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कलाई की हलचल से चलेगी घड़ी, सड़क की कंपन से जलेगी स्ट्रीट लाइट; DU के वैज्ञानिकों ने विकसित की नई तकनीक

Published: Thu, 14 May 2026 10:11 PM (IST)

मिरांडा हाउस के वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक विकसित की है जो गति, कंपन और गर्मी जैसी बेकार ऊर्जा को ...और पढ़ें

डीयू के वैज्ञानिकों ने बनाया डिवाइस। (AI Generated Image)

डीयू के वैज्ञानिकों ने बनाया डिवाइस। (AI Generated Image)

HighLights

  1. बेकार गति, कंपन, गर्मी को बिजली में बदलेगी तकनीक।

  2. पीजो-इलेक्ट्रिक, थर्मो-इलेक्ट्रिक तकनीकों का उपयोग, लीड-फ्री सामग्री।

  3. छोटे उपकरण, स्ट्रीट लाइट, सार्वजनिक स्थानों पर उपयोग संभव।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। कल्पना कीजिए कि आपकी कलाई की हलचल से घड़ी चलने लगे, सड़क पर दौड़ती गाड़ियों की कंपन से स्ट्रीट लाइट जल उठे और फैक्ट्रियों से निकलने वाली बेकार गर्मी बिजली में बदल जाए। मिरांडा की प्रयोगशालाओं में इसी भविष्य को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण शोध किया है।

कालेज में प्राचार्य प्रो. विजयालक्ष्मी नंदा और भौतिकी विभाग की प्रो. मोनिका तोमर के नेतृत्व में वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीक विकसित की हैं, जो वेस्ट एनर्जी को उपयोगी विद्युत ऊर्जा में बदल सके। यह शोध स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को नई गति दे सकता है।

नष्ट हो जाती है अधिकांश ऊर्जा

प्रो. मोनिका तोमर के अनुसार हमारे आसपास हर समय मोशन, वाइब्रेशन, हीट और तापमान परिवर्तन के रूप में ऊर्जा मौजूद रहती है, लेकिन इसका अधिकांश हिस्सा बिना उपयोग के नष्ट हो जाता है। शोध का उद्देश्य इसी ऊर्जा को पीजो-इलेक्ट्रिक, थर्मो-इलेक्ट्रिक और पायरो-इलेक्ट्रिक तकनीकों की मदद से बिजली में परिवर्तित करना है।

इस शोध में उनके साथ प्रो. अंजली शर्मा, प्रो. अरीजीत चौधरी, डा. काजल जिंदल और रीमा गुप्ता भी शामिल है। यह सभी शोधकर्ता डीयू के विभिन्न कालेज से आती है और मिरांडा हाउस में शोध में इसका शोध किया गया है। इस शोध में करीब 40 लाख का खर्च आया है।

इस तकनीक के संभावित उपयोग बेहद व्यावहारिक हैं। भविष्य में छोटे सेंसर, घड़ियां और अन्य इलेक्ट्रानिक उपकरण बिना बैटरी बदले काम कर सकेंगे। सड़क पर वाहनों की आवाजाही से उत्पन्न कंपन को पीजो-इलेक्ट्रिक टाइल्स के जरिए स्ट्रीट लाइट जलाने में इस्तेमाल किया जा सकेगा।

एनवायरमेंट फ्रेंडली पदार्थों का उपयोग

शोध की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें लीड-फ्री, यानी पर्यावरण के लिए सुरक्षित पदार्थों का उपयोग किया जा रहा है। बाजार में प्रचलित कई ऊर्जा हार्वेस्टर लीड आधारित होते हैं, जो स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए हानिकारक हैं। मिरांडा हाउस में केएनएन जैसे टिकाऊ और सुरक्षित मटेरियल विकसित किए जा रहे हैं।

शोधार्थी बबीता और सत्यम के अनुसार वेस्ट हीट, कंपन और गति को बिजली में बदलने के साथ-साथ उन्नत सोलर सेल और थर्मो-इलेक्ट्रिक मटेरियल पर भी काम हो रहा है। कालेज में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सेमीकंडक्टर मिशन के तहत छात्रों को आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि इस तकनीक को रेलवे स्टेशन, मेट्रो स्टेशन, माल और भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर लगाया जा सकता है।

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