह पहली बार नहीं है कि भाजपा ने अपने मौजूदा जनप्रतिनिधियों को हटाकर नए चेहरों को उतारा हो।

नगर निगम के चुनाव में किया था प्रयोग

वर्ष 2017 में हुए नगर निगम के चुनाव में भाजपा ने 272 सीटों पर नए चेहरों को उतारने का सख्त निर्णय तक लिया था। इस तरह के सख्त निर्णयों से भाजपा को लाभ भी होता है। वर्ष 2017 के निगम चुनाव में भाजपा तीसरी बार सत्ता वापसी के लिए चुनाव लड़ी थी। नए चेहरों के आने से कार्यकर्ताओं में उत्साह ही था कि वर्ष 2007 और 2012 की तुलना में निगम सर्वाधिक 180 से ज्यादा सीटों पर जीत दर्ज की।

पश्चिमी दिल्ली लोकसभा से प्रत्याशी बनी कमलजीत सहरावत निगम में नए चेहरे उतारे जाने की वजह से ही पार्षद बन पाई। पूर्वकालिक दक्षिणी निगम में सहरावत ने सर्वाधिक मतों से जीत दर्ज की थी तो उन्हें भाजपा ने महापौर भी बना दिया था।

सत्ता विरोधी लहर की मिलती काट

भाजपा वैसे जो विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ने की बात कहती है, लेकिन इसके पीछे की रणनीति में उसे सत्ता विरोधी लहर की काट भी मिलती है। कई चरणों के हुए सर्वे और लोगों की प्रतिक्रिया पर यह निर्णय लिए जाते हैं। नए चेहरों को उतारे जाने से कार्यकर्ताओं की नाराजगी भी दूर होती है।

साथ ही किसी न किसी वजह से जन प्रतिनिधियों के खिलाफ खड़ी हुई सत्ता विरोधी लहर भी खत्म होती है। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा ने पूर्वी दिल्ली से महेश गिरी और उत्तर- पश्चिमी दिल्ली से उदित राज का टिकट काट दिया था। इससे भाजपा को इन दोनों सीटों पर जीत भी मिली थी।

एकजुट दिखने की हो रही है कोशिश

चार मौजूदा सांसदों के टिकट कटने के बाद से भाजपा अपनी एकजुटता दिखाने की कोशिश कर रही है। यही वजह है कि पश्चिमी दिल्ली के सांसद प्रवेश वर्मा से यहां से उम्मीदवार कमलजीत सहरावत ने लोकसभा प्रभारी जय प्रकाश के साथ मुलाकात की। इसके बाद प्रवेश वर्मा ने इस मुलाकात की तस्वीर को एक्स पर पोस्ट भी किया।

वहीं, दक्षिणी दिल्ली में टिकट कटने के बाद सांसद रमेश बिधूड़ी के घर लोग पहुंचे तो उन्होंने भी किसी भी प्रकार की नाराजगी से इन्कार करते हुए कहा कि पार्टी का निर्णय कभी गलत नहीं होता है। पार्टी जो जिम्मेदारी दी जाएगी वह उसे निभाएंगेें। इसके अतिरिक्त नई दिल्ली से भाजपा प्रत्याशी बांसुरी स्वराज ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात कर टिकट देने के लिए आभार जताया।

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