जामिया में छात्र संघ चुनाव का 20 साल से हो रहा इंतजार, नए वादों से क्या बन सकेगी बात?
जामिया मिलिया इस्लामिया में 20 साल बाद छात्र संघ चुनाव की बहाली की उम्मीद जगी है, क्योंकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने ...और पढ़ें

जामिया में सोमवार दोपहर छात्रसंघ चुनावों की मांग को लेकर हो रहे प्रदर्शन के बीच मुख्य गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मी। जागरण
HighLights
जामिया में 20 साल से छात्र संघ चुनाव नहीं हुए।
प्रशासन ने नए संविधान के बाद चुनाव कराने का भरोसा दिया।
छात्र चुनाव की अंतिम तारीख को लेकर चिंतित हैं।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्र संघ चुनाव को लेकर हलचल एक बार फिर तेज हो गई है। वर्ष 2006 में छात्र संघ भंग किए जाने के बाद से लगातार 20 वर्षों से चुनावों पर रोक लगी हुई है। अब विश्वविद्यालय प्रशासन ने नया संविधान तैयार होने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराने का भरोसा दिया है। इससे छात्रों की पुरानी मांग को नया बल मिल गया है।
20 वर्षों का सफर और उतार-चढ़ाव
- 1981-82: जामिया में पहली बार निर्वाचित छात्र संघ का गठन हुआ था।
- 1997: परिसर में अशांति के कारण पहली बार चुनाव रोक दिए गए।
- 2005: चुनावों की दोबारा बहाली हुई, लेकिन यह दौर काफी छोटा रहा।
- 31 मार्च 2006: हिंसा और माहौल को अनुपयुक्त बताते हुए छात्र संघ को आधिकारिक रूप से भंग कर दिया गया।
- 2012: दिल्ली उच्च न्यायालय ने जामिया को एक समिति गठित कर चुनाव की संभावना तलाशने को कहा था। हालांकि, मसौदा नियम बनने के बावजूद चुनाव नहीं कराए गए।
- 2022: दिल्ली हाई कोर्ट ने पुरानी याचिका का निपटारा करते हुए स्पष्ट किया कि कोर्ट ने चुनाव पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है और विश्वविद्यालय प्रशासन इसे बहाल कर सकता है।
वर्तमान स्थिति और छात्रों की चिंताएं
हाल ही में छात्रों ने छात्र संघ की बहाली को लेकर भूख हड़ताल और विरोध प्रदर्शन शुरू किया। इसके बाद 21 अक्टूबर को जामिया प्रशासन ने छात्र संघ का नया संविधान बनाने के लिए एक समिति का गठन किया।
इसके बाद 26 अक्टूबर को प्रशासन ने घोषणा की कि संविधान को स्वीकृति मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव आयोजित किए जाएंगे। हालांकि, छात्रों में इस बात को लेकर अब भी चिंता बनी हुई है कि इस नए संविधान को अंतिम मंजूरी कब मिलेगी और चुनाव की पक्की तारीख का ऐलान कब किया जाएगा।
