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कैंसर से जंग में भारत का AI मॉडल बनेगा ब्रिक्स देशों का सहारा, शुरुआती पहचान से इलाज तक मिलेगी मदद

Published: Tue, 15 Sep 2026 05:25 AM (IST)

भारत में विकसित एआई आधारित कैंसर प्लेटफॉर्म आइआंकोलाजी.एआई ब्रिक्स देशों के लिए एक उपयोगी मॉडल बन सकता है, जो कैंसर की शुरुआती पहचान और उपचार में सहायता करेगा।

एआई जेनेरेटेड इमेज।

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HighLights

  1. भारत का एआई प्लेटफॉर्म आइआंकोलाजी.एआई ब्रिक्स के लिए मॉडल।

  2. कैंसर की शुरुआती पहचान, जोखिम आकलन में प्रभावी सहायक।

  3. एम्स और सी-डैक ने मिलकर किया है इसे विकसित।

अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। कैंसर की बढ़ती चुनौती के बीच भारत में विकसित एआइ आधारित कैंसर प्लेटफार्म आइआंकोलाजी.एआइ ब्रिक्स देशों के लिए उपयोगी माडल बन सकता है।

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के बीच ''''द ब्रिक्स हेल्थ जर्नल'''' में 10 सितंबर को प्रकाशित समीक्षा लेख में इसकी वैश्विक उपयोगिता की संभावनाओं को प्रस्तुत किया गया है।

कहां गया है कि यह संसाधन सीमित देशों में कैंसर की शुरुआती पहचान, जोखिम के आकलन और उपचार संबंधी निर्णय में चिकित्सकों की प्रभावी सहायता कर सकती है। इसे प्रोफेसर इंचार्ज एम्स डिपार्टमेंट आफ बायोकेमिस्ट्री न्यूरोबायोकेमिस्ट्री डिवीजन एंड मालिक्यूलर डायग्नोस्टिक लैब प्रो. डा. अशोक शर्मा ने लिखा है।

ब्रिक्स देशों में कैंसर का बड़ा बोझ

डा. अशोक शर्मा ने बताया कि ग्लोबोकैन 2024 के आंकड़ों के अनुसार ब्रिक्स देशों में हर वर्ष करीब 90 लाख नए कैंसर मामले आते हैं और 46.6 लाख मौतें होती हैं। ये देश दुनिया की 40 प्रतिशत से अधिक जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं।

बीते वर्ष चीन में 51.5 लाख नए मामले और 25.8 लाख मौतें दर्ज की गईं, जबकि भारत में 15.6 लाख नए मामले और करीब नौ लाख मौतें हुईं।

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भारत में आने वाले वर्षों में कैंसर बढ़ने का अनुमान है। 2040 तक नए मामलों की संख्या 23.3 लाख तक पहुंच सकती है। महिलाओं में स्तन कैंसर सबसे अधिक पाया जाने वाला कैंसर है।

डा. अशोक शर्मा ने बताया भारतीय मरीजों के आंकड़ों पर आधारित आइआंकोलाजी.एआइ को इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सहयोग से एम्स नई दिल्ली और सी-डैक पुणे ने विकसित किया है।

इसका उद्देश्य कैंसर की शुरुआती पहचान, खतरे के आकलन और उपचार संबंधी निर्णय में चिकित्सकों को सहायता देना है। यह अभी परीक्षण और चिकित्सकीय मान्यता के चरण में है।

ब्रिक्स में तकनीकी सहयोग की संभावना

डा. अशोक शर्मा ने बताया कि संसाधन-सीमित देशों में कैंसर विशेषज्ञों की कमी और बीमारी की देर से पहचान बड़ी चुनौती है। ऐसे में स्थानीय मरीजों के आंकड़ों पर आधारित कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माडल चिकित्सकों की सहायता कर सकते हैं।

हालांकि, इनके व्यापक उपयोग के लिए अलग-अलग देशों की स्वास्थ्य प्रणालियों के अनुरूप बदलाव आवश्यक है।

सदस्य देशों के बीच स्वास्थ्य आंकड़ों की परस्पर उपयोगिता, तकनीकी सहयोग और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माडल विकसित करने का आधार बन सकता है। यह विकसित भारत 2047, डिजिटल इंडिया और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन से जुड़े डिजिटल स्वास्थ्य प्रयासों के अनुरूप है।

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