'मम्मी, मैं बहुत परेशान हूं', ऋषिकेश ने सुसाइड से पहले मां से की थी बात; भाई का IIT दिल्ली पर गंभीर आरोप
आईआईटी दिल्ली के छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद परिवार ने संस्थान की व्यवस्था और छात्र को मिले सहयोग ...और पढ़ें

आईआईटी दिल्ली में स्टूडेंट ऋषिकेश कुमार के सुसाइड के बाद हो रहा है विरोध। फोटो: इंटरनेट
HighLights
ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद परिवार ने सवाल उठाए
आईआईटी दिल्ली ने बाहरी जांच समिति गठित की
छात्र कल्याण मुद्दों पर संस्थान में प्रदर्शन जारी
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। IIT दिल्ली में 22 अगस्त को मृत मिले 31 वर्षीय एमएससी भौतिकी के छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के बाद परिवार ने संस्थान की व्यवस्थाओं और छात्र को मिली मदद को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
ऋषिकेश ने मौत से एक रात पहले अपनी मां आशा पोद्दार से अपनी मानसिक स्थिति और पढ़ाई को लेकर बात की थी। परिवार के अनुसार, वह काफी परेशान था और घर लौटना चाहता था। अगले दिन परिसर में उसकी मौत हो गई। मामले की जांच के लिए IIT दिल्ली ने पांच सदस्यीय बाहरी समिति गठित की है।
मौत से एक रात पहले मां से की थी बात
ऋषिकेश की मां आशा पोद्दार के अनुसार, मौत से एक रात पहले बेटे ने उनसे अपनी परेशानी साझा की थी। वह काफी तनाव में था और अपनी स्थिति को लेकर मां से बातचीत कर रहा था। परिवार के मुताबिक, उसने अपनी परेशानी और भविष्य को लेकर चिंता जताई थी।
मां आशा पोद्दार ने कहा कि बेटे ने रोते हुए कहा था कि वह बहुत परेशान है और आत्महत्या के विचार से भी डर लग रहा है। अगले दिन परिसर में उसकी मौत हो गई।
ऋषिकेश के भाई अभिषेक कुमार ने बताया कि भाई ने मां को बताया था कि उसके मन में आत्महत्या के विचार आ रहे हैं। परिवार ने डॉक्टर से भी सलाह ली थी। अभिषेक ने कहा ऋषिकेश बार-बार पटना लौटने की बात कह रहा था। वह पढ़ाई में आ रही परेशानियों और हास्टल नहीं मिलने को लेकर भी तनाव में था।
पढ़ाई और हाॅस्टल को लेकर था तनाव
परिवार के अनुसार, ऋषिकेश पढ़ाई को लेकर काफी गंभीर था। पहले सेमेस्टर में उसने 8 सीजीपीए हासिल किया था। बाद में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानी के कारण उसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।
भाई का कहना है कि हास्टल में कमरा नहीं मिलने से भी ऋषिकेश परेशान था। वह परिसर के बाहर रहकर पढ़ाई करने में कठिनाई महसूस करता था और परिवार से घर लौटने की बात करता रहता था।
पिता की मौत के बाद भी जारी रखी पढ़ाई
परिवार के अनुसार, वर्ष 2014 में पिता की मौत के बाद ऋषिकेश को NIT राउरकेला की पढ़ाई छोड़नी पड़ी थी। बाद में उसने मगध विश्वविद्यालय से भौतिकी की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद जुलाई 2025 में उसका दाखिला IIT दिल्ली में हुआ।
परिवार के लिए IIT में दाखिला उसके लंबे शैक्षणिक सफर की बड़ी उपलब्धि थी। भाई के अनुसार, ऋषिकेश IIT में पढ़ाई करने को लेकर बेहद उत्साहित था।
IIT ने उपचार और काउंसलिंग की जानकारी दी
IIT दिल्ली के अनुसार, इस वर्ष होली के बाद साथी छात्रों की ओर से चिंता जताए जाने पर ऋषिकेश को संस्थान के अस्पताल ले जाया गया था। वहां मनोचिकित्सक ने उसका आकलन किया और सहायता दी। बाद में परिवार उसे विशेषज्ञ अस्पताल ले गया, जहां करीब एक महीने तक उसका उपचार हुआ।
संस्थान के अनुसार, इसके बाद ऋषिकेश ने दूसरे सेमेस्टर से नाम वापस लेने का अनुरोध किया था, जिसे मंजूर कर लिया गया। जुलाई में उसके स्वास्थ्य रिकॉर्ड की समीक्षा की गई और उसे अभिभावकों की निगरानी में रहने की सलाह दी गई।
जुलाई और अगस्त में भी संस्थान के काउंसलर और डॉक्टर की ओर से काउंसलिंग और उपचार संबंधी सहायता दिए जाने की बात कही गई है। तीसरे सेमेस्टर से नाम वापस लेने का अनुरोध भी मंजूर किया गया था।
परिवार ने संस्थान की व्यवस्था पर उठाए सवाल
ऋषिकेश के भाई ने इलाज के बाद संस्थान की ओर से अतिरिक्त जांच और एनओसी की मांग किए जाने पर सवाल उठाए हैं। परिवार का कहना है कि बाहरी विशेषज्ञों से उपचार के बावजूद संस्थान की प्रक्रिया से ऋषिकेश का तनाव बढ़ा।
हास्टल में कमरा नहीं मिलने को लेकर भी परिवार ने संस्थान की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। भाई के अनुसार, ऋषिकेश को लगता था कि परिसर के बाहर रहकर उसकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
पहले भी बता चुका था परेशानी
परिवार का दावा है कि ऋषिकेश ने पहले भी अपनी गंभीर मानसिक परेशानी के बारे में मां को बताया था। परिवार ने उस दौरान डॉक्टर से सलाह लेने की बात कही है। अब उसकी मौत के बाद परिवार संस्थान से जुड़े इन सभी पहलुओं पर सवाल उठा रहा है।
पांच सदस्यीय समिति करेगी जांच
IIT दिल्ली ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय बाहरी समिति गठित की है। संस्थान ने छात्र कल्याण और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता बताते हुए समिति के माध्यम से मौत से जुड़ी परिस्थितियों की जांच कराने की बात कही है।
पुलिस के अनुसार, मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। छात्र का मोबाइल फोन कब्जे में लेकर जांच की जा रही है। अब बाहरी समिति की जांच से घटना से जुड़े विभिन्न पहलुओं की स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
