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आतंकवाद का समर्थन करने वाला DU का प्रोफेसर बर्खास्त, स्टडी मटेरियल में किए गए विवादित दावों पर गई नौकरी 

Published: Mon, 02 Nov 2026 07:52 PM (IST)

दिल्ली विश्वविद्यालय ने दूरस्थ शिक्षा केंद्र के सहायक प्रोफेसर डॉ. सरीपल्ली वी. रविकिरण की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। उन ...और पढ़ें

डीयू के प्रोफेसर काे नौकरी से निकाला गया। फोटो: आर्काइव

डीयू के प्रोफेसर काे नौकरी से निकाला गया। फोटो: आर्काइव

HighLights

  1. डीयू प्रोफेसर रविकिरण की सेवाएं समाप्त।

  2. अध्ययन सामग्री में आतंकवाद समर्थन का आरोप।

  3. शिक्षक संगठन ने कार्रवाई का विरोध किया।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में लर्निंग मैटीरियल की सामग्री और कार्य प्रदर्शन को लेकर दूरस्थ एवं ऑनलाइन शिक्षा केंद्र (सीडीओई) के सहायक प्रोफेसर डॉ. सरीपल्ली वी. रविकिरण की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं।

राजनीति विज्ञान विभाग में तैनात प्रोफेसर पर अध्ययन सामग्री में आतंकवाद का समर्थन करने और कई विषयों पर भ्रामक तथ्य लिखने के आरोप लगे हैं।

सीडीओई ने 30 अक्टूबर को जारी आदेश में उनकी प्रोबेशन अवधि के दौरान कार्य प्रदर्शन और आचरण को असंतोषजनक बताया है। हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर अब शिक्षक संगठन ने विरोध जताते हुए निष्पक्ष प्रक्रिया और शिक्षक के अधिकारों का मुद्दा उठाया है।

आदेश के अनुसार, डॉ. रविकिरण की नियुक्ति 23 मई 2023 को जारी विज्ञापन के तहत सहायक प्रोफेसर के पद पर हुई थी। उन्होंने 29 फरवरी 2024 को कार्यभार संभाला था।

सात फरवरी 2025 को उनकी प्रोबेशन अवधि एक वर्ष के लिए बढ़ा दी गई। प्रशासन का कहना है कि इस अवधि में भी उनके कार्य और आचरण में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।

सुनवाई के अवसर देने के बाद कार्रवाई

सीडीओई के आदेश में कहा गया है कि प्रोफेसर को समय-समय पर उनके काम में कमियों के बारे में बताया गया। उन्हें अपना पक्ष रखने के लिए व्यक्तिगत सुनवाई और लिखित जवाब देने के कई अवसर भी दिए गए।

इसके बावजूद प्रदर्शन में सुधार नहीं होने का हवाला देते हुए केंद्र की गवर्निंग बॉडी ने उनकी सेवाएं समाप्त करने की सिफारिश की। दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलगुरु ने भी इस सिफारिश को मंजूरी दे दी, जिसके बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से सेवा से मुक्त कर दिया गया।

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सेवा समाप्ति का फैसला भविष्य में डीयू, अन्य कॉलेजों या सरकारी सेवाओं में पदों के लिए आवेदन करने में उनके लिए अयोग्यता नहीं माना जाएगा।

एनडीटीएफ ने उठाए सवाल

इस कार्रवाई पर नेशनल डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (एनडीटीएफ) ने विरोध जताया है। संगठन का कहना है कि शिक्षकों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस, निलंबन या सेवा समाप्ति जैसी कार्रवाई स्थापित नियमों और निष्पक्ष प्रक्रिया के अनुरूप होनी चाहिए।

शिक्षक की गरिमा, स्वायत्तता और आत्मसम्मान की रक्षा करना विश्वविद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी है। संगठन ने प्रभावित शिक्षक को कानूनी सहायता देने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) से भी आगे आने की अपील की है।

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