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400 साल पुराने बारापुला पुल का संरक्षण कार्य पूरा, कभी मुगलों के लिए यमुना पार करने का था मुख्य रास्ता 

Published: Wed, 18 Mar 2026 10:43 PM (IST)

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने 400 साल पुराने बारापुला पुल का संरक्षण कार्य पूरा कर लिया है। सालों की अनदेखी ...और पढ़ें

संरक्षण कार्य पूरा होने के बाद ऐतिहासिक बारापुला की फोटो। सौजन्य :एएसआई

संरक्षण कार्य पूरा होने के बाद ऐतिहासिक बारापुला की फोटो। सौजन्य :एएसआई

HighLights

  1. 400 साल पुराने बारापुला पुल का संरक्षण पूरा हुआ

  2. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने यह कार्य संपन्न किया

  3. मुगलकालीन पुल अब अतिक्रमण मुक्त होकर जनता के लिए खुला

राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। 400 साल पुराना बारापुला पुल सालों की अनदेखी के बाद अब अच्छी स्थिति में वापस आ गया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने इसका संरक्षण कार्य पूरा कराया है। बारापुला एलिवेटेड कॉरिडोर के नीचे और निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशन के पीछे मौजूद इस ऐतिहासिक निर्माण का दो-फेज में कार्य हुआ था, जो अब पूरा हो गया है।

कब शुरू हुआ था संरक्षण कार्य?

अब मुगल-काल का यह पुल फिर से नया जैसा हो गया है, जो घने शहरी आबादी के बीच अतीत की एक दुर्लभ झलक दिखाता है। 17वीं सदी का यह पुल कभी मुगलों के लिए यमुना पार करने और आगरा से निजामुद्दीन दरगाह और हुमायूं के मकबरे जैसी सांस्कृतिक और धार्मिक जगहों तक पहुंचने का एक मुख्य रास्ता था।

काम के पहले फेज के तहत इसके ऊपर से बड़ी मात्रा में मलबा हटा गया था, यह कार्य जनवरी 2025 में शुरू हुआ था और दूसरे फेज़ के तहत संरक्षण कार्य हुआ, जो अक्टूबर 2025 और फरवरी 2026 के बीच पूरा हुआ। यह निर्माण अब ज़्यादातर असली मुगल स्ट्रक्चर जैसा दिखता है और आम लोगों के देखने के लिए खुला है।

अगस्त 2024 में उस समय के उपराज्यपाल वी के सक्सेना के यहां का दौरा करने के बाद संरक्षण कार्य की प्रक्रिया शुरू हुई थी। उस समय पुल जंगपुरा के पास की मद्रासी कॉलोनी में लगभग मिल गया था, इसके रास्ते पर कब्जा कर लिया गया था और इसे एक कामचलाऊ बाज़ार में बदल दिया गया था, इसकी ऐतिहासिक अहमियत को काफी हद तक भुला दिया गया था।

एक हिस्सा पर्यटकों के लिए खुला

एएसआई के दिल्ली मंडल के अधीक्षण पुरातत्वविद आर के पटेल ने बताया कि पुल का असली मटीरियल देखने के लिए कई बिटुमिनस लेयर हटाई गईं, जिसके नीचे दिल्ली क्वार्टजाइट (दिल्ली के आसपास मिलने वाला पत्थर) मिला था।

पुल के किनारों के पास असली मटीरियल देखा जा सकता है, लेकिन पुल के बीच के रास्ते की बड़े पैमाने पर मरम्मत करनी पड़ी क्योंकि यह सालों के इस्तेमाल से खराब हो गया था।

पुल के किनारों और 12 खंभों की मरम्मत की गई है। पुल अब लोहे के गेट से सुरक्षित है, जिसका एक हिस्सा पर्यटकों के लिए खुला है। यह पुल 1621-22 में मुगल बादशाह जहांगीर के दरबार के मुख्य हिजड़े मिहर बानू आगा ने बनवाया था।

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