प्रदूषण से लड़ाई में दिल्ली का बड़ा प्लान, देश का पहला ‘क्लीन एयर जोन’ बनाने का विजन
दिल्ली में 'अर्बन अड्डा 2026' शिखर सम्मेलन में राजधानी को देश का पहला 'क्लीन एयर जोन' बनाने का महत्वाकांक्षी विजन ...और पढ़ें

इंडिया हैबीटेट सेंटर में आयोजित अर्बन अड्डा कार्यक्रम को संबोधित करते सीएक्यूएम के सदस्य सचिव तरुण पिथोडे। जागरण
HighLights
दिल्ली को देश का पहला 'क्लीन एयर जोन' बनाने का विजन।
प्रदूषण रोकने हेतु शहर-व्यापी रणनीति पर विशेषज्ञों ने किया विचार।
जल सुरक्षा, लिंग-समावेशी परिवहन पर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। इंडिया हैबिटेट सेंटर में जारी ''अर्बन अड्डा 2026'' शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन राजधानी को देश का पहला ''क्लीन एयर जोन'' बनाने के लिए एक महत्वाकांक्षी विजन पेश किया गया।
सम्मेलन में विशेषज्ञों ने प्रदूषण की घटनाओं पर केवल प्रतिक्रिया देने के बजाय उन्हें रोकने की दिशा में शहर-व्यापी रणनीति पर विचार-विमर्श किया।
सत्र के दौरान वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के सदस्य सचिव तरुण कुमार पिथोड़े ने कहा कि साफ़-सुथरी नीतियों, नियमों की कड़ाई और आस-पास के इलाकों के साथ मिलकर काम करने से, पूरी दिल्ली में कम प्रदूषण वाला क्षेत्र (लो एमिशन ज़ोन) बनाना बिल्कुल संभव है।
इस अवसर पर ''स्कूल क्लीन एयर जोन'' रिपोर्ट भी जारी की गई, जिसमें बच्चों को जहरीले उत्सर्जन से बचाने के लिए स्थानीय स्थानिक हस्तक्षेप और जीरो-एमिशन स्कूल सीमाओं को आवश्यक बताया गया।
ट्रीट, रीयूज और रिचार्ज माडल अपनाने पर जोर
पर्यावरण संतुलन के साथ जल सुरक्षा पर केंद्रित सत्रों का संचालन ''गुरुजल'' संगठन द्वारा किया गया। कमजोर मानसून और अल नीनो की चुनौतियों के बीच आयोजित 'वाटर सिक्योरिटी के लिए सर्कुलैरिटी' सत्र में गुरुजल की सीईओ शुभी केसवानी और पैनलिस्टों ने जल संकट व बाढ़ से निपटने के लिए शहरों में ट्रीट, रीयूज और रिचार्ज माडल अपनाने पर जोर दिया।
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इसके अतिरिक्त, डेटा सेंटर्स के बढ़ते जल-फुटप्रिंट पर आयोजित गोलमेज बैठक में विशेषज्ञों ने परियोजना स्वीकृति से पहले जल उपलब्धता को प्रमुख निर्णय बिंदु बनाने की वकालत की।
सम्मेलन में बुनियादी ढांचे के एकीकरण और लिंग-समावेशी परिवहन पर भी सार्थक संवाद हुआ। बुनियादी ढांचा सत्र में पेरी-अर्बन सीमाओं के प्रबंधन के लिए एकीकृत महानगरीय अम्ब्रेला प्राधिकरणों की मांग की गई, जबकि राहगिरी फाउंडेशन ने 'वाकेबिलिटी इन इंडियन सिटीज' प्रकाशन का अनावरण किया।
महिला सुरक्षा को प्लान में शामिल करने का आह्वान
वहीं 'फ्राम इंफ्रास्ट्रक्चर टू इंक्लूज़न' सत्र में अभिनेत्री अर्चिता साहू, यूएन अधिकारियों और शहरी योजनाकारों ने महिलाओं के लिए सुरक्षित गतिशीलता को मौलिक मानवाधिकार बताते हुए इसे शहर के मास्टर प्लान में शामिल करने का आह्वान किया।
नीतिगत बैठकों के साथ सम्मेलन में सामुदायिक जुड़ाव भी देखने को मिला। सेंट्रल एट्रियम में छात्रों और शोधकर्ताओं ने माइक्रो-मोबिलिटी और शहरी हीट रेजिलिएंस पर पोस्टर प्रस्तुत किए, जबकि इससे पूर्व ''शहर-ए-महफिल'' सांस्कृतिक संध्या में कवियों और नागरिकों ने शब्दों व कविता के जरिये भारतीय शहरों के साथ अपने व्यक्तिगत रिश्तों को साझा किया।
