'जंतर-मंतर पर चल रही वामपंथ की प्रेत-साधना', आचार्य मिथिलेशनंदिनीशरण ने सावधान रहने की दी सलाह
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के शब्द रंग महोत्सव में आचार्य मिथिलेशनंदिनीशरण ने जंतर मंतर पर चल रही वामपंथ की प्रेतसाधना को पहचानने की बात कही।

HighLights
जंतर मंतर पर वामपंथ की प्रेतसाधना पहचानने की आवश्यकता।
सत्य की प्रतिष्ठा के लिए शक्ति का होना अनिवार्य।
भारत विरोधी शक्तियों के अंतरराष्ट्रीय दुष्चक्र से सावधान रहें।
जागरण संवाददाता, अयोध्या। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय कला मंच के साहित्य महोत्सव शब्द रंग के दूसरे और अंतिम दिन रविवार को समापन सत्र में हनुमन्न निवास के महंत आचार्य मिथिलेशनंदिनीशरण ने कहा कि जंतर मंतर पर चल रही वामपंथ की प्रेतसाधना को पहचानने की आवश्यकता है। इससे सावधान रहने की आवश्यकता है, इसके लिए सत्य की प्रतिष्ठा करनी होगी और यह सत्य की प्रतिष्ठा बिना शक्ति के संभव नहीं है।
आचार्य ने कहाकि सत्य को प्रतिष्ठित करने के लिए इतनी शक्ति आवश्यक है कि जिससे असत्य को पराजित किया जा सके। जो केवल सत्य का संधान करता है, वह अपने सत्य की प्रतिष्ठा करने में चूक जाता है।
भगवान राम ने जब भगवती को यानी शक्ति को रावण की आसुरी शक्तियों की सहायता करते देखा तो उनको यह भान हुआ और उन्होंने शक्ति पूजा की, जिसे महाप्राण निराला और कृतवास रामायण में निरूपित किया गया है।
शक्ति की आराधना अपने सबसे प्रिय के अर्पण की क्षमता से संभव होती है, क्योंकि जब भगवती की साधना में एक कमल कम पड़ गया तब प्रभु श्रीराम ने कहा कि मेरे नयन भी कमल के समान कहे जाते हैं औऱ उसे अर्पण करने के लिए निर्णय कर लिया। जिस दिन हम अपने जीवन की सुविधा, सौंदर्य और सुकुमारता का उत्सर्ग करने को प्रस्तुत हो जाते हैं, उस दिन अपने सत्य की प्रतिष्ठा करने की शक्ति प्राप्त कर लेते हैं।
भारत में व्यवस्था व वर्गीकरण के नाम पर, हमें शत्रुओं ने उतना आहत नहीं किया है, जितना हमने परस्पर किया है। हमारी परस्परता एक दूसरे को आहत करने वाली न हो, जो हमारी वैदिक प्रार्थना है, हम उसमें अपने को प्रतिष्ठित करें।
नेपाल, बांग्लादेश और फ्रांस में जो हुआ है, वह भारत में हो जाये इसके लिए अंतराष्ट्रीय दुष्चक्र चल रहा है। भारत विरोधी शक्तियां प्राणपण से लगी हुई हैं। ये जो जेन जी आंदोलन चल रहा है, यह भारत में इसलिए सफल नहीं हुआ और ना होगा क्योंकि विद्यार्थी परिषद जैसे संगठन हैं।
समापन सत्र में ऱाष्ट्रीय कला मंच की अवध प्रांत की प्रमुख डॉ. सुनीता शर्मा, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की प्रांत अध्यक्ष प्रो. नीतू सिंह, विद्यार्थी परिषद के ऱाष्ट्रीय मंत्री अभय प्रताप सिंह, राष्ट्रीय कला मंच के राष्ट्रीय प्रमुख अंकित शुक्ल ने भी अपने विचार रखे।ॉ
