कुल्हाड़ी से हुआ था पायलट स्मित मछार पर हमला? फ्लाईदुबई कॉकपिट कांड में नया मोड़; जांच में जुटीं एजेंसियां
अबूधाबी से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में ओमानी फर्स्ट ऑफिसर द्वारा भारतीय कैप्टन पर जानलेवा हमले में ...और पढ़ें

कॉकपिट में कुल्हाड़ी से हुआ था पायलट पर हमला। फोटो: आर्काइव एवं एआई जनरेटेड
HighLights
फ्लाईदुबई उड़ान में भारतीय कैप्टन पर जानलेवा हमला
हमले में कॉकपिट की क्रैश कुल्हाड़ी के इस्तेमाल की आशंका
वैश्विक विमानन सुरक्षा प्रोटोकॉल की व्यापक समीक्षा शुरू
गौतम कुमार मिश्रा, नई दिल्ली। अबू धाबी से तेल अवीव जा रही 'फ्लाईदुबई' (उड़ान संख्या एफजेड1073) की कॉकपिट के भीतर ओमानी फर्स्ट ऑफिसर द्वारा भारतीय मूल के कैप्टन स्मित मछार पर हुए जानलेवा हमले में एक सनसनीखेज पहलू यह सामने आ रहा है।
आशंका जताई जा रही है कि इस वारदात में कॉकपिट में ही रखी क्रैश कुल्हाड़ी (कैश एक्स / कॉकपिट एक्स) का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। सुरक्षा एजेंसियों की आधिकारिक और विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही हमले के सटीक जरिया की अंतिम पुष्टि हो सकेगी।
यदि इस आशंका की जांच के दौरान पुष्टि होती है तो आने वाले समय में यह घटना वैश्विक नागरिक उड्डयन सुरक्षा के लिए एक बड़ा सबक साबित होगी, जिसमें नतीजे के तौर पर पूरे अंतरराष्ट्रीय कॉकपिट प्रोटोकॉल में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
भारतीय सुरक्षा नियामक इस बात पर भी मंथन कर रहे हैं कि कॉकपिट के इमरजेंसी क्रैश टूल्स को किस तरह से सुरक्षित रखा जाए ताकि आपात स्थिति में उनका उपयोग भी हो सके और कोई विक्षिप्त क्रू मेंबर उनका दुरुपयोग न कर पाए।
क्या कहता है नियम?
अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) और अमेरिकी एफएए के कड़े नियमों के तहत 19 से अधिक सीटों वाले सभी व्यावसायिक विमानों के कॉकपिट में कम से कम एक इंसुलेटेड क्रैश एक्स रखना अनिवार्य होता है।
हालांकि, यह टूल किसी पर हमला करने के लिए नहीं, बल्कि आपातकालीन स्थिति में कॉकपिट का दरवाजा जाम होने या आग लगने पर पैनल तोड़कर बाहर निकलने का रास्ता बनाने के लिए रखा जाता है।
दूसरी थ्योरी पर भी हो रहा काम, यह भी सवाल
जांच एजेंसियां एक दूसरी थ्योरी पर भी काम कर रही हैं कि कहीं आरोपित फर्स्ट ऑफिसर के पास कोई चाकू या अन्य धारदार हथियार तो नहीं था। यदि जांच में चाकू से हमले की बात सच साबित होती है, तो यह सीधा सवाल सुरक्षा जांच प्रक्रिया पर खड़ा होगा।
आम तौर पर पायलटों और केबिन क्रू को भी एयरसाइड जोन में प्रवेश से पहले बायोमेट्रिक पहचान, सामान की एक्स-रे स्कैनिंग, मेटल डिटेक्टर और फ्रिस्किंग (हाथों से जांच) से गुजरना पड़ता है।
ऐसे में जांच अधिकारी इस पहलू की भी गहराई से पड़ताल कर रहे हैं कि क्या सह-पायलट चेकिंग को चकमा देकर हथियार अंदर लाया था या फिर क्रू चेकिंग के दौरान कोई बड़ी तकनीकी चूक हुई।
हो रही व्यापक समीक्षा
इस अंतरराष्ट्रीय घटना की गूंज के बाद भारतीय नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) और उड़ान नियामक संस्था डीजीसीए ने भारत के पूरे एविएशन सिक्योरिटी नेटवर्क की व्यापक समीक्षा शुरू कर दी है।
इसके तहत खाड़ी देशों और संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर जाने वाली उड़ानों में तैनात होने वाले 'स्काई मार्शल्स' (एनएसजी/सीआईएसएफ कमांडोज) की भूमिका का पुनर्मूल्यांकन किया जा रहा है।
साथ ही, भारतीय एयरलाइंस में पायलटों के नियमित साइकोमेट्रिक टेस्ट और मेंटल हेल्थ चेकिंग को और कड़ा बनाने की तैयारी है ताकि कॉकपिट के भीतर तनाव या विक्षिप्तता के लक्षणों को समय रहते पकड़ा जा सके।
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