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'वर्ष 2040 तक चांद पर उतरेगा भारत', इसरो अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने बताया अंतरिक्ष मिशन का पूरा रोडमैप

Published: Fri, 25 Sep 2026 07:37 PM (IST)

इसरो अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने भारत के अंतरिक्ष मिशन का रोडमैप बताया, जिसमें 2040 तक चंद्रमा पर मानव भेजने ...और पढ़ें

इसरो के अध्यक्ष एवं अंतरिक्ष विभाग के सचिव डाॅ. वी. नारायणन ने आईआईटी दिल्ली में आयोजित संस्थान व्याख्यान में शिरकत करने पहुंचे।

इसरो के अध्यक्ष एवं अंतरिक्ष विभाग के सचिव डाॅ. वी. नारायणन ने आईआईटी दिल्ली में आयोजित संस्थान व्याख्यान में शिरकत करने पहुंचे।

HighLights

  1. 2040 तक भारत का चंद्रमा पर मानव भेजने का लक्ष्य।

  2. भारत इन-स्पेस डॉकिंग तकनीक में दुनिया का चौथा देश।

  3. चंद्रयान-3 की सफलता भारत की महत्वपूर्ण अंतरिक्ष उपलब्धि बनी।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के साथ अंतरिक्ष क्षेत्र में अपनी क्षमताओं का तेजी से विस्तार कर रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष एवं अंतरिक्ष विभाग के सचिव डाॅ. वी. नारायणन ने आईआईटी दिल्ली में आयोजित संस्थान व्याख्यान में कहा कि देश अब अंतरिक्ष तकनीक में आत्मनिर्भरता से आगे बढ़कर वैश्विक स्तर पर अपनी क्षमता मजबूत कर रहा है। भारत ने 2040 तक चंद्रमा पर मानव उतारने का लक्ष्य रखा है।

भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम

भारत की अंतरिक्ष यात्रा से लेकर अगले दशक की योजनाओं तक का रोडमैप साझा करते हुए 'चुनौतियां और आगे की राह' विषय पर आयोजित व्याख्यान में डॉ. नारायणन ने 1962 में भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत से लेकर वर्तमान उपलब्धियों तक का उल्लेख किया।

उन्होंने बताया कि नवंबर 1963 में थुंबा से भारत का पहला राकेट प्रक्षेपित किया गया था। उस समय राॅकेट तैयार करने में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से जुटाए गए उपकरणों का इस्तेमाल हुआ था, जबकि आज भारत दूसरे देशों के उपग्रहों को भी व्यावसायिक आधार पर प्रक्षेपित करने में सक्षम है।

इन-स्पेस डाॅकिंग तकनीक वाला भारत चौथा देश

उन्होंने क्रायोजेनिक इंजन तकनीक का उदाहरण देते हुए कहा कि 1990 के दशक की शुरुआत में भारत को यह तकनीक देने से इनकार किया गया था। इसके बाद देश ने खुद तकनीक विकसित करने का निर्णय लिया और अब तीन क्रायोजेनिक प्रणोदन प्रणालियां स्वदेशी रूप से विकसित कर चुका है।

डाॅ. नारायणन ने चंद्रयान-3 की सफलता को भारत की अंतरिक्ष यात्रा की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। 23 अगस्त 2023 को भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में सफल सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला पहला देश बना। उन्होंने बताया कि भारत इन-स्पेस डाॅकिंग तकनीक सफलतापूर्वक प्रदर्शित करने वाला दुनिया का चौथा देश भी बन चुका है।

गगनयान से चंद्रमा तक मिशन

इसरो अध्यक्ष ने अगले दशक की योजनाओं में गगनयान के पहले मानवरहित मिशन, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के पहले मॉड्यूल को 2028 तक प्रक्षेपित करने, 2035 तक इसके आगे के माड्यूल विकसित करने और चंद्रयान-4 के जरिए चंद्रमा से नमूने पृथ्वी पर लाने की योजना बताई।

इसके अलावा शुक्र मिशन और 2040 तक मानव को चंद्रमा पर उतारने का लक्ष्य भी रखा गया है। 30 हजार किलोग्राम तक भार को लो-अर्थ आर्बिट में पहुंचाने वाले अगली पीढ़ी के प्रक्षेपण यान और आंशिक रूप से पुन: उपयोग किए जा सकने वाले लॉन्च व्हीकल पर भी काम चल रहा है। आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रो. रंगन बनर्जी ने कहा कि अंतरिक्ष उन क्षेत्रों में शामिल है, जहां भारत ने वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी स्वदेशी तकनीक विकसित की है।

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