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Green Crackers क्या हैं? पारंपरिक पटाखों से कितने अलग, दीपावली पर सुप्रीम कोर्ट ने क्यों दी मंजूरी?

Published: Tue, 03 Nov 2026 08:53 AM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने Delhi-NCR में दिवाली पर केवल प्रमाणित ग्रीन पटाखों की बिक्री व प्रयोग को सशर्त मंजूरी दी। ऐसे ...और पढ़ें

एनसीआर में दिवाली के अवसर पर केवल प्रमाणीकृत ग्रीन पटाखों (Green Crackers) की बिक्री और इस्तेमाल को सशर्त मंजूरी दी है। एआई इमेज

एनसीआर में दिवाली के अवसर पर केवल प्रमाणीकृत ग्रीन पटाखों (Green Crackers) की बिक्री और इस्तेमाल को सशर्त मंजूरी दी है। एआई इमेज

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने ग्रीन पटाखों को सशर्त मंजूरी दी।

  2. 7-8 नवंबर को सीमित समय के लिए ही अनुमति।

  3. ग्रीन पटाखे 30% कम प्रदूषण फैलाते हैं।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में दिवाली के अवसर पर केवल प्रमाणीकृत ग्रीन पटाखों (Green Crackers) की बिक्री और इस्तेमाल को सशर्त मंजूरी दी है। हालांकि, यह सवाल भी सबको परेशान कर रहा है कि ग्रीन पटाखे आखिर है क्या?

अदालत के आदेश के अनुसार, केवल 7 और 8 नवंबर को सीमित समय अंतराल सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे के बीच ही पटाखे चलाने की अनुमति होगी। 9 नवंबर से पूरे दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध पुन: लागू हो जाएगा।

क्या होते हैं ग्रीन पटाखे?

हालांकि, यह सवाल कई लोग जानना चाह रहे हैं कि आखिर ग्रीन पटाखे क्या हैं, ये पारंपरिक पटाखों से कितने अलग हैं और सुप्रीम कोर्ट का इस पर क्या सख्त रुख है? ग्रीन पटाखे वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (एनईईआरआई) की ओर से विकसित किए गए विशेष पटाखे हैं। पर्यावरण सुरक्षा के लिहाज से इनकी कई खूबियां होती हैं...

  • इन्हें कम कच्चे माल और छोटे शैल साइज के साथ बनाया जाता है।
  • इनमें भारी और हानिकारक धातुओं (जैसे बेरियम, सीसा और आर्सेनिक) के इस्तेमाल पर प्रतिबंध होता है।
  • इनमें धूल दबाने वाले एडिटिव्स और कम रासायनिक सामग्री का उपयोग किया जाता है, जिससे हवा में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम), सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन काफी घट जाता है।
  • ग्रीन पटाखों और पारंपरिक पटाखों में मुख्य अंतर

सीएसआईआर-एनईईआरआई के अनुसार, पारंपरिक और ग्रीन पटाखों में सबसे बड़ा अंतर इनके घटकों और प्रदूषण स्तर का है...

  • हानिकारक रसायन: पारंपरिक पटाखों में भारी धातुओं पर आधारित यौगिकों का इस्तेमाल होता है, जो पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक हैं। वहीं ग्रीन पटाखों में जिओलाइट और आयरन ऑक्साइड जैसे एडिटिव्स होते हैं, जो खतरनाक धुएं को नियंत्रित करते हैं।
  • 30 प्रतिशत कम प्रदूषण: ग्रीन पटाखे पूरी तरह से प्रदूषण-मुक्त तो नहीं होते, लेकिन यह पारंपरिक पटाखों की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत कम वायु प्रदूषण (पीएम) पैदा करते हैं।
  • पीएम कणों पर प्रभाव: प्रदूषण में मौजूद बेहद बारीक कण (पीएम2.5 और पीएम1) फेफड़ों के रास्ते सीधे खून में प्रवेश कर जाते हैं। ग्रीन पटाखे हवा में इन बारीक कणों के फैलाव को काफी हद तक कम करते हैं।

ग्रीन पटाखे कितने प्रकार के होते हैं?

पटाखा श्रेणी

पूरा नाम

मुख्य विशेषता

SWAS

Safe Water and Air Releaser

जलने पर पानी की महीन बूंदें (वाष्प) छोड़ता है, जो धूल के कणों को सोख लेती हैं।

SAFAL

Safe Minimal Aluminium

इसमें एल्यूमीनियम की मात्रा न्यूनतम होती है और यह कम शोर पैदा करता है।

STAR

Safe Thermite Cracker

इसमें पोटैशियम नाइट्रेट और सल्फर का इस्तेमाल नहीं होता, जिससे धुआं बहुत कम निकलता है।

सुप्रीम कोर्ट का क्या है रुख और कड़े निर्देश?

दिवाली पर प्रदूषण और जनस्वास्थ्य (अनुच्छेद 21) तथा धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) के बीच संतुलन बनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने निम्नलिखित शर्तें और गाइडलाइंस जारी की हैं:

  1. सीमित समयावधि: 7 और 8 नवंबर को केवल सुबह 6:00 से 7:00 बजे और रात 8:00 से 10:00 बजे के बीच ही ग्रीन पटाखे चलाए जा सकते हैं। 9 नवंबर से फिर से पूर्ण प्रतिबंध लागू हो जाएगा।

  • ऑनलाइन बिक्री पर रोक: फ्लिपकार्ट, अमेज़न आदि जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म या ऑनलाइन माध्यमों से पटाखों की बिक्री पर सख्त पाबंदी रहेगी। केवल लाइसेंस प्राप्त और निर्धारित स्थलों पर ही प्रमाणित ग्रीन पटाखे बेचे जा सकेंगे।

  • लड़ी और बेरियम वाले पटाखों पर बैन: एक साथ जुड़े हुए पटाखों (लड़ियों) और बेरियम युक्त पटाखों के निर्माण और बिक्री पर पूरी तरह से रोक है।

  • साइलेंस और नो-क्रैकर जोन: अस्पताल, नर्सिंग होम, वृद्धाश्रम, शैक्षणिक संस्थानों और नोटिफाइड साइलेंस ज़ोन के 300 मीटर के दायरे में पटाखे चलाने पर पूरी पाबंदी रहेगी।

  • सख्त निगरानी: क्यूआर कोड वाले असली ग्रीन पटाखों की जांच के लिए पुलिस और प्रशासन को सख्त निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यापारियों और अधिकारियों पर सीधी अवमानना और जब्ती की कार्रवाई की जाएगी।

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