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दिल्ली: द्वारका गोल्फ कोर्स में 3 बच्चों की मौत, लापरवाही का असली जिम्मेदार कौन? तीन दिन बाद भी अनसुलझा सवाल

Published: Sun, 03 May 2026 04:12 PM (IST)

पश्चिमी दिल्ली के द्वारका सेक्टर-23 स्थित गोल्फ कोर्स के तालाब में तीन बच्चों की डूबकर मौत के तीन दिन बाद भी लापरवाही का जिम्मेदार तय नहीं हो पाया है।

द्वारका गोल्फ कोर्स में 3 बच्चों की मौत। जागरण

द्वारका गोल्फ कोर्स में 3 बच्चों की मौत। जागरण

HighLights

  1. गोल्फ कोर्स तालाब में तीन बच्चों की डूबकर मौत।

  2. लापरवाही के लिए तीन दिन बाद भी जिम्मेदारी तय नहीं।

  3. सुरक्षा व्यवस्था और डीडीए पर गंभीर सवाल खड़े।

जागरण संवाददाता, पश्चिमी दिल्ली। पश्चिमी दिल्ली के द्वारका सेक्टर-23 स्थित गोल्फ कोर्स के तालाब में डूबकर तीन बच्चों की मौत के मामले में तीन दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस और प्रशासन यह तय नहीं कर पाए हैं कि इस लापरवाही का असली जिम्मेदार कौन है।

मासूमों की मौत ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब देने से फिलहाल संबंधित विभाग बचते नजर आ रहे हैं।

पुलिस अधिकारी का कहना है कि फिलहाल बीएनएस की धारा 194 के तहत मामले की जांच की जा रही है। इन्क्वेस्ट रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। यदि जांच में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आएगी तो सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

घेराबंदी इतनी कमजोर क्यों

पुलिस की शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि बच्चे दीवार कूदकर गोल्फ कोर्स परिसर के भीतर दाखिल हुए थे। लेकिन सवाल यह है कि इसकी घेराबंदी इतनी कमजोर क्यों है। करीब तीन वर्ष पूर्व निर्माणाधीन गोल्फ कोर्स में इसी प्रकार के हादसे, जिसमें तीन युवा दीवार कूदकर परिसर में दाखिल हुए थे, के बाद दीवार की ऊंचाई क्यों नहीं बढ़ाई गई। दीवार के उपर कंटीले तार से इसकी बाड़बंदी क्यों नहीं की गई।

गोल्फ कोर्स के आसपास से गुजरने वाले लोगों ने बताया कि यहां गोल्फ कोर्स में दीवार कूदने वाले कई लोगों को देखा जा सकता है। खासकर शाम के समय।ऐसा वही लोग कर सकते हैं जो यहां असामाजिक गतिविधियों को अंजाम देना चाहते हैं।

आखिर उनकी नजर क्यों नहीं पड़ी

लोग गोल्फ कोर्स परिसर की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाते हैं। जिस तालाब में बच्चे डूबे, उसके ठीक सामने सुरक्षाकर्मी का कमरा है। इसके बावजूद किसी को भनक तक नहीं लगी। कमरे के ठीक सामने बच्चों के कपड़े रखे थे, आखिर उनकी नजर क्यों नहीं पड़ी।

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लोगों का कहना है कि जब बच्चे परिसर में दाखिल हो सकते हैं तो बड़े तो दाखिल आसानी से हो सकते हैं। डीडीए को इस तरह की लापरवाही क्यों हुई, इसका उत्तर देना चाहिए।

उधर, पुलिस ने डीडीए से घटना के समय ड्यूटी पर तैनात सभी कर्मचारियों और अधिकारियों का पूरा ब्योरा तलब किया है।