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घर बैठे कर सकेंगे मल्टीमीडिया और मास कम्युनिकेशन, SOL में नए कोर्स शुरू करेगा डीयू

Published: Wed, 15 Apr 2026 07:59 PM (IST)

दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (एसओएल) में जल्द ही मल्टीमीडिया, जनसंचार, ऑनलाइन बीकॉम, अंग्रेजी, एमबीए और कंप्यूटर साइंस ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर। सौजन्य- AI generated

सांकेतिक तस्वीर। सौजन्य- AI generated

HighLights

  1. एसओएल में मल्टीमीडिया, जनसंचार जैसे आधुनिक कोर्स शुरू होंगे।

  2. विदेशी भाषाओं के डिप्लोमा, सर्टिफिकेट कोर्स को भी मंजूरी मिली।

  3. एक वर्षीय पीजी और मेडिकल पाठ्यक्रम भी स्वीकृत किए गए।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (एसओएल) में जल्द ही छात्रों को मल्टीमीडिया और जनसंचार जैसे आधुनिक एवं रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रमों की पढ़ाई का अवसर मिलेगा। विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद (एसी) की 1026वीं बैठक में एसओएल, डीडीसीई और सीओएल के तहत कई नए ऑफलाइन, ओडीएल तथा ऑनलाइन कार्यक्रमों को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान कर दी गई।

कौन-कौन से नए कोर्स शुरू?

कुलगुरु प्रो. योगेश सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में स्पष्ट किया गया कि सभी आवश्यक तैयारियां पूरी होने के बाद ही इन पाठ्यक्रमों को लागू किया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव के तहत एसओएल में बीए (ऑनर्स) मल्टीमीडिया एवं जनसंचार और एमए अंग्रेजी जैसे नए कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे।

इसके साथ ही ऑनलाइन मोड में बीकाम (ऑनर्स), बीए (ऑनर्स) अंग्रेजी, एमबीए तथा बीएससी (ऑनर्स) कंप्यूटर साइंस प्रारंभ करने को भी मंजूरी मिली है। विश्वविद्यालय का मानना है कि इन पाठ्यक्रमों के शुरू होने से दूरस्थ शिक्षा के छात्रों को पारंपरिक विषयों से आगे बढ़कर नए युग की पेशेवर शिक्षा का लाभ मिलेगा।

विदेशी भाषाओं में डिप्लोमा एवं सर्टिफिकेट कोर्स शुरू

विदेशी भाषाओं की पढ़ाई को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एसओएल व सीओएल के अंतर्गत फ्रेंच, स्पेनिश, जर्मन, पुर्तगाली, इतालवी, चीनी, कोरियाई, जापानी और रूसी भाषा में डिप्लोमा एवं सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी दी गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इससे विद्यार्थियों की वैश्विक रोजगार क्षमता बढ़ेगी।

बैठक में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप आगामी शैक्षणिक सत्र से शुरू होने वाले एक वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों को भी स्वीकृति दी गई। चूंकि दिल्ली विश्वविद्यालय में चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम का पहला बैच अब चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुका है, इसलिए एनईपी के प्रावधानों के तहत एक वर्षीय पीजी कोर्स लागू किए जा रहे हैं। विभिन्न संकायों के अंतर्गत ‘स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम ढांचा 2024’ आधारित पाठ्यक्रमों को मंजूरी प्रदान की गई।

DU News

अकादमिक परिषद की बैठक में कुलगुरु प्रो. योगेश सिंह ने शोध प्रकाशन से जुड़े मुद्दों पर भी गंभीर चिंता जताई। सामाजिक विज्ञान और भाषाओं के विषयों में स्कोपस जर्नल्स की कमी के कारण शोधार्थियों को हो रही कठिनाइयों पर चर्चा के बाद उन्होंने सभी विभागों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने विषयों के 20 सर्वश्रेष्ठ जर्नल्स की सूची 30 दिनों के भीतर तैयार कर विश्वविद्यालय को सौंपें।

उन्होंने कहा कि विभाग स्वयं मानदंड तय करें और अंक आधारित वरीयता सूची तैयार करें ताकि शोध मूल्यांकन अधिक पारदर्शी बन सके। इसके अतिरिक्त बैठक में ‘सेमेस्टर अवे प्रोग्राम’ पर भी चर्चा हुई, जिसके तहत डीयू के छात्र अपने पाठ्यक्रम का एक सेमेस्टर किसी विदेशी विश्वविद्यालय में पढ़ सकेंगे और वहां अर्जित क्रेडिट को डिग्री में समायोजित किया जाएगा। विश्वविद्यालय ने इसे छात्रों को वैश्विक एक्सपोजर देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

अकादमिक परिषद से मिली मंजूरी

अकादमिक परिषद ने मेडिकल और एजुकेशन से जुड़े नए पाठ्यक्रमों को भी मंजूरी दी। लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में डीएम पीडियाट्रिक नेफ्रोलाजी तथा मौलाना आजाद मेडिकल कालेज में डीएम मेडिकल जेनेटिक्स शुरू करने को स्वीकृति मिली। वहीं महर्षि वाल्मीकि कालेज आफ एजुकेशन में एमएड कार्यक्रम शुरू करने का प्रस्ताव भी मंजूर किया गया।

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