दिल्ली में सजेगा कला का महाकुंभ, जंतर-मंतर और ऐतिहासिक स्मारकों में 4 दिसंबर से शुरू होगा 'इंडिया बिएनाले 2026'
जंतर-मंतर अब विरोध प्रदर्शनों के बजाय 'इंडिया बिएनाले 2026' का प्रमुख केंद्र बनेगा, जहां कला, वास्तुकला और डिजाइन की प्रदर्शनियां होंगी।

जंतर-मंतर बनेगा कला का नया केंद्र।
HighLights
जंतर-मंतर इंडिया बिएनाले 2026 का प्रमुख स्थल बनेगा।
4 दिसंबर से 21 मार्च तक कला प्रदर्शनियां होंगी।
दिल्ली के कई ऐतिहासिक स्मारकों पर आयोजन होगा।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली का ऐतिहासिक जंतर-मंतर अब विरोध प्रदर्शनों के बजाय कला, वास्तुकला और डिजाइन के बड़े आयोजन के लिए चर्चा में रहेगा।
केंद्र सरकार ने प्रदर्शन स्थल के रूप में जंतर-मंतर की अधिसूचना रद्द किए जाने के कुछ ही दिनों बाद इसे इंडिया बिएनाले 2026 (India Art, Architecture & Design Biennale 2026) के प्रमुख स्थलों में शामिल करने का निर्णय लिया है। संस्कृति मंत्रालय की परिकल्पना पर आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम चार दिसंबर से शुरू होकर 21 मार्च तक चलेगा।
दिल्ली में दिखेगा कला का अद्भुत नजारा
इंडिया बिएनाले के दौरान दिल्ली के करीब एक दर्जन ऐतिहासिक स्मारकों और प्रमुख सांस्कृतिक स्थलों पर प्रदर्शनियां, कार्यक्रम और कला से जुड़े अनुभव प्रस्तुत किए जाएंगे।
इनमें लाल किला, कुतुब मीनार, हुमायूं का मकबरा, अग्रसेन की बावली, हौज खास, लोधी गार्डन, सफदरजंग का मकबरा और फिरोजशाह कोटला सहित कई ऐतिहासिक स्थल शामिल हैं। राष्ट्रीय संग्रहालय, राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र जैसे संस्थानों को भी आयोजन से जोड़ा गया है।
नौ देश आयोजन में भागीदारी की पुष्टि
फ्रांस, इटली, हंगरी, स्विट्जरलैंड और श्रीलंका सहित नौ देश आयोजन में भागीदारी की पुष्टि कर चुके हैं। इसमें भारत के साथ 20 से अधिक देशों की कला, वास्तुकला और डिजाइन को एक मंच पर लाने की योजना है। इस आयोजन का पहला संस्करण वर्ष 2023 में लाल किले में हुआ था।
2026 के आयोजन को दिया जा रहा भव्य रूप
हालांकि, उस समय इसका दायरा सीमित था। वर्ष 2026 के आयोजन को अधिक व्यापक स्वरूप दिया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, 108 दिनों तक दिल्ली के ऐतिहासिक स्मारक, संग्रहालय, कला दीर्घाएं और सार्वजनिक स्थल कला एवं संस्कृति से जुड़े संवाद का हिस्सा बनेंगे।
जंतर-मंतर तीन दशक से अधिक समय तक दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के प्रमुख स्थलों में शामिल रहा है। संसद और महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों के निकट होने के कारण यहां प्रदर्शनों को लेकर लंबे समय से चिंताएं भी जताई जाती रही हैं। अब बिएनाले के लिए इसका चयन राजधानी के ऐतिहासिक स्थलों के उपयोग में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।
