आतंकवाद पर सख्त रुख, पहलगाम हमले की निंदा में चीन भी भारत के साथ; ब्रिक्स समित की दुनिया भर में गूंज
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में नई दिल्ली घोषणापत्र को भारत की कूटनीतिक क्षमता का अहम उदाहरण बताया गया है। आतंकवाद ...और पढ़ें
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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत की कूटनीतिक जीत (फोटो- PTI)
HighLights
नई दिल्ली घोषणापत्र भारत की कूटनीतिक क्षमता का प्रमाण
आतंकवाद के खिलाफ ब्रिक्स देशों की शून्य सहिष्णुता नीति
पहलगाम हमले की निंदा में चीन का भारत को समर्थन
पीटीआई, नई दिल्ली। भारत में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफलता की गूंज अब दुनिया भर में सुनाई दे रही है। अमेरिकी समेत अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों और भारतीय राजनयिकों ने नई दिल्ली घोषणापत्र को भारत की कूटनीतिक क्षमता और बदलती वैश्विक भूमिका का अहम उदाहरण बताया है।
खास तौर पर आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक रुख और पहलगाम आतंकी हमले की निंदा में चीन को साथ लाना भारत के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
ब्रिक्स देशों ने आतंकवाद के किसी भी रूप के प्रति जीरो टालरेंस की नीति पर सहमति जताई। घोषणापत्र में पिछले साल अप्रैल में हुए पहलगाम आतंकी हमले की भी निंदा की गई। इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद भारत ने ‘आपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान में स्थित आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था।
विश्लेषकों के मुताबिक, पहलगाम हमले की निंदा में चीन की भागीदारी भारत की कूटनीतिक सफलता का महत्वपूर्ण पहलू है।
अटलांटिक काउंसिल के दक्षिण एशिया मामलों के वरिष्ठ फेलो माइकल कुगेलमैन ने भारत की मेजबानी को सफल बताते हुए कहा कि पहले ही दिन साझा घोषणापत्र जारी होना दिखाता है कि अलग-अलग विचार रखने वाले देशों के बीच आम सहमति बनाने में भारत सफल रहा।
उनके मुताबिक, ब्रिक्स की खासियत ही यह है कि यह आम सहमति पर आधारित समूह है और भारत ने इस क्षमता का प्रभावी इस्तेमाल किया।कुगेलमैन ने कहा कि घोषणापत्र पश्चिम के नेतृत्व वाली वैश्विक व्यवस्था को चुनौती देने के साथ ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार बढ़ाने और पश्चिमी आर्थिक एवं वित्तीय संस्थानों के विकल्प खड़े करने की कोशिश को भी दर्शाता है।
हालांकि, उन्होंने ब्रिक्स को लेकर अमेरिका में बनी दो धारणाओं- इसे केवल बातचीत का मंच मानना या इसे पश्चिम विरोधी समूह समझना—को गलत बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका की प्रतिक्रिया इस बात पर निर्भर करेगी कि ब्रिक्स आगे वास्तव में क्या कदम उठाता है।
बांग्लादेश में भारत की पूर्व उच्चायुक्त वीणा सीकरी ने इसे भारत के लिए बेहद सफल शिखर सम्मेलन बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच द्विपक्षीय वार्ता कराना भी बड़ा कूटनीतिक संदेश है।
उन्होंने सम्मेलन की तैयारियों में भारतीय अधिकारियों और टीम के लगातार 24 घंटे काम करने का भी उल्लेख किया।पूर्व विदेश सचिव निरूपमा मेनन राव ने कहा कि नई दिल्ली में हुआ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आज के बिखरे हुए विश्व में भारत की महत्वपूर्ण तस्वीर पेश करता है।
यूनेस्को में भारत के राजदूत विशाल वी. शर्मा ने कहा कि घोषणापत्र भारत की वैश्विक नेतृत्व क्षमता की बड़ी कूटनीतिक स्वीकार्यता है। सम्मेलन से पहले देश के 30 शहरों में 400 से अधिक बैठकें हुईं। उनके मुताबिक, ब्रिक्स बहुध्रुवीय विश्व में मजबूत साझेदारी का संकेत देने वाला भविष्य का महत्वपूर्ण गठजोड़ है।
