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छात्रों पर प्रदर्शन में शामिल होने का दबाव बनाया, कार्रवाई की चेतावनी; हिंसा के बाद JNU प्रशासन की पहली प्रतिक्रिया

Published: Mon, 23 Feb 2026 01:12 PM (IST)

जेएनयू प्रशासन ने परिसर में हुई हिंसा पर बयान जारी किया है। प्रशासन के अनुसार, 22 फरवरी की रात कुछ ...और पढ़ें

जेएनूय में रविवार की रात हिंसा के दौरान मौजूद छात्र: फोटो: वीडियो ग्रैब

जेएनूय में रविवार की रात हिंसा के दौरान मौजूद छात्र: फोटो: वीडियो ग्रैब

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जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) परिसर में रविवार की रात मारपीट और झड़प की घटनाओं के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सोमवार को आधिकारिक बयान जारी करते हुए पूरे घटनाक्रम को गंभीर बताया है। प्रशासन ने कहा कि 22 फरवरी की रात कुछ प्रदर्शनकारी छात्रों की गतिविधियों के कारण कैंपस में तनाव की स्थिति बनी।

JNU प्रशासन के अनुसार, प्रदर्शन कर रहे कुछ छात्रों ने कथित तौर पर कई शैक्षणिक भवनों को बंद कर दिया। साथ ही केंद्रीय पुस्तकालय में प्रवेश कर वहां पढ़ाई कर रहे छात्रों पर प्रदर्शन में शामिल होने का दबाव बनाया गया। इसी दौरान दो छात्र समूह आमने-सामने आ गए और स्थिति झड़प में बदल गई।

विश्वविद्यालय ने ऐसी गतिविधियों को अनुशासनहीन करार देते हुए सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और शैक्षणिक माहौल बाधित करने की कड़ी निंदा की है।

सख्त कार्रवाई के संकेत

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियमों और कानूनी प्रावधानों के तहत मामले में सख्त कार्रवाई की जा रही है। बयान में कहा गया कि विश्वविद्यालय की प्राथमिकता सभी छात्रों के हितों की रक्षा करना और परिसर में सामान्य शैक्षणिक वातावरण बनाए रखना है।

साथ ही सभी छात्र संगठनों और हितधारकों से शांति बनाए रखने तथा किसी भी प्रकार की अनुचित गतिविधियों से दूर रहने की अपील की गई है।

कक्षाएं सामान्य, गतिविधियां जारी

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार फिलहाल परिसर में कक्षाएं, शोध कार्य और अन्य शैक्षणिक गतिविधियां सामान्य रूप से जारी हैं और स्थिति नियंत्रण में है।गौरतलब है कि रविवार देर रात JNU परिसर में छात्र संगठनों के बीच हिंसक झड़प की खबर सामने आई थी। घटनास्थल से सामने आए वीडियो में छात्रों के बीच मारपीट, पत्थरबाजी और अफरातफरी के दृश्य दिखाई दिए थे।

कुछ छात्रों ने आरोप लगाया था कि उन्हें घेरकर हमला किया गया, जबकि दूसरे पक्ष ने दावा किया कि शैक्षणिक भवनों को बंद करने और पढ़ाई बाधित करने का विरोध करने पर विवाद बढ़ा।

यह पूरा विवाद विश्वविद्यालय की कुलगुरु शांतिश्री डी. पंडित के कथित बयान और उससे जुड़े छात्र विरोध प्रदर्शनों के बाद शुरू हुए तनाव की पृष्ठभूमि में सामने आया है। प्रशासन के बयान के बाद अब मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई और जांच की प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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