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कड़कड़डूमा कोर्ट ने छेड़छाड़ मामले में निचली अदालत की सजा रद की, आरोपी को बरी किया

By SAURABH PANDEYEdited By: Kushagra Mishra
Published: Wed, 14 Jan 2026 09:49 AM (IST)

कड़कड़डूमा कोर्ट ने छेड़छाड़ के एक पुराने मामले में निचली अदालत की सजा रद्द कर दी है। अदालत ने पाया ...और पढ़ें

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HighLights

  1. कड़कड़डूमा कोर्ट ने छेड़छाड़ मामले में सजा रद की

  2. साक्ष्य और गवाहियों में गंभीर खामियां पाई गईं

  3. शिकायतकर्ता के बयान लगातार बदलते रहे, आरोपी बरी

जागरण संवाददाता, पूर्वी दिल्ली। महिला से छेड़छाड़ के एक पुराने मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए निचली अदालत द्वारा दी गई सजा को रद कर दिया है। अदालत ने कहा कि मामले में पेश किए गए साक्ष्य और गवाहियों में गंभीर खामियां हैं, जिनके आधार पर आरोपी को दोषी ठहराना उचित नहीं है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ट्विंकल वधवा ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में नाकाम रहा। अदालत के अनुसार, शिकायतकर्ता के बयान जांच और सुनवाई के अलग-अलग चरणों में एक जैसे नहीं रहे, जिससे पूरे मामले की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।

अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि शुरुआती पुलिस रिकाॅर्ड में घटना को घरेलू विवाद या आपसी झगड़े के रूप में दर्ज किया गया था, जबकि बाद में इसे छेड़छाड़ का मामला बताया गया। इस बदलाव को अदालत ने महत्वपूर्ण माना। मामले की सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि जांच में कई जरूरी पहलुओं को नजरअंदाज किया गया और कुछ अहम गवाहों से पूछताछ नहीं की गई।

अदालत ने कहा कि आपराधिक मामलों में केवल आरोप के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती, जब तक कि ठोस और भरोसेमंद साक्ष्य मौजूद न हों। इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया और निचली अदालत का फैसला निरस्त कर दिया।

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