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रसोई गैस की किल्लत से बढ़ी केरोसिन स्टोव की बिक्री, दिल्ली में लौटे पुराने दिन

Published: Wed, 01 Apr 2026 11:43 PM (IST)Updated: Thu, 02 Apr 2026 01:59 AM (IST)

एलपीजी की किल्लत के कारण सरकार द्वारा केरोसिन बिक्री की अनुमति के बाद केरोसिन और डीजल स्टोव की मांग बढ़ ...और पढ़ें

एलपीजी की किल्लत के कारण सरकार द्वारा केरोसिन बिक्री की अनुमति के बाद केरोसिन और डीजल स्टोव की मांग बढ़ गई है। इमेज एआई

एलपीजी की किल्लत के कारण सरकार द्वारा केरोसिन बिक्री की अनुमति के बाद केरोसिन और डीजल स्टोव की मांग बढ़ गई है। इमेज एआई

नेमिष हेमंत, नई दिल्ली। एलपीजी किल्लत के बीच सरकार ने केरोसिन की बिक्री को हरी झंडी दे दी है, जिसके बाद से केरोसिन स्टोव मांग के साथ उसका उत्पादन बढ़ गया है। सदर बाजार में कई दुकानें केरोसिन स्टोव से सज गई है।

दुकानदारों के अनुसार, उसकी बिक्री में कई गुना की बिक्री हुई है, क्योंकि इसकी मांग पहले नाम मात्र की थी। इसी तरह, डीजल चूल्हे की मांग भी खूब हो रही है। एलपीजी के व्यावसायिक सिलिंडराें की उपलब्धता में कमी के चलते यह ढाबे, कैटरिंग समेत अन्य में बड़ी राहत दे रहा है।

हाल ही में सरकार ने रसोई गैस किल्लत के बीच केरोसीन (मिट्टी के तेल) की बिक्री के नियमों में ढील दी है। उसकी कोशिश है कि नागरिकों को खाना पकाने में एलपीजी की किल्लत के बीच राहत मिले। ऐसे में बाजार की भी स्थिति बदल गई है। सदर बाजार में करीब 20 वर्ष बाद केरोसिन के चूल्हे लौट आए हैं।

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दिल्ली व्यापार महासंघ के अध्यक्ष देवराज बावेजा ने बताया कि किसी समय सदर बाजार में स्टोव और लालटेन के ढेर सारे विक्रेता और निर्माता होते थे।

वक्त के साथ रसोई गैस का चलन और उपलब्धता बढ़ी, तो केरोसिन स्टोव का प्रयोग घटता गया। करीब 30 वर्ष पहले तक लालटेन की जगह सोलर लाइट्स, बैटरी लाइट्स और इन्वर्टर ने ले ली। अब, वैश्विक युद्ध की परिस्थितियों के बीच रसोई गैस की किल्लत महसूस हो रही है, तो फिर से केराेसिन स्टोव व डीजल चूल्हा लौट आया है।

वैसे, मांग बढ़ने से इनके दाम भी बढ़ गए हैं। 400 रुपये का स्टोव 1,700 रुपये और आठ-नौ हजार की डीजल स्टोव 30 हजार रुपये तक में बिक रही है।

सदर बाजार की गली लल्लू मिश्रा, कुतुब रोड और गांधी मार्केट में स्टोव और लालटेन के कारोबारी गिनती के है। बहुत से ट्रेडर्स केरोसिन स्टोव का बिजनेस छोड़कर एलपीजी बर्नर के व्यापार में शिफ्ट हो गए। अब किसी के पास स्टोव नहीं है। स्टोव का कबाड़ा तक विक गया है।वैसे, अभी केरोसिन की उपलब्धता को लेकर असमंजस की स्थिति है।

क्योंकि, सरकार ने उसकी बिक्री के लिए पेट्रोल पंपों को अधिकृत किया है, लेकिन वहां अभी पेट्रोलियम कंपनियों द्वारा केरोसिन उपलब्ध नहीं कराया है। इस बीच, डीजल से चलने वाले चूल्हे भी बाजार में छाए हुए हैं, जिनकी मांग मुख्य तौर पर कैटरिंग व ढाबे वालों की ओर से हो रही है।

केरोसिन स्टोव व डीजल चूल्हा बेच रहे सुशील मित्तल ने बताया कि जब से रसोई गैस की किल्लत पैदा हुई है। तब से मांग बढ़ी है और ये बाजार में लौटे हैं।

कई तरह के केरोसिन स्टोव

बाजार में कई तरह के केरोसिन स्टोव आते रहे हैं, जिसमें लोहे, पीतल व बत्ती वाले स्टोव हैं, फिलवक्त लोहे के स्टोव बिक्री के लिए है। देवराज बावेजा ने बताया कि आर्थिक तौर पर कमजोर वर्ग की जरूरत स्टोव है।

अब गैस सिलिंडर नहीं मिल रहा, तो मजदूर वर्ग ने स्टोव पर खाना पकाना शुरू किया है। एक ओर जहां घरेलू उपयोग के लिए स्टोव है तो बड़े ढाबों के लिए केरोसिन व डीजल के बड़े चूल्हे भी आ गए हैं।

अभी पंपों पर उपलब्ध नहीं है केरोसिन

उधर, भले ही केंद्र सरकार ने पंपों से केरोसिन की बिक्री की अनुमति दे दी हो, लेकिन यह अभी पंपों पर उपलब्ध नहीं है। पंप संचालकों के अनुसार, तेल कंपनियों ने इसके लिए कोई प्रविधान नहीं किया है।

वैसे, जब यह उपलब्ध होंगे तो उसकी कीमत बाजार मूल्य में 80 से 85 रुपये हो सकती है। दिल्ली करीब 30 वर्ष पूर्व केरोसिन मुक्त हुई थी। अब जबकि, सरकार ने बिक्री की अनुमति दी है तो ढाबे व रेस्तरां के साथ स्ट्रीट फूड वेंडर्स इसे उम्मीद के तौर पर देख रहे हैं।

दुकानों पर लौटा स्टोव

इसी तरह, चाय, समोसे की दुकानों पर स्टोव व डीजल वाले चूल्हे लौटने लगे हैं। एक दुकानदार संजय के अनुसार, एलपीजी सिलिंडर नहीं मिल रहा है। ऐसे में डीजल आधारित स्टोव का प्रयोग कर रहे हैं। वैसे, डीजल से जलाना महंगा पड़ रहा है।

गैस एजेंसियों पर लग रही कतारें

गैस एजेंसियों पर कतारें अभी भी लग रही है। झंडेवाला स्थित गैस एजेंसियों के बाहर बृहस्पितवार को कतारें लगी रही। उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि बुकिंग के बाद भी उनके यहां सिलिंडर नहीं पहुंचा। जिसे लेकर विवाद की स्थिति भी देखी गई।

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