जामिया में छात्रों की भूख हड़ताल जारी, मांगों पर विचार के लिए बनी सात सदस्यीय उच्च-स्तरीय समिति
जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रों की भूख हड़ताल आठवें दिन भी जारी है। छात्रों द्वारा छात्रसंघ की बहाली और चीफ प्रॉक्टर के इस्तीफे की मांग की जा रही है।
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जामिया मिल्लिया इस्लामिया, जागरण आर्काइव।
HighLights
छात्रसंघ बहाली और चीफ प्रॉक्टर के इस्तीफे की मांग।
कुलगुरु ने सात सदस्यीय उच्च-स्तरीय समिति गठित की।
समिति छात्रों से बातचीत कर शांति बहाली पर काम करेगी।
जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली: जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रों की भूख हड़ताल आठवें दिन भी जारी रही। छात्रसंघ बहाली के साथ ही छात्र 17 अक्टूबर की घटना को लेकर चीफ प्राक्टर के इस्तीफे और छात्रों के ऊपर अनुशासनात्मक कार्रवाई रद करने की मांग कर रहे हैं।
वहीं कुलगुरु प्रो. मजहर आसिफ ने वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक लेते हुए सात सदस्यीय एक उच्च-स्तरीय समिति गठित की। यह समिति भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों से बातचीत करेगी। उनकी मांगों की जांच करेगी और परिसर में शांति बहाली एवं सामान्य स्थिति वापस लाने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।
दिल्ली कोर्ट ने नहीं दिया कोई निर्देश
बता दें कि हिंसक झड़पों, शिक्षकों पर हमलों और कक्षाओं में बार-बार व्यवधान डालने की घटनाओं को लेकर 2006 में जामिया में छात्रसंघ चुनावों को भंग कर दिया था। तब से अब तक परिसर में हिंसक घटनाओं और बार-बार कामकाज ठप होने के इतिहास को देखते हुए कोर्ट ने भी विश्वविद्यालय को इस संबंध में कोई निर्देश नहीं दिया है।
स्टैंडिंग काउंसिल की दलीलों को स्वीकारा
विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक, 2022 में दिल्ली हाई कोर्ट ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया के स्टैंडिंग काउंसिल की दलीलों और तर्कों को स्वीकार किया था। वर्ष 2006 और उसके बाद परिसर में हुई हिंसक झड़पों के इतिहास को देखते हुए कोर्ट ने विश्वविद्यालय को छात्र संघ चुनाव कराने का कोई निर्देश नहीं दिया और मामले का निपटारा कर दिया।
बावजूद इसके प्रशासन इस बात पर जोर देता है कि परिसर में शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए आपसी सहयोग बहुत जरूरी है। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन सभी से अपील करता है कि वे 106 साल पुराने इस विश्वविद्यालय के नाम, प्रतिष्ठा और इसकी उच्च राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग को सुरक्षित रखने की दिशा में मिलकर काम करें।
