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DTC बसों में पिंक सहेली कार्ड ने बढ़ाया ETM का दबाव, एक मशीन पर कार्ड टैप और टिकटिंग से लग रहा समय

Published: Sun, 04 Oct 2026 06:12 PM (IST)

डीटीसी बसों में 1 अक्टूबर से अनिवार्य हुए पिंक सहेली कार्ड ने इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग मशीन (ईटीएम) पर दबाव बढ़ा दिया है, जिससे टिकट निकालने में देरी हो रही है।

एआई जेनेरेटेड इमेज।

एआई जेनेरेटेड इमेज।

HighLights

  1. पिंक सहेली कार्ड से ईटीएम मशीनों पर बढ़ा दोहरा दबाव।

  2. एक ही मशीन पर टैपिंग और टिकटिंग से लग रहा समय।

  3. यात्रियों ने बसों में अलग कार्ड रीडर की मांग की।

शशि ठाकुर, नई दिल्ली। आइटीओ से कश्मीरी गेट जाते समय डीटीसी बस में पिंक सहेली कार्ड को कंडक्टर ने इलेक्ट्रानिक टिकटिंग मशीन (इटीएम) मशीन पर टैप किया, लेकिन टिकट निकलने से पहले ही मशीन बीच में अटक गई। कंडक्टर ने दोबारा कोशिश की।

इस दौरान कार्ड हाथ में लिए अगली महिला अपनी बारी का इंतजार करती दिखी और पीछे के गेट से यात्री चढ़ते रहे। कुछ पल के लिए बस का पिछला हिस्सा ठहर सा गया। तीन रूट पर की गई पड़ताल में सामने आया कि स्मार्ट कार्ड और टिकटिंग की सुविधा एक ही मशीन पर टिकी है।

अब मशीन को दोहरे दबाव से जूझना पड़ रहा है। यह मुश्किलें पिंक टिकट की जगह पिंक कार्ड से निश्शुल्क यात्रा की अनिवार्यता से पैदा हुई है, जो एक अक्टूबर से लागू हो गई है।

बीच में ही अटक गई मशीन

डीटीसी बसों में सवार महिला यात्री ज्योति ने कहा कि कार्ड के लिए अलग रीडर नहीं है। कंडक्टर के पास मौजूद इटीएम से सामान्य यात्रियों के टिकट बनाने के साथ पिंक सहेली कार्ड भी टैप किए जा रहे हैं।

भीड़ के समय कई महिलाएं एक साथ चढ़ती हैं तो कार्ड टैप कराने के लिए कंडक्टर के पास कुछ देर के लिए भीड़ बन जाती है। पड़ताल के दौरान लक्ष्मी नगर से दिल्ली सचिवालय की ओर जाने वाली एक बस में लगातार कार्ड टैप किए जाने के बीच मशीन कुछ देर के लिए अटक गई।

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कंडक्टर उसे दोबारा सक्रिय करने में लगा रहा, ऐसे में अन्य यात्रियों को टिकट के लिए इंतजार करना पड़ा। मशीन चालू होने के बाद ही टैपिंग आगे बढ़ी। इस दौरान यात्रियों का चढ़ना-उतरना जारी रहा।

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डीटीसी की बस में इटीएम से पिंक कार्ड टैप कर टिकट निकालतीं कंडक्टर तब तक इंतजार करती महिला यात्री। जागरण

मोरी गेट से बदरपुर रूट पर जाने वाली एक डीटीसी बस में भीड़ के समय कंडक्टर को लगातार कई कार्ड टैप करने पड़े। साथ ही सामान्य यात्रियों के टिकट भी बनाने थे। इससे टिकटिंग और कार्ड प्रक्रिया एक ही जगह पर चलती रही और पीछे के हिस्से में आवाजाही धीमी हुई।

एक मशीन पर कई कार्ड टैप होने से लगता है समय

एक महिला यात्री सोनिया ने बताया कि कार्ड से यात्रा आसान हो सकती है, लेकिन भीड़ में एक ही मशीन पर कई कार्ड टैप होने से समय लगता है। उनका सुझाव है कि बस में भी मेट्रो की तरह यात्री खुद कार्ड टैप कर सके।

यात्रियों की मांग है कि बस के दरवाजों पर अलग कार्ड रीडर लगाए जाएं। इससे कार्ड टैपिंग कंडक्टर की मशीन से अलग होगी और यात्री खुद प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। मेट्रो में यात्रियों को कार्ड टैपिंग खुद करने की जो सुविधा उपलब्ध है, वैसी व्यवस्था बसों में भी होनी चाहिए। जबकि बस में इसके लिए कंडक्टर और इटीएम पर निर्भरता है।

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