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जंतर-मंतर प्रोटेस्ट मामले में पैलेट गन और महिलाओं से दुर्व्यवहार पर होगी जांच, समिति ने जनता से मांगे सबूत

Published: Sat, 24 Oct 2026 08:11 PM (IST)Updated: Sat, 24 Oct 2026 08:13 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट की तरफ से गठित उच्चाधिकार प्राप्त जांच समिति जंतर-मंतर हिंसा मामले में पैलेट गन के इस्तेमाल और महिला प्रदर्शनकारियों से दुर्व्यवहार की जांच कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट की जांच समिति ने मांगे सबूत।

सुप्रीम कोर्ट की जांच समिति ने मांगे सबूत।

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट समिति जंतर-मंतर हिंसा की जांच कर रही है।

  2. पैलेट गन उपयोग, महिला प्रदर्शनकारियों से दुर्व्यवहार की जांच।

  3. पीड़ित 29-30 अक्टूबर को सबूत प्रस्तुत कर सकते हैं।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन के दौरान भड़की हिंसा और पुलिस कार्रवाई के पीड़ित छात्रों और नागरिकों के लिए न्याय की एक नई किरण जगी है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित उच्चाधिकार प्राप्त जांच समिति ने इस मामले की निष्पक्ष जांच तेज कर दी है।

समिति 29 और 30 अक्टूबर को दिल्ली के राउज एवेन्यू स्थित शिक्षा सदन कार्यालय में दो दिवसीय विशेष बैठक करने जा रही है, जिसमें हिंसा के दौरान पैलेट गन के कथित इस्तेमाल और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ हुई बदसलूकी के सबूत दर्ज किए जाएंगे।

अधिकारियों के मुताबिक, हिंसा से प्रभावित कोई भी आम नागरिक या पीड़ित व्यक्ति सुबह साढ़े ग्यारह बजे से दोपहर तीन बजे के बीच वैध पहचान पत्र के साथ सीधे पहुंचकर अपनी शिकायत या सबूत प्रस्तुत कर सकता है।

सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता वाली इस पांच सदस्यीय समिति में न्यायपालिका और पुलिस प्रशासन के कई दिग्गज शामिल हैं, जो दोनों पक्षों से जुड़े बयानों और संपत्ति के नुकसान की भी गहराई से जांच कर रहे हैं।

20 जुलाई को हुई थी झड़प

गौरतलब है कि काकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान सुरक्षाकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई थी, जिसमें लाठीचार्ज और आंसू गैस के साथ-साथ पैलेट गन के इस्तेमाल के गंभीर आरोप लगे थे। इस हिंसक संघर्ष के बाद उठे सवालों और पुलिस ज्यादती की शिकायतों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह जांच समिति बनाई है।

संवेदनशील गवाहों की सुरक्षा और उनकी पहचान गोपनीय रखने के लिए समिति ने एक आनलाइन पोर्टल (एचपीईसी डाट एनआइसी डाट इन) भी शुरू किया है, जहां पीड़ित बिना किसी डर के अपने बयान और सबूत से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रूप से अपलोड कर सकते हैं। इस पारदर्शी जांच से पीड़ितों को न्याय मिलने और सच्चाई सामने आने की उम्मीद बंध गई है।