कचरा मैनेजमेंट से धूल कंट्रोल तक... दिल्ली की हवा अब साल भर साफ करने के लिए सरकार का प्लान तैयार
दिल्ली सरकार ने केंद्र के साथ मिलकर प्रदूषण से निपटने के लिए एक व्यापक, सालभर चलने वाला एक्शन प्लान तैयार ...और पढ़ें
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दिल्ली सरकार ने केंद्र के साथ मिलकर प्रदूषण से निपटने के लिए एक व्यापक, सालभर चलने वाला एक्शन प्लान तैयार किया है। फाइल फोटो
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई अब सिर्फ सर्दियों के महीनों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे साल चलेगी। पहली बार, एक ऐसा एक्शन प्लान बनाया गया है जो लंबी अवधि की रणनीतियों पर आधारित है। इसका मतलब है कि यह प्लान प्रदूषण के स्रोतों को टारगेट करेगा।
दिल्ली को जहरीली हवा से मुक्त करने के लिए, केंद्र और दिल्ली सरकारों ने "पूरी सरकार" वाला तरीका अपनाया है और एक व्यापक एक्शन प्लान तैयार किया है। इस संयुक्त रणनीति का मकसद अगले चार सालों में दिल्ली के वातावरण में पार्टिकुलेट मैटर (PM 2.5) के लेवल को काफी कम करना है। यह एक्शन प्लान न सिर्फ थोड़े समय के लिए राहत देगा, बल्कि दिल्ली के शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर में लंबे समय तक सुधार भी सुनिश्चित करेगा।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट में बदलाव
- 14,000 बसों का लक्ष्य: प्रदूषण का एक बड़ा कारण गाड़ियों से निकलने वाला धुआं है। सरकार ने प्राइवेट गाड़ियों पर निर्भरता कम करने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ाने का रोमैप तैयार किया है। इस प्लान के तहत, मार्च 2026 तक बसों की संख्या बढ़ाकर 6,000 कर दी जाएगी। मार्च 2029 तक, बेड़े में कुल 14,000 बसें शामिल होंगी।
- लास्ट-माइल कनेक्टिविटी: मेट्रो स्टेशनों से कनेक्टिविटी के लिए 2,850 छोटी बसें चलाई जाएंगी। रैपिडो और सहकार टैक्सी के साथ मिलकर जल्द ही ई-ऑटो और बाइक टैक्सी के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा।
इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) पॉलिसी 2.0
- पुरानी गाड़ियों पर रोक: दिल्ली में 8.7 मिलियन एक्टिव गाड़ियों में से 5.8 मिलियन दोपहिया वाहन हैं, जिनमें से 2.2 मिलियन पुराने मॉडल (BS-3 या उससे नीचे) हैं। नई EV पॉलिसी के तहत, दोपहिया और कमर्शियल गाड़ियों (ट्रक/थ्री-व्हीलर) को बदलने के लिए भारी सब्सिडी और स्क्रैपिंग इंसेंटिव दिए जाएंगे। अगले तीन सालों में EV चार्जिंग पॉइंट्स की संख्या 9,000 से बढ़ाकर 36,000 कर दी जाएगी। ट्रक मालिकों को इलेक्ट्रिक गाड़ियां अपनाने के लिए ब्याज दर पर सब्सिडी और कैश इंसेंटिव मिलेंगे।
- ट्रैफिक जाम और इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार: दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने शहर में 62 जाम वाली जगहों की पहचान की है। इनमें से 30 प्राथमिकता वाली जगहों पर तुरंत सुधार का काम शुरू हो गया है। ट्रैफिक मैनेजमेंट में पुलिस की मदद के लिए DTC (दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन) के 1,200 अतिरिक्त कर्मचारियों को तैनात किया गया है।
- कंस्ट्रक्शन का काम: ट्रैफिक को सुचारू बनाने के लिए तीन साल के अंदर अंडरपास और यू-टर्न का नेटवर्क बनाया जाएगा।
- स्मार्ट पार्किंग: भीड़ कम करने के लिए "स्मार्ट प्राइसिंग" लागू की जाएगी, ताकि प्राइवेट गाड़ियां भीड़भाड़ वाले इलाकों में न जाएं।
- धूल कंट्रोल के लिए ₹6,000 करोड़ का बजट: सड़कों की धूल प्रदूषण का एक बड़ा सोर्स है। सरकार ने दिल्ली की 3,300 किमी सड़कों के रीडेवलपमेंट के लिए ₹6,000 करोड़ का बजट दिया है।
- मैकेनाइज्ड स्वीपिंग: सड़क की सफाई के लिए आधुनिक मशीनें और 250 वॉटर स्प्रिंकलर मशीनें लगाई जा रही हैं।
- C&D कचरा: कंस्ट्रक्शन और डिमोलिशन कचरे के मैनेजमेंट के लिए तेहखंड में एक नया प्लांट शुरू किया जाएगा। 500 वर्ग मीटर से बड़े कंस्ट्रक्शन साइट्स की ऑनलाइन निगरानी की जाएगी।
- लैंडफिल साइट्स को खत्म करने का कमिटमेंट: कचरे के पहाड़ों को साफ करने के लिए सख्त डेडलाइन तय की गई हैं। दिल्ली सरकार ने कचरा मैनेजमेंट के लिए MCD (म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ दिल्ली) को ₹500 करोड़ दिए हैं और भविष्य में और फाइनेंशियल मदद का भरोसा दिलाया है।
- ओखला लैंडफिल: जुलाई 2026 तक साफ किया जाएगा।
- भलस्वा लैंडफिल: अक्टूबर 2026 तक।
- गाजीपुर लैंडफिल: दिसंबर 2027 तक।
- ग्रीन दिल्ली के लिए 35 लाख नए पौधे: पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए, अगले चार सालों में "दिल्ली रिज" इलाके में 35 लाख पेड़ लगाए जाएंगे। लक्ष्य है कि सिर्फ 2026 में 1.4 मिलियन पौधे लगाए जाएं। नीम, पीपल, बरगद और पिलखन जैसी देसी प्रजातियों को प्राथमिकता दी जाएगी।
- इंडस्ट्रीज के प्रति "जीरो टॉलरेंस": प्रदूषण फैलाने वाली इंडस्ट्रियल यूनिट्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू की गई है। सर्वे के आधार पर, अब तक 1,000 से ज़्यादा प्रदूषण फैलाने वाली यूनिट्स को सील किया जा चुका है। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के निर्देशों के अनुसार, अब इंडस्ट्रीज को ऑनलाइन एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम लगाना होगा।
यह एक्शन प्लान सिर्फ एक सरकारी घोषणा नहीं है, बल्कि दिल्ली के नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा करने का एक कमिटमेंट है। सरकार ने साफ किया है कि इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी, साथ ही लोगों की भागीदारी और व्यवहार में बदलाव, इस मिशन की सफलता के लिए बहुत ज़रूरी होंगे। इस एक्शन प्लान के नतीजे बहुत जल्द दिखाई देंगे।
-रेखा गुप्ता, मुख्यमंत्री, दिल्ली
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