विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

जामिया के छात्रों की बड़ी जीत, अब 2027 में होंगे छात्रसंघ चुनाव; 18 दिन बाद खत्म हुई भूख हड़ताल

Published: Thu, 29 Oct 2026 10:43 PM (IST)

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में 18 दिनों से चला आ रहा छात्र-प्रशासन गतिरोध समाप्त हो गया है, जिसमें प्रशासन ने छात्रों ...और पढ़ें

जामिया प्रशासन ने छात्रों की बात मानीं। फोटो: आर्काइव

जामिया प्रशासन ने छात्रों की बात मानीं। फोटो: आर्काइव

HighLights

  1. जामिया में 18 दिन का छात्र-प्रशासन गतिरोध समाप्त हुआ।

  2. प्रशासन ने छात्रों की सभी मांगें स्वीकार कर ली हैं।

  3. छात्रसंघ चुनाव जुलाई 2027 तक आयोजित किए जाएंगे।

जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ बहाली को लेकर चल रहे आंदोलन में आखिरकार छात्रों की जीत हुई। इसी के साथ पिछले 18 दिनों से प्रशासन व छात्रों के बीच चल रहा गतिरोध भी समाप्त हो गया।

देर रात कुलगुरु प्रो. मजहर आसिफ व रजिस्ट्रार प्रो. महताब आलम रिजवी भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों के बीच पहुंचे और सभी मांगें मान लेने की जानकारी दी।

रजिस्ट्रार कार्यालय की ओर से जारी आदेश के मुताबिक जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्रसंघ के संविधान का अनुमोदन और उसे लागू करने की प्रक्रिया 15 मई 2027 तक पूरी कर ली जाएगी।

वहीं संविधान के अनुमोदन के बाद, विश्वविद्यालय लिंगदोह समिति की सिफारिशों और दिशानिर्देशों के अनुसार चुनाव के लिए अधिसूचना जारी करेगा। यह तारीख लिंगदोह समिति के नियमों द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुरूप होगी।

अगले वर्ष जुलाई तक होंगे छात्रसंघ चुनाव

चुनाव शैक्षणिक सत्र शुरू होने के छह सप्ताह के भीतर, यानी लगभग 16 जुलाई 2027 की तिथि से छह सप्ताह के भीतर आयोजित किए जाएंगे।

वहीं विरोध-प्रदर्शन के दौरान भागीदारी के संबंध में जारी किए गए सभी कारण बताओ नोटिस, अनुशासनात्मक कार्रवाई, निष्कासन, निलंबन और परिसर में प्रवेश पर प्रतिबंध के आदेश वापस लिए जाएंगे।

रजिस्ट्रार प्रो. मोहम्मद महताब आलम रिजवी की ओर से आदेश की कॉपी सौंपने के साथ ही छात्रों ने आंदोलन समाप्त कर दिया।

कई दौर की बातचीत के बाद बनी सहमति

छात्रों के मुताबिक भूख हड़ताल और अनिश्चितकालीन धरने के बाद, जामिया के छात्र अपनी मुख्य मांगों को मनवाने में सफल रहे हैं। छात्र लगातार यह मांग कर रहे थे कि छात्र संघ की बहाली के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय की जाए।

छात्रों के प्रतिनिधिमंडल और विश्वविद्यालय के प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत के बाद, अब इस जीत पर मुहर लग गई है। बातचीत में छात्रों की ओर से मोहियुद्दीन (एनएसयूआई के एबिन बेसिल के प्रतिनिधि), फरहान इसराइल (रेहान खान के प्रतिनिधि), लुबैब, उत्तरा, नेविल थामस, सहद और हबीबा शामिल रहे।

सांसद हारिस बीरम के हस्तक्षेप से खत्म हुआ गतिरोध

छात्रों के मुताबिक पिछले तीन दिनों तक चली लंबी बातचीत के बाद केरल के सांसद हारिस बीरम के हस्तक्षेप से गतिरोध खत्म हुआ। हारिस ने कुलगुरु के साथ छात्रों की मांगों पर चर्चा की, जिसके बाद वे रजिस्ट्रार के साथ आए और घोषणा की कि छात्रों की सभी मुख्य मांगें मान ली गई हैं।

छात्रों के मुताबिक पिछले 20 वर्षों से छात्र संघ न होने के बावजूद, पिछले 18 दिनों के संघर्ष, भूख हड़ताल करने वालों की बिगड़ती सेहत और पूरे परिसर में बढ़ते तनाव के बाद भी परिणाम छात्रों की पूर्ण जीत के रूप में सामने आया है।

यह भी पढ़ें- 'मैं दिमागी नक्सली हूं...', जामिया में विरोध-प्रदर्शन को लेकर नसीरुद्दीन शाह का सरकार पर हमला

यह भी पढ़ें- लोहे की रॉड और हथौड़े लेकर पहुंचे नकाबपोश, जामिया में तोड़फोड़; स्थापना दिवस कार्यक्रम कैंसिल