विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

'स्मृति' में पांडुलिपियों की विरासत को मिल रहा डिजिटल जीवन, एक क्लिक पर आपकी भाषा में मिलेगी जानकारी 

Published: Sun, 05 Apr 2026 11:13 AM (IST)

दिल्ली में मनुस्क्रिप्ट एवं इन्स्क्रिप्शन डिजिटाइजेशन फाउंडेशन (एमआइडीएफ) की 'स्मृति' पहल भारतीय पांडुलिपियों, अभिलेखों और शिलालेखों को डिजिटल रूप में संरक्षित कर रही है।

इंडिया हैबिटेट सेंटर में एमआइडीएफ के स्टाल पर मौजूद पांडुलिपियां जिन्हें डिजिटल तौर पर किया गया है संरक्षित। जागरण

इंडिया हैबिटेट सेंटर में एमआइडीएफ के स्टाल पर मौजूद पांडुलिपियां जिन्हें डिजिटल तौर पर किया गया है संरक्षित। जागरण

HighLights

  1. पांडुलिपियों, अभिलेखों और शिलालेखों को डिजिटल करने की पहल

  2. MIDF की 'स्मृति' पहल भारतीय धरोहरों का डिजिटलीकरण कर रही है

  3. यह पहल भविष्य की पीढ़ियों के लिए ज्ञान सुलभ बनाएगी

जागरण संवाददाता, दक्षिणी दिल्ली। भारत की सभ्यता सिर्फ इतिहास के पन्नों में नहीं, बल्कि उन अनगिनत पांडुलिपियों, अभिलेखों और शिलालेखों में भी जीवित है, जो सदियों से हमारी सांस्कृतिक स्मृति को संजोए हुए हैं। ताड़पत्रों पर लिखे ग्रंथ, ताम्रपत्र अनुदान, मंदिरों के अभिलेख और प्राचीन लिपियां- ये सभी हमारी बौद्धिक और आध्यात्मिक विरासत के अनमोल स्रोत हैं।

दिल्ली में मनुस्क्रिप्ट एवं इन्स्क्रिप्शन डिजिटाइजेशन फाउंडेशन (एमआइडीएफ) की ओर से ‘स्मृति’ पहल के तहत इन भारतीय धरोहरों में निहित ज्ञान को डिजिटल रूप में संरक्षित करने की कोशिश जारी है। इसके तहत इन्हें एकीकृत कर भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुलभ बनाने और ऑनलाइन संरक्षित करने का काम किया जा रहा है।

Khabar delhi (46)

इंडिया हैबिटेट सेंटर में एमआइडीएफ के स्टाल पर मौजूद पांडुलिपियां जिन्हें डिजिटल तौर पर किया गया है संरक्षित। जागरण

कई भाषाओं में उपलब्ध होंगे दस्तावेज

इंडिया हैबिटेट सेंटर में जारी इंद्रप्रस्थ फेस्टिवल में फाउंडेशन की ओर से लगे स्टाल पर दर्शकों को इस बारे में जानकारी दी गई। देशभर में पांडुलिपियों के विशाल भंडार को आधुनिक तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के माध्यम से संगठित, उपयोगी और भविष्य के लिए सुरक्षित डाटाबेस में बदलने की दिशा में जारी इस प्रयास से लोगों को खूब आकर्षित किया।

लोगों ने दिए गए क्यूआर को स्कैन कर पांडुलिपियों के डिजिटल स्वरूप को देखा और इनके बारे में जाना। संस्था से जुड़े तेजस ने बताया कि संस्था पांडुलिपियों को एकत्रित कर एआई-रेडी रिपाजिटरी में बदलने का काम कर रही है।

उच्चतम गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित करते हुए उन्नत तकनीकों के उपयोग और विशेषज्ञों की निगरानी में यह काम जारी है। इस पोर्टल पर जल्द ही ये दस्तावेज कई भाषाओं में उपलब्ध होंगे। क्लिक करते ही हर जानकारी चयनित भाषा पर सामने होगी।

यह भी पढ़ें- दिल्ली के ऐतिहासिक स्मारकों की नींव को मिलेगी मजबूती, पानी से होगा बचाव

यह भी पढ़ें- 400 साल पुराने बारापुला पुल का संरक्षण कार्य पूरा, कभी मुगलों के लिए यमुना पार करने का था मुख्य रास्ता 

 

संस्था की ‘स्मृति’ केवल अतीत को सहेजने का प्रयास नहीं, उसे वर्तमान और भविष्य से जोड़ने का माध्यम है। यह भारत की उस ज्ञान-परंपरा को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो प्राचीन पांडुलिपियों और अभिलेखों में बसती है। इस विशाल धरोहर को एक जगह पर सुरक्षित और संरक्षित करने के साथ नई पीढ़ी के लिए सुलभ बनाया जा सके यही कोशिश है।


-

-पूजा पोरवाल, सीईओ, एमआइडीएफ