दीवाली पर पटाखों से दिल, कान और आंखों को खतरा; डॉक्टर ने बच्चों-बुजुर्गों को दी खास सलाह
दीवाली पर पटाखों और तेज आवाज का असर आपके स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। इससे आपकी सुनने की क्षमता, हृदय ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर, एआई जेनरेटेड
HighLights
पटाखों और तेज संगीत से सुनने की क्षमता, हृदय गति प्रभावित।
चिंगारी, राख से आंखों को गंभीर नुकसान, रोशनी जा सकती है।
छोटे बच्चों, बुजुर्गों को अत्यधिक शोर से बचाना आवश्यक है।
अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। दीवाली पर पटाखों के धमाके और तेज आवाज में बजने वाला संगीत उत्सव का हिस्सा माने जाते हैं, लेकिन इनका शोर आपकी सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। इनसे कानों की सुनने की क्षमता, हृदय गति और रक्तचाप प्रभावित हो सकते हैं।
पटाखों से निकली चिंगारी और राख आंखों की रोशनी तक छीन सकती है। इसी तरह कुछ मिनटों के धमाके से लेकर देर रात तक तेज आवाज में बजने वाले संगीत का असर केवल कानों तक सीमित नहीं रहता। इससे सुनने की क्षमता प्रभावित होने के साथ हृदय की धड़कन और रक्तचाप पर भी बुरा असर पड़ता है।
छोटे बच्चों-बुजुर्गों को बचने की जरूरत
दिल्ली मेडफस्ट ईएनटी सेंटर के संस्थापक डॉ. (मेजर) राजेश भारद्वाज के अनुसार छोटे बच्चों-बुजुर्गों को अत्यधिक तेज आवाज से बचाने की आवश्यकता है। दीवाली पर पटाखों के लगातार धमाकों और तेज संगीत के बीच बच्चों को रखना उनकी सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंचा सकता है।
एम्स के डॉक्टर ने बातया आंखों को खतरा
एम्स के पूर्व विभागाध्यक्ष और डॉ. अग्रवाल्स आई हास्पिटल के रीजनल हेड पद्मश्री प्रो. (डा.) जीवन सिंह तितियाल ने बताया कि पटाखों की चिंगारी, राख और धमाके से कार्निया, लेंस और रेटिना को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
पटाखे खुली जगह पर जलाएं और कम से कम पांच मीटर दूरी रखें। बच्चों को अकेला न छोड़ें। आंख में सामान्य जलन होने पर उसे न मलें, साफ पानी से 20 मिनट धोएं। गंभीर चोट या वस्तु धंसने पर आंख न धोएं, तुरंत इमरजेंसी पहुंचें।
श्रवण हानि और हृदय पर असर
एम्स के ईएनटी विशेषज्ञ प्रो. डा. कपिल सिक्का के अनुसार तेज आवाज से स्थायी श्रवण हानि हो सकती है। विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार के अनुसार आवाज जितनी तेज होगी, सुरक्षित संपर्क अवधि उतनी कम होगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 80 डेसिबल पर सप्ताह में 40 घंटे और 100 डेसिबल पर करीब 20 मिनट का संपर्क सुरक्षित है।
प्रो. डॉ. कपिल सिक्का के अनुसार यह नुकसान धीरे-धीरे बढ़ता है। उनकी सलाह है कि छोटे बच्चों और बुजुर्गों को पटाखों के नजदीक न ले जाएं। धमाके के बाद कान में सीटी या घंटी सुनाई दे, सुनने में कमी महसूस हो या चक्कर आएं तो ईएनटी विशेषज्ञ से जांच कराएं।
उम्र के हिसाब से तेज आवाज का असर
- 1-15 वर्ष 80 डेसिबल से ऊपर लंबे समय तक कान में सीटी, बेचैनी, सुनने और ध्यान पर असर
- 16-40 वर्ष 80 डेसिबल से ऊपर बार-बार या लंबे समय तक कान में आवाज, सुनाई कम देना, धीरे-धीरे श्रवण हानि
- 40 वर्ष से अधिक तेज आवाज में लंबे समय तक रहने पर सुनने की पहले से मौजूद कमी बढ़ सकती है |
इन बातों का रखें ध्यान
- पटाखे जलाते समय बच्चों को धमाके के नजदीक न खड़ा करें।
- तेज आवाज वाले पटाखों से दूरी रखें।
- घर, वाहन या सार्वजनिक स्थान पर तेज संगीत न बजाएं।
- कान में सीटी या घंटी की आवाज को सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें।
- हृदय रोग और उच्च रक्तचाप से पीड़ित बुजुर्गों को अत्यधिक शोर से दूर रखें।
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