दिल्ली: कर्मचारियों को देने के लिए वेतन नहीं, पर कंसल्टेंट पर मेहरबान DTC; गबन को लेकर समिति का गठन
दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) 60,000 करोड़ से अधिक के भारी घाटे में है और कर्मचारियों को वेतन देने के लिए ...और पढ़ें

60000 करोड़ से अधिक के घाटे में चल रहा है DTC। फाइल फोटो

समय कम है?
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वी के शुक्ला, नई दिल्ली। दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) 60000 करोड़ से अधिक के घाटे में चल रहा है, यहां तक कि उसे कर्मचारियों को वेतन देने के लिए भी सरकार की दया पर निर्भर होना पड़ रहा है।
ऐसे में अपने खर्च घटाने की जगह डीटीसी कंसल्टेंट पर मेहरबान है। कुछ समय पहले ही डीटीसी में दो पूर्व अधिकारियों को कंसल्टेंट के तौर पर नियुक्त कर दिया गया है। उसमें भी नियमों का उल्लंघन किए जाने का आरोप है।
डीटीसी सूत्रों का कहना है कि डीटीसी में अब नियमित अधिकारियों की कोई कमी नहीं है। इतना ही नहीं तीन प्रबंधकों को भी गलत तरीके से पदोन्नति देने का भी आरोप है।
कर्मचारी कल्याण कोष में गबन का आरोप
उधर एक अन्य मामले में कर्मचारी कल्याण कोष में गबन का आरोप भी सामने आ रहा है। आराेप लगने के बाद डीटीसी ने इस मामले में एक समिति गठित कर दी है। गबन कितने का हो सकता है, समिति इसकी जांच करेगी।
डीटीसी दिल्ली सरकार के लिए सार्वजनिक परिवहन सेवा उपलब्ध कराने वाला एकमात्र निगम है। डिम्ट्स की बसें भी अब डीटीसी के बेड़े में शामिल किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके बाद इसकी जिम्मेदारी और बढ़ने जा रही है।
मगर इन सब के बीच डीटीसी में कर्मचारियों के मामले में नियमों के उल्लंघन के आरोप लग रहे हैं। कुछ समय पहले ही डीटीसी में सुनीता चौहान और आर के जैन को डीटीसी में कंसल्टेंट की नियुक्ति दे दी गई है। जबकि कुछ साल पहले उपराज्यपाल ने आदेश जारी कर सभी विभागों से कंसल्टेेंट हटाए थे।
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आरोप है कि कंसल्टेंट लगाने के लिए ना तो कोई विज्ञापन जारी किया गया और ना ही अन्य लोगों से कोई आवेदन मांगे गए। ये दाेनों अधिकारी पूर्व में डीटीसी में उप महाप्रबंधक के तौर के पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
डीटीसी एम्प्लाइज़ प्रोग्रेस फेडरेशन ने उपराज्यपाल, मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री से इसकी शिकायत की है। वही एक मामले में डीटीसी में दो प्रबंधकों को पदोन्नति कर दिया गया है।
इस मामले में डीटीसी एम्प्लाइज़ प्रोग्रेस फेडरेशन के अध्यक्ष सुनील जैन द्वारा केंद्रीय सतर्कता आयोग में दी गई शिकायत के अनुसार डीटीसी के पूर्व में संविदा प्रबंधक-ट्रैफिक मुकेश बलानी को नियमों के विपरीत नियमित रूप से प्रबंधक (जनसंपर्क) नियुक्त किया गया है, जबकि उनके पास आवश्यक योग्यता एवं जनसंपर्क से संबंधित अनुभव नहीं है।
इसी प्रकार सुधीर कुमार को प्रबंधक से वरिष्ठ प्रबंधक पद पर पदोन्नत किया गया, बकि उनके पास आवश्यक पात्रता नहीं है और इनके मामले में वैध डीपीसी अनुशंसा नहीं की गई। जिसमें अनुभव की गणना में भी अनियमितता का आरोप है।
इनके अलावा अमित कुमार के मामले में भी संगठन ने आरोप लगाया है, इन्हें हाल ही में प्रबंधक (कानून) बनाया गया था, को मात्र एक वर्ष के भीतर नियमों की अनदेखी कर वरिष्ठ प्रबंधक (कानून) पद पर पदोन्नत किया गया है। डीटीसी में पिछले पांच सालों से मुख्य सतर्कता अधिकारी का पद भी रिक्त है।
गबन के आरोप के जांच के लिए समिति गठित
डीटीसी कर्मचारी कल्याण कोष में निगम के कर्मचारियों पर पैसे का गबन कर दिए जाने का आराेप सामने आया हे। डीटीसी प्रशासन ने इसे लेकर जांच समिति गठित कर दी है और संबंधित दस्तावेजों वाले कमरे को सील कर दिया है।
माना जा रहा है गबन का मामला कई लाख से भी ऊपर पहुंच सकता है। अभी तक किसी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है। डीटीसी के सूत्रों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी।
इन सभी मामलों पर डीटीसी का कोई भी अधिकारी जवाब देने को तैयार नहीं है। डीटीसी के प्रबंध निदेशक जितेंद्र यादव से भी संपर्क करने का प्रयास किया गया, मगर संपर्क नहीं हो सका है।
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