दिल्ली को मिला इंदौर का फार्मूला, डीजल से 14% सस्ती पड़ेंगी इलेक्ट्रिक कचरा गाड़ियां; 75% घटेगा प्रदूषण
इंदौर में इलेक्ट्रिक कचरा संग्रहण वाहनों के एक अध्ययन से पता चला है कि ये वाहन डीजल और सीएनजी की तुलना में कुल लागत में 12-14% कम खर्चीले हैं।

इंडौर में इलेक्ट्रिक गाड़ियों से उठाया जाता है वेस्ट। फोटो: आर्काइव
HighLights
इलेक्ट्रिक वाहन डीजल से 14% और सीएनजी से 12% कम लागत
डीजल वाहनों की तुलना में 75% कम कार्बन उत्सर्जन होता है
दिल्ली के कचरा प्रबंधन में लागत और प्रदूषण घटाने का अवसर
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दिल्ली में घर-घर से कचरा उठाने वाले वाहनों का बड़ा बेड़ा चलाने वाले नगर निगम के लिए इंदौर का एक अध्ययन खर्च और प्रदूषण दोनों कम करने का रास्ता दिखाता है।
इंदौर नगर निगम की 92 इलेक्ट्रिक कचरा कलेक्शन गाड़ियों को चलाए जाने के आंकड़ों के अध्ययन में सामने आया है कि इलेक्ट्रिक वाहन डीजल की तुलना में 14 प्रतिशत और सीएनजी की तुलना में 12 प्रतिशत कम कुल लागत पर चलते हैं।
यह अध्ययन इंडिया हैबीटेट सेंटर में तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन अर्बन अड्डा में सोमवार को जारी किया गया।
इंटरनेशनल क्लीन ट्रांसपोर्ट काउंसिल (आईसीसीटी) और मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) के इस अध्ययन के मुताबिक, इन इलेक्ट्रिक गाड़ियों ने डीजल के मुकाबले 91 प्रतिशत कम ऊर्जा और सीएनजी के मुकाबले 89 प्रतिशत कम ऊर्जा इस्तेमाल की।
खास बात यह है कि कचरा संग्रहण का काम बार-बार रुकने और चलने वाला होता है, फिर भी इलेक्ट्रिक गाड़ियों की ऊर्जा खपत केवल 0.20 किलोवाट घंटा प्रति किमी रही।
दिल्ली के लिए इसलिए महत्वपूर्ण
दिल्ली जैसे बड़े शहर में कचरा कलेक्शन वाहन रोज चलाए जाते हैं। ऐसे में सिर्फ खरीद कीमत के बजाय वाहन की पूरी अवधि में ईंधन, बिजली और रखरखाव पर होने वाला खर्च महत्वपूर्ण है।
इंदौर के आंकड़े बताते हैं कि शुरुआत में इलेक्ट्रिक वाहन महंगे होने के बावजूद कम ऊर्जा और रख-रखाव खर्च के कारण लंबी अवधि में कुल लागत कम हो सकती है। हालांकि अध्ययन दिल्ली में संभावित बचत की कोई राशि नहीं बताता।
प्रदूषण में 75 प्रतिशत तक कमी
अध्ययन के मुताबिक मौजूदा बिजली मिश्रण के आधार पर इलेक्ट्रिक कचरा गाड़ियों का जीवनचक्र उत्सर्जन 220 ग्राम सीओ2 समतुल्य प्रति किमी अनुमानित है, जो डीजल गाड़ियों से 75 प्रतिशत कम है। इंदौर में सौर ऊर्जा से चलने वाले चार्जिंग स्टेशन से चार्ज होने वाली गाड़ियों में यह कमी 89 प्रतिशत तक रही।
2030 तक बड़ा मौका
अध्ययन के अनुसार 2030 तक भारत के शहरों को करीब 80 हजार कचरा संग्रहण वाहनों की जरूरत का अनुमान है। ऐसे में नगर निकायों के लिए नए वाहनों की खरीद में इलेक्ट्रिक विकल्प पर विचार करना लागत एवं उत्सर्जन दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है।
इंदौर में इलेक्ट्रिक कचरा गाड़ियों का हिसाब
- औसत दैनिक दूरी : 16 किमी
- ऊर्जा खपत : 0.20 किलोवाट घंटा/किमी
- डीजल के मुकाबले ऊर्जा खपत : 91 प्रतिशत कम
- सीएनजी के मुकाबले : 89 प्रतिशत कम
- छह साल में इलेक्ट्रिक लागत : 67.4/किमी
- डीजल : 78.7/किमी
- सीएनजी : ₹76.9/किमी
- डीजल के मुकाबले कुल लागत बचत : 14 प्रतिशत
- सीएनजी के मुकाबले : 12 प्रतिशत
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