IIT छात्र आत्महत्या केस: बैठक में फूटा छात्रों का गुस्सा, एक करोड़ मुआवजे की मांग पर प्रशासन बोला- इतना नहीं दे सकते
आईआईटी दिल्ली में छात्र ऋषिकेश कुमार की आत्महत्या के बाद छात्रों का विरोध प्रदर्शन दूसरे दिन भी जारी रहा। प्रशासन ...और पढ़ें

आईआईटी दिल्ली छात्र आत्महत्या: मुआवजे और इस्तीफे की मांग पर अड़े छात्र।
HighLights
छात्रों ने ऋषिकेश के परिवार के लिए एक करोड़ मुआवजा मांगा।
प्रशासन ने अधिकारियों के इस्तीफे की मांग ठुकराई, मुआवजा कम बताया।
मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की गई।
लोकेश शर्मा, नई दिल्ली। आईआईटी दिल्ली में एमएससी द्वितीय वर्ष के छात्र ऋषिकेश कुमार की आत्महत्या के बाद संस्थान में मंगलवार को दूसरे दिन भी छात्रों का धरना जारी रहा। छात्रों और प्रशासन के बीच हुई बैठक में एक करोड़ रुपये मुआवजा, अधिकारियों के इस्तीफे, मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था और हॉस्टल सुविधा जैसे मुद्दों पर तीखा टकराव हुआ।
छात्रों ने परिवार को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग रखी, लेकिन निदेशक ने इतनी राशि देने की प्रतिबद्धता से इनकार कर दिया। प्रशासन ने छह लाख रुपये के मानक बेनेवोलेंट फंड और मेडिकल खर्च की भरपाई का प्रस्ताव दिया। वहीं, छात्र कल्याण की एसोसिएट डीन प्रो. श्रीदेवी उपाध्यायुला और हॉस्टल प्रबंधन के एसोसिएट डीन प्रो. प्रबल तालुकदार समेत अन्य अधिकारियों के इस्तीफे की मांग पर भी प्रशासन ने सहमति नहीं दी।
वहीं आईआईटी दिल्ली में इस स्तर और मुद्दों को लेकर इस तरह का प्रदर्शन पहली बार हुआ है। जहां हजारों की तादाद में छात्र एकत्रित होकर अपने साथियों की आवाज उठा रहे है।
बैठक में छात्रों ने स्पष्ट किया कि केवल आर्थिक सहायता की घोषणा से उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी। छात्रों ने कहा कि ऋषिकेश की मौत के बाद संस्थान की छात्र सहायता व्यवस्था, हॉस्टल आवंटन, मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और अधिकारियों की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। साथ ही शिक्षकों, छात्रों और कर्मचारियों के स्वैच्छिक योगदान से परिवार के लिए अलग सहायता कोष बनाने की बात कही गई। छात्रों ने मांग की कि सहायता की राशि सीधे मृत छात्र की मां के खाते में भेजी जाए।
मौजूदा प्रोटोकॉल को तत्काल सार्वजनिक करने की मांग
छात्रों ने मानसिक स्वास्थ्य और हॉस्टल-आवास से संबंधित मौजूदा प्रोटोकॉल को तत्काल सार्वजनिक करने की मांग भी रखी। निदेशक रंगन बनर्जी ने प्रोटोकाल जारी करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि ने मानसिक स्वास्थ्य संबंधी प्रोटोकाल काउंसलर और मनोचिकित्सकों से परामर्श के बाद तैयार किए गए हैं।
छात्रों की भागीदारी वाली समिति से इनकी समीक्षा कराने पर भी चर्चा हुई। इसके साथ ही जरूरतमंद छात्रों के लिए शिक्षक-छात्र मार्गदर्शक व्यवस्था शुरू करने और लंबित शिकायतों के समाधान के लिए बाहरी लोकपाल नियुक्त करने की योजना बताई गई।
छात्रों ने अधिकारियों पर शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेने और असंवेदनशील व्यवहार करने का आरोप लगाया है। हालांकि, प्रशासन ने इस्तीफे की मांग स्वीकार नहीं की।
पांच सदस्यीय जांच समिति करेगी जांच
छात्र की मौत की परिस्थितियों और संस्थान की व्यवस्थाओं की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति बनाई गई है। इसमें उत्तराखंड के पूर्व पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार, एम्स नई दिल्ली के मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख प्रो. प्रताप शर्मा, दो छात्र प्रतिनिधि और आइआइटी दिल्ली के कुलसचिव शामिल हैं।
कुलसचिव समिति के सचिव एवं संयोजक होंगे। समिति छात्रों और शिक्षकों से बातचीत करेगी और प्रशासनिक व्यवस्था, मौजूदा नियमों तथा छात्र सहायता तंत्र की समीक्षा कर सुधार के सुझाव देगी। समिति को दो सप्ताह में रिपोर्ट सौंपनी है।
22 अगस्त को हुई थी ऋषिकेश की मौत
पुलिस के अनुसार 22 अगस्त की सुबह करीब 8:33 बजे सूचना मिली थी कि एक छात्र व्याख्यान कक्ष परिसर की छठी मंजिल से गिर गया है। ऋषिकेश को संस्थान के अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है।
छात्र के मोबाइल फोन और संस्थान से जुड़े अभिलेखों की जांच की जा रही है। छात्रों का कहना है कि जांच के साथ संस्थान को छात्र सहायता और मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था में ठोस बदलाव करने होंगे, तभी उनकी नाराजगी दूर होगी।
