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IGL ने CNG स्टेशनों पर शुरू किया AI सिस्टम, अब कैमरे स्कैन करेंगे नंबर प्लेट; सिलेंडर की भी होगी जांच

Published: Fri, 16 Oct 2026 10:56 AM (IST)

आइजीएल ने सीएनजी स्टेशनों पर सुरक्षा और हाइड्रोटेस्टिंग नियमों के पालन के लिए एआइ संचालित पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। ...और पढ़ें

AI कैमरों से होगी वाहनों की निगरानी। (AI-Generated image)

AI कैमरों से होगी वाहनों की निगरानी। (AI-Generated image)

HighLights

  1. IGL ने CNG स्टेशनों पर AI संचालित सुरक्षा पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया।

  2. यह प्रणाली हाइड्रोटेस्टिंग नियमों के सख्त पालन को सुनिश्चित करने में मदद करेगी।

  3. स्वचालित वाहन पहचान तकनीक अनधिकृत रीफ्यूलिंग को प्रभावी ढंग से रोकेगी।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने सीएनजी (CNG) भरवाते समय होने वाले हादसों को रोकने और सुरक्षा मानकों को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है।

सीएनजी स्टेशनों पर सुरक्षा और हाइड्रोटेस्टिंग नियमों का अब पूरी सख्ती के साथ पालन सुनिश्चित करने के लिए कंपनी ने एक अत्याधुनिक एआइ (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत की है।

10 CNG स्टेशनों पर स्थापित

शुरुआती चरण में इस खास तकनीक के तहत कुल 10 सीएनजी स्टेशनों पर स्वचालित वाहन पहचान प्रणाली (ऑटोमैटिक व्हीकल रिकग्निशन सिस्टम) को स्थापित किया गया है। इस परियोजना का औपचारिक शुभारंभ बृहस्पतिवार को शांतिपथ स्थित सीएनजी स्टेशन से किया गया।

स्टेशन पर लगे कैमरे गाड़ियों की नंबर प्लेट स्कैन करेंगे

इस नई प्रणाली के काम करने के तरीके के बारे में जानकारी देते हुए आइजीएल के एक अधिकारी ने बताया कि स्टेशन पर लगे उन्नत एआइ कैमरे वहां आने वाले हर वाहन की नंबर प्लेट को तुरंत स्कैन कर लेंगे। इसके बाद यह सिस्टम सीधे पेसो (PESO) पोर्टल से जुड़कर उस वाहन में लगे सीएनजी सिलेंडर की हाइड्रोटेस्ट वैधता और उसके प्रमाणपत्र की जांच करेगा।

बिना कोई देरी एक्टिव होगा सिस्टम

अगर जांच के दौरान यह पाया जाता है कि सिलेंडर की टेस्टिंग की समय सीमा समाप्त हो चुकी है या फिर उसका प्रमाणपत्र अवैध है, तो सिस्टम बिना कोई देरी किए तुरंत सक्रिय हो जाएगा।

ऐसी स्थिति में वहां मौजूद कर्मचारियों के पास मौजूद हैंडहेल्ड (हाथ के) उपकरण, स्टेशन पर लगे एलइडी डिस्प्ले और लाउडस्पीकर सिस्टम के जरिए तत्काल अलर्ट जारी होगा। इस त्वरित सूचना प्रणाली की मदद से कर्मचारी समय रहते अनधिकृत और असुरक्षित रीफ्यूलिंग को रोक सकेंगे, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सुनिश्चित हो सकेगी।

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