दिल्ली के ऐतिहासिक स्मारकों की नींव को मिलेगी मजबूती, पानी से होगा बचाव
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) दिल्ली के ऐतिहासिक स्मारकों की नींव को पानी से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए ...और पढ़ें
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सांकेतिक तस्वीर। सौजन्य- एआई
HighLights
स्मारकों की नींव में पानी जाने से रोका जाएगा।
एएसआई दिल्ली के 174 स्मारकों का संरक्षण करेगा।
मानसून से पहले जल निकासी व्यवस्था सुधारी जाएगी।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली के सभी ऐतिहासिक गेटों को मजबूती दी जाएगी । इसके लिए इनके संरक्षण कार्य से लेकर इनकी मजबूती बनाए रखने के लिए काम किया जाएगा। जिसके तहत ऐसे गेटों के आसपास जल निकासी का उचित प्रबंध किया जाएगा ताकि उनकी नीव में पानी पहुंचकर इनका नुकसान ना करे।
दिल्ली गेट स्मारक से यह व्यवस्था शुरू की जा रही है। दिल्ली भर में ऐसे स्मारकों की पहचान करी जा रही है, जिनकी नीव में पानी भरता है और बरसाती पानी की निकासी का इंतजाम नहीं है।
दिल्ली में कितने स्मारक हैं?
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के पास दिल्ली में 174 स्मारक हैं। इनमें से कई जर्जर हालत में हैं, इन्हें बचाने के लिए पिछले सालों में भी काम किया गया है। इनमें बेगमपुरी कि वह मस्जिद भी शामिल है जिसकी नीव में कई वर्षों से पानी जा रहा था।
कुछ साल पहले इसके चारों ओर बंद पड़ी नालियों को खोलकर पानी की निकासी की व्यवस्था बेहतर की गई है। स्मारक को बचाने के लिए कुछ संरक्षण कार्य भी किया गया है। इसी की तर्ज पर दिल्ली गेट स्मारक में भी पिछले कुछ माह से काम चल रहा है। जिसके तहत स्मारक में जरूरी संरक्षण कार्य पूरा कराया गया है।
इसके अलावा नीव में जाने वाले पानी को रोकने के लिए पाइपलाइन डालकर व्यवस्था को इस तरह बनाया जा रहा है। मकसद यह है कि मानसून के दौरान इसकी नीव में पानी न जाए और बाहर निकल जाए। दरअसल यह समस्या एएसआइ के कई स्मारकों में बनी हुई है।
बरसाती पानी को रोकने का होगा इंतजाम
एएसआई ने इसे देखते हुए अब उन सभी स्मारकों को लेकर योजना तैयार की गई है। जिसके तहत सभी ऐसे स्मारकों की पहचान कर उनकी नीव में जाने वाले बरसाती पानी को रोकने का इंतजाम किया जाएगा। इस कार्य को मानसून से पहले ही पूरा कर लिया जाएगा।
इसके साथ ही एएसआई ने मानसून से पहले सभी स्मारकों में जल निकासी सहित उन सभी इंतजाम को बेहतर करने का निर्देश दिया है कि जिन में जल निकासी या बरसाती जल निकासी को लेकर कुछ अड़चन है। एएसआइ के पूर्व अधिकारी कहते हैं कि स्मारकों को बचाने के लिए संरक्षण कार्य के साथ-साथ उनकी नीव को बचाना भी जरूरी है। मानसून के दौरान पानी नीव में इकट्ठा होता है जो कहीं ना कहीं स्मारकों को नुकसान पहुंचाने का काम करता है।
