दीवाली पर बदली दिल्ली के सबसे बड़े इलेक्ट्रिकल बाजार की तस्वीर, 70% से ज्यादा सामान Made in India; चीन को झटका
दिल्ली के भागीरथ पैलेस इलेक्ट्रिकल बाजार में इस दीपावली स्वदेशी उत्पादों का दबदबा है, जहां 70% से अधिक सामान 'मेड ...और पढ़ें

दीपावली पर दिल्ली का थोक इलेक्ट्रिकल मार्केट भागीरथ पैलेस स्वदेशी क्रांति की चमक बिखेर रहा है। एआई इमेज
HighLights
भागीरथ पैलेस में 70% से अधिक स्वदेशी दीपावली उत्पाद।
'मेड इन इंडिया' और 'वोकल फॉर लोकल' का दिखा असर।
3,000 करोड़ से अधिक का कारोबार स्वदेशी उत्पादों से।
नेमिष हेमंत, नई दिल्ली। रोशनी के महापर्व दीपावली पर दिल्ली का थोक इलेक्ट्रिकल मार्केट भागीरथ पैलेस स्वदेशी क्रांति की चमक बिखेर रहा है। चीनी लड़ियों के आधिपत्य को ध्वस्त कर स्वदेशी उत्पादों ने बाजार में अपनी मजबूत धाक दर्ज कराई है।
भागीरथ पैलेस के थोक कारोबार में बिजली की लड़ियों, एलईडी लाइट्स और इलेक्ट्रिकल सजावट के सामान में स्वदेशी उत्पादों की हिस्सेदारी इस बार 70 प्रतिशत के पार पहुंच चुकी है। जबकि, वर्ष 2020 के पूर्व तक यह शतप्रतिशत चीन उत्पाद पर निर्भर था।
3,500 करोड़ का बाजार, स्वदेशी की ओर झुकाव
देश के प्रमुख इलेक्ट्रिकल बाजारों में एक भागीरथ पैलेस में इस वर्ष दीपावली के त्यौहारी सीजन में लगभग 3,500 करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान है। जिनमें से अकेले स्वदेशी उत्पादों की भागीदारी 3,000 करोड़ से अधिक की होगी।
बीते कुछ वर्ष में आए आर्थिक और सामाजिक बदलाव के साथ केंद्र सरकार की योजनाओं ने इस तस्वीर में बदलाव किया है। स्थिति यह कि थोक विक्रेताओं से लेकर खुदरा दुकानों तक में मेड इन इंडिया उत्पादों का जलवा है। दुकानदारों का कहना है कि कुछ चीन की लड़ियां जरूर दिख रही है, लेकिन वे सभी पुराने स्टाक है।
मेड इन इंडिया व वोकल फाॅर लोकल का असर
दिल्ली इलेक्ट्रिकल ट्रेडर्स एसाेसिएशन के अध्यक्ष अजय शर्मा के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत और वोकल फाॅर लोकल के विजन ने बाजार की तस्वीर काफी हद तक बदली है।
घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने की नीतियों, गुणवत्ता मानकों को सख्त करने और स्थानीय उद्योग को प्रोत्साहन ने भारतीय निर्माताओं का हौसला बढ़ाया है। सरकारी प्रयासों और निर्माताओं की बुद्धिमत्ता से स्वदेशी लाइट्स की गुणवत्ता में बड़ा सुधार हुआ है और उनकी लागत में कमी आई है, जिससे ये चीनी उत्पादों को सीधी टक्कर दे रही हैं।
व्यापारियों का प्रयास और ग्राहकों का आग्रह
अजय शर्मा कहते हैं कि यहां के दुकानदार भी चीन से आयात घटाकर स्वदेशी उत्पादों को तरजीह दे रहे है। इसी तरह, ग्राहकों की सोच में भी बड़ा परिवर्तन आया है। अब उपभोक्ता केवल सस्ता सामान नहीं, बल्कि टिकाऊ और स्वदेशी उत्पाद मांग रहे हैं।
कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय महामंत्री व चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल उत्साहित होकर बताते हैं कि यहां बिक रहे सारा सामान पूर्णतया स्वदेशी है। लड़ियां, सजावटी उत्पाद सब भारत की है। जो एनसीआर के साथ महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश से आई हैं।
आकर्षक, गुणवत्ता और सस्ते
विशेष कि ये स्वदेशी उत्पाद आकर्षण, गुणवत्तापूर्ण तथा सस्ते हैं। दरवाजों और बालकनी को सजाने के लिए पारंपरिक रंगीन बल्बों के साथ फूलों, पत्तियों, सितारों और कमल के आकार वाली झालरें उपलब्ध हैं। पर्दे की तरह लटकने वाली लड़ियां और छोटी-छोटी फेयरी लाइट घर को जगमगाने के नए विकल्प हैं। गर्म पीली रोशनी से लेकर बहुरंगी चमक तक, बाजार में हर तरह की पसंद के लिए विकल्प मौजूद हैं।
संगीत की धुन पर रोशनी बदलती लड़ियां
दुकानदार प्रिंस शर्मा के अनुसार, सजावटी लड़ियों में तकनीक का भी तड़का है। रिमोट और मोबाइल से रंग बदलने वाली एलईडी लड़ियां घर की सजावट को मनचाहा रूप देने का विकल्प दे रही हैं। कुछ लाइटें अलग-अलग क्रम में जलती-बुझती हैं तो कुछ संगीत की धुन पर रोशनी बदलती हैं।
पर्दे जैसी कर्टेन लाइट, जालीदार नेट लाइट और बेल की तरह लिपटने वाली स्ट्रिंग लाइट के साथ ही फूलों और छोटी लालटेन के आकार वाली झालरें पारंपरिक सजावट को नया रूप दे रही हैं। वहीं, सुनहरी और गर्म पीली रोशनी वाली लड़ियां घर में उत्सव के साथ पारंपरिक चमक भी बिखेर रही हैं।
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