विदेश में बैठे अपराधियों पर 'ऑपरेशन त्रिशूल' और 'भारतपोल' का असर, पांच साल में 70 से अधिक गैंग्स्टरों की भारत वापसी
पिछले कुछ सालों से विदेशों में बैठे गैंगस्टरों और अपराधियों को भारत वापस लाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। ...और पढ़ें
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विदेश में बैठे गैग्सटरों की भारत वापसी अभियान तेज, जागरण
HighLights
पिछले 5 वर्षों में 70 से अधिक गैंगस्टरों की वापसी।
ऑपरेशन त्रिशूल और भारतपोल पोर्टल से अभियान तेज।
यूएई, अजरबैजान जैसे देशों से लाए गए भगोड़े।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। विदेश से भारत में अपराधियों और गैंग्स्टरों को वापस लाने के अभियान में पिछले कुछ वर्षों में तेजी आई है।
गृह मंत्रालय और केंद्रीय एजेंसियों के आंकड़ों के अनुसार, 2021 से 2026 के बीच 70 से अधिक कुख्यात गैंग्सटर और संगठित अपराध में शामिल बदमाश यूएई, अजरबैजान, केन्या, मलेशिया और फिलीपींस जैसे देशों से भारत वापस लाए जा चुके हैं।
274 भगोड़ों को लाया गया वापस
आंकड़ों के मुताबिक हत्या, आतंकवाद, वित्तीय धोखाधड़ी और यौन अपराधों सहित सभी श्रेणी के अपराधियों की बात करें, तो 2019 से मध्य 2026 के बीच 36 देशों से कुल 274 भगोड़े भी वापस लाए गए हैं।
- विक्रमजीत सिंह उर्फ विकी (यूएई से): लारेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ गिरोह से जुड़ा यह गैंग्सटर कई हत्याओं और रंगदारी के मामलों में वांछित था, जिसे यूएई से डिपोर्ट कराकर भारत लाया गया।
- सचिन थापन उर्फ सचिन बिश्नोई (अजरबैजान से): पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या की साजिश में शामिल सचिन बिश्नोई को अज़रबैजान से डिपोर्ट कर भारत लाया गया।
- विक्रम बराड़ (यूएई से): लारेंस बिश्नोई गिरोह का प्रमुख सहयोगी और भारत भर में टारगेट किलिंग व जबरन वसूली का सिंडिकेट चलाने वाला विक्रम बराड़ यूएई से भारत लाया गया।
- दीपक टीनू व अन्य सहयोगी: बंबीहा और बिश्नोई गिरोह से जुड़े कई शूटरों को नेपाल, यूएई और थाईलैंड जैसे देशों से ट्रैक कर वापस लाया गया।
- रवि पुजारी (सेनेगल/दक्षिण अफ्रीका से): अंडरवर्ल्ड गैंग्सटर रवि पुजारी को सेनेगल से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया था, जिसके बाद उस पर कई राज्यों में मुकदमे चल रहे हैं।
कार्रवाई में तेजी आने के मुख्य कारण
आपरेशन त्रिशूल: सीबीआइ और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने इंटरपोल के साथ मिलकर 'आपरेशन त्रिशूल' चलाया, जिसके तहत भगोड़ों की डिजिटल मैपिंग, सैटेलाइट ट्रैकिंग और 'रेड कार्नर नोटिस' के जरिए लोकेशन ट्रैक की गई
भारतपोल पोर्टल: जनवरी 2025 में शुरू किए गए 'भारतपोल' पोर्टल के माध्यम से सीबीआई, राज्य पुलिस और इंटरपोल के बीच तालमेल बेहतर हुआ, जिससे सूचनाओं का आदान-प्रदान और डिपोर्टेशन की प्रक्रिया तेज हुई।
आपराधिक कानून: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत आरोपितों की गैर-मौजूदगी में भी मुकदमा चलाने के प्रावधान से प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया को मजबूती मिली।
