यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 29, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Rau Coaching Center Incident: अधिवक्ता ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को लिखा पत्र, उचित कार्रवाई का किया आग्रह
Delhi Coaching Center Incident दिल्ली में राव कोचिंग सेंटर में हुए हादसे में तीन अभ्यर्थियों की मौत के मामले में ...और पढ़ें

HighLights
- अधिवक्ता ने दिल्ली हादसा मामले में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
- कोचिंग सेंटरों व पुस्तकालयों की तत्काल सुरक्षा आडिट करने की मांग।
- राव कोचिंग सेंटर हादसे में हो गई थी तीन आईएएस अभ्यर्थियों की मौत।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। Delhi Coaching Center Incident ओल्ड राजेंद्र नगर में बाढ़ का पानी कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में भरने से संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की तैयारी करने वाले तीन अभ्यर्थियों की मौत के मामले में एक वकील ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
इस मामले में संज्ञान लेने की मांग करते हुए एक अधिवक्ता ने दिल्ली हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा है। साथ ही राष्ट्रीय राजधानी में संचालित ऐसे सभी संस्थानों व पुस्तकालयों की तत्काल सुरक्षा आडिट का आदेश देने का आग्रह किया।
अधिवक्ता ने पत्र में लिखा...
अधिवक्ता सत्यम सिंह ने पत्र में लिखा कि यह घटना उन क्षेत्रों में शैक्षिक सुविधाओं को नुकसान पहुंचाने वाली लापरवाही के एक बड़े पैटर्न का हिस्सा थी, क्योंकि यहां पर दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के नियमों का उल्लंघन कर अनगिनत कोचिंग सेंटर चल रहे हैं।
इन घटनाओं की पुनरावृत्ति की प्रकृति छात्र सुरक्षा सुनिश्चित करने में प्रणालीगत विफलता की ओर इशारा करती है। पत्र में कहा गया है कि शिक्षा का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार की कीमत पर नहीं आना चाहिए।
सत्यम ने लिखा कि युवा जीवन की हानि को रोकने के लिए न्यायिक हस्तक्षेप महत्वपूर्ण है। मामले का संज्ञान लेने व छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए उचित कानूनी कार्रवाई शुरू करने का आग्रह किया।
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पत्र में कहा गया कि कोचिंग सेंटरों में भवन नियमों के अनुसार, अग्नि सुरक्षा उपायों और आपातकालीन निकास की कमी है। पत्र में मांग की गई है कि तेजी से बढ़ रही बेसमेंट सुविधाओं के रोकथाम उपायों और उचित जल निकासी की व्यवस्था की जाए।
कार्रवाई पर विचार करने का अनुरोध किया
यह भी मांग की गई कि नियमों का उल्लंघन करने वाले केंद्रों को बंद करने व आपराधिक कार्यवाही सहित कठोर दंड लगाने की मांग की। अधिवक्ता ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश से मौजूदा नियमों को लागू करने में विफल रहने वाले अधिकारियों के खिलाफ स्वत: कार्रवाई पर विचार करने का भी अनुरोध किया।
