'सरकार किस दल की है, उससे ज्यादा जरूरी है संवैधानिक मर्यादा', कर्नाटक की राज्यपाल डॉ सुधा यादव ने बताई रणनीति
डॉ. सुधा यादव कर्नाटक की नई राज्यपाल के रूप में संवैधानिक दायित्व संभालने जा रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ...और पढ़ें
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डॉ. सुधा यादव ( फोटो स्रोत : जागरण)
HighLights
डॉ. सुधा यादव बनीं कर्नाटक की नई राज्यपाल।
संवैधानिक मर्यादा और राष्ट्रहित को बताया सर्वोपरि।
कर्नाटक की युवा शक्ति, शिक्षा पर रहेगा जोर।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के संसदीय बोर्ड की सदस्य और पूर्व सांसद डॉ. सुधा यादव अब कर्नाटक के राज्यपाल के रूप में नई जिम्मेदारी संभालने जा रही हैं।
राजनीतिक रूप से अलग दल की सरकार वाले इस राज्य में संवैधानिक दायित्व निभाना, सरकार के साथ रचनात्मक संवाद बनाए रखना और राज्य की जरूरतों को समझना उनकी भूमिका के अहम पक्ष होंगे।
डॉ. यादव इसे व्यक्तिगत उपलब्धि से अधिक राष्ट्र और समाज की सेवा का अवसर मानती हैं। उनके अनुसार, पद बदल सकता है, लेकिन काम का मूल भाव यानी राष्ट्रहित नहीं बदलता।
कर्नाटक की युवा शक्ति, शिक्षा और तकनीकी क्षमता को वह राज्य की प्रगति के बड़े आधार के रूप में देखती हैं। दैनिक जागरण के मुख्य संवाददाता आदित्य राज से बातचीत में उन्होंने अपनी नई पारी और दृष्टिकोण साझा किया। प्रस्तुत है बातचीत के मुख्य अंश :
सवाल: आपकी राजनीतिक यात्रा संगठन और संसद से गुजरी है। राज्यपाल की भूमिका में आपके लिए सबसे बड़ा बदलाव क्या होगा?
जवाब- हर भूमिका की अपनी प्रकृति और मर्यादा होती है। संगठन में काम करते हुए जिम्मेदारियां अलग थीं, जनप्रतिनिधि के रूप में लोगों के बीच काम करने का अवसर मिला। अब संवैधानिक पद पर हूं, इसलिए इस पद की सीमाओं और दायित्वों के अनुरूप काम करना होगा।
मेरे लिए मूल भावना वही रहेगी, देश और समाज के हित में अपना योगदान देना। मैं कर्नाटक पहुंचकर वहां की परिस्थितियों को समझूंगी और उसी आधार पर अपनी जिम्मेदारी निभाऊंगी।
सवाल: आपकी नियुक्ति की सूचना किस तरह मिली?
जवाब- मुझे पहले से इसकी जानकारी नहीं थी और न ही ऐसी कोई चर्चा मेरे सामने आई थी। घोषणा के दिन ही शाम चार बजे बताया गया कि यह जिम्मेदारी दी जा रही है। स्वाभाविक रूप से मन में खुशी हुई, लेकिन साथ ही यह भी महसूस हुआ कि एक महत्वपूर्ण दायित्व सामने है।
कुछ समय लगा यह समझने में कि अब नई भूमिका के लिए तैयार होना है। मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आभारी हूं कि उन्होंने मुझ पर विश्वास किया। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने भी भरोसा जताया और राष्ट्रपति महोदया ने यह जिम्मेदारी सौंपी, इन सभी के प्रति मेरा आभार है।
सवाल: कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है। अलग राजनीतिक पृष्ठभूमि वाली सरकार के साथ काम करने का आधार क्या होगा?
जवाब- राज्यपाल का दायित्व संवैधानिक है। सरकार किस दल की है, यह मेरे काम के प्रति दृष्टिकोण को तय नहीं करेगा। राज्य की प्रगति और लोगों के हित में जो कार्य उचित होंगे, उन्हें आगे बढ़ाने का प्रयास करूंगी।
वहां पहुंचकर सरकार और अन्य पक्षों के साथ संवाद का अवसर मिलेगा। सामंजस्य कैसे बनेगा, यह काम करते हुए स्पष्ट होगा। मेरी ओर से संवैधानिक मर्यादा का पालन और राज्य के हित को प्राथमिकता देना ही मार्गदर्शक रहेगा।
सवाल: राज्यपाल के पद को लेकर राजनीतिक बहसें अक्सर सामने आती हैं। आप इस जिम्मेदारी को किस कसौटी पर निभाना चाहेंगी?
जवाब- मेरी समझ में किसी भी पद की विश्वसनीयता उसके दायित्व के निष्ठापूर्वक निर्वहन से बनती है। राज्यपाल के पद की संवैधानिक जिम्मेदारियां स्पष्ट हैं, उन्हीं के अनुरूप काम करना होगा।
मेरा प्रयास रहेगा कि हर विषय को राज्य के हित और संवैधानिक दायित्वों के संदर्भ में देखूं। राजनीतिक संगठन में काम करने का अनुभव रहा है, लेकिन नई भूमिका में पद की गरिमा और जिम्मेदारी को ध्यान में रखकर आगे बढ़ना है।
सवाल: कर्नाटक की किन विशेषताओं को आप उसकी सबसे बड़ी ताकत मानती हैं?
जवाब- कर्नाटक की पहचान कई क्षेत्रों में है। उसका ऐतिहासिक वैभव, शिक्षा के क्षेत्र में योगदान और सूचना प्रौद्योगिकी में स्थान उसे विशिष्ट बनाते हैं। साथ ही, वहां युवाओं की बड़ी भागीदारी है।
मैं राज्य के बारे में पहले से काफी कुछ जानती हूं, लेकिन वहां रहकर लोगों, संस्थाओं और परिस्थितियों को करीब से समझना भी जरूरी होगा। अभी मेरी नजर चुनौतियों से अधिक उन अवसरों पर है, जिनसे राज्य और देश दोनों को लाभ हो सकता है।
सवाल: युवा शक्ति और तकनीकी क्षमता को लेकर आपकी क्या सोच है?
जवाब- युवा पीढ़ी भविष्य की निर्माता है। उसकी ऊर्जा और क्षमता को सकारात्मक दिशा देना समाज के लिए महत्वपूर्ण है। कर्नाटक में शिक्षा और सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में मौजूद आधार युवाओं के लिए अनेक अवसर खोलता है।
वहां पहुंचने के बाद यह समझने का अवसर मिलेगा कि राज्य की उपलब्धियों और संभावनाओं को किस तरह और बेहतर ढंग से आगे बढ़ाया जा सकता है। मैं युवाओं के साथ संवाद और सहयोग को अहम मानती हूं।
सवाल: राजनीतिक जीवन के अनुभवों ने आपको इस नई जिम्मेदारी के लिए क्या सिखाया है?
जवाब- मैंने राजनीति में आने के बाद से हर दौर को सीखने के अवसर के रूप में लिया है। लोग परिस्थितियों को उतार-चढ़ाव कह सकते हैं, लेकिन मेरा प्रयास रहा कि उनसे विचलित हुए बिना अपना काम करती रहूं।
अनुकूल समय में बहुत अधिक उत्साहित होना या प्रतिकूल समय में निराश हो जाना, दोनों ठीक नहीं। हर अनुभव से सीखकर आगे बढ़ना चाहिए। यही दृष्टिकोण अब भी मेरे साथ है और नई जिम्मेदारी में भी उपयोगी रहेगा।
सवाल: कर्नाटक और देश के लोगों के लिए आपका संदेश क्या है?
जवाब- देश और समाज का हित सर्वोपरि होना चाहिए। कर्नाटक के पास विरासत, शिक्षा, तकनीकी क्षमता और युवा प्रतिभा के रूप में मजबूत आधार है। इन संभावनाओं को समझकर सकारात्मक दिशा में काम करना राज्य की प्रगति के लिए जरूरी है।
मैं वहां की परिस्थितियों को जानकर संवैधानिक जिम्मेदारी निभाऊंगी। मेरी कोशिश होगी कि राज्यहित और राष्ट्रहित से जुड़े अच्छे कार्यों में अपना योगदान दे सकूं।
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