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जामिया में छात्रसंघ चुनाव का एलान: फिर भी भूख हड़ताल पर क्यों बैठे छात्र? ड्राफ्ट तैयार होने के बाद होगा इलेक्शन

Published: Mon, 26 Oct 2026 11:01 PM (IST)Updated: Mon, 26 Oct 2026 11:05 PM (IST)

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में दो सप्ताह से आंदोलन जारी है। इसी बीच प्रशासन की ओर से छात्रसंघ चुनाव कराने की ...और पढ़ें

जामिया मिल्लिया इस्लामिया परिसर में छात्रों का हंगामा, जागरण।

 जामिया मिल्लिया इस्लामिया परिसर में छात्रों का हंगामा, जागरण।

HighLights

  1. जामिया में छात्रसंघ चुनाव की घोषणा, 15 दिन में होंगे चुनाव।

  2. छात्र ड्राफ्ट फाइनल की समय-सीमा तय करने की मांग पर अड़े।

  3. सोमवार को कैंपस में छात्रों और पुलिस के बीच झड़प हुई।

जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। जामिया मिल्लिया इस्लामिया में पिछले दो सप्ताह से चल रहे आंदोलन के बीच प्रशासन ने सोमवार को छात्रसंघ चुनाव कराने का एलान किया है, जिसके तहत ड्राफ्ट तैयार होने के अगले 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे।

हालांकि, आंदोलनकारी छात्रों ने ड्राफ्ट फाइनल करने की समय-सीमा तय करने की मांग को लेकर भूख हड़ताल जारी रखने का निर्णय लिया है।

कैंपस के बाहर सोमवार को भी हंगामा

इस गतिरोध के बीच सोमवार को कैंपस में भारी हंगामा हुआ, जहां मार्च निकालने का प्रयास कर रहे छात्रों और पुलिस के बीच कई बार झड़पें हुईं। प्रदर्शनकारियों द्वारा लाइब्रेरी के गेट और बाउंड्री की ग्रिल तोड़े जाने के बाद पुलिस ने हंगामा कर रहे करीब आधा दर्जन संदिग्धों को हिरासत में लिया है।

15 दिनों के भीतर कराए जाएंगे चुनाव

जामिया मिल्लिया इस्लामिया प्रशासन ने आंदोलनकारी छात्रों की तीन सूत्रीय लिखित मांगों का संज्ञान लेते हुए एक आधिकारिक आदेश जारी किया है।

इसके तहत छात्रसंघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे। साथ ही प्रशासन ने छात्रों के निलंबन और 'कारण बताओ नोटिस' वापस ले लिए हैं और सुरक्षाकर्मियों के दुर्व्यवहार की जांच के लिए एक समिति गठित की है।

प्रशासन ने रखी शर्त

प्रशासन के अनुसार, 20 दिसंबर तक संविधान का ड्राफ्ट तैयार कर लिया जाएगा। हालांकि, 12 अक्टूबर से भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता मोहम्मद रेहान ने इस पर आपत्ति जताई है। छात्रों का आरोप है कि संविधान को मंजूरी देने की कोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं की गई है, जिससे प्रशासन की मंशा पर सवाल उठते हैं।

छात्रों को डर है कि ड्राफ्ट तैयार होने के बाद भी उसे स्वीकार करने की कोई गारंटी नहीं है। वहीं, प्रशासन ने शर्त रखी है कि छात्र अपने अपमानजनक बयानों और इंटरने मीडिया पोस्ट के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।

पूर्व छात्रों ने किया छात्रसंघ की मांग का समर्थन

जामिया के पूर्व छात्रों और छात्र प्रतिनिधियों ने छात्रसंघ बहाली की मांग का पुरजोर समर्थन किया है। 'जामिया कलेक्टिव' की प्रेसवार्ता में पूर्व छात्रों ने पिछले दो दशकों से चुनी हुई छात्र यूनियन न होने पर गहरी चिंता जताई। एसएफआई प्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालय के सुरक्षा सलाहकार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

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