लाल किले से कुतुब मीनार तक सजेगी कला की महफिल, दिल्ली में 108 दिन दिखेंगी देश-विदेश की कलाकृतियां
दिल्ली के ऐतिहासिक स्मारक 4 दिसंबर 2027 से शुरू होने वाले भारत कला, वास्तुकला और डिजाइन द्विवार्षिकी के दूसरे संस्करण ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।
HighLights
दिल्ली में 4 दिसंबर 2027 से 108 दिवसीय कला द्विवार्षिकी।
'तत् त्वम् असि' थीम: स्वयं और समाज से जुड़ने का प्रयास।
लालकिला, कुतुब मीनार जैसे ऐतिहासिक स्थलों पर कला प्रदर्शन।
राज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली के ऐतिहासिक स्मारक कला और रचनात्मकता के नए रंग में दिखाई देंगे। पर्यटक स्मारक घूमने के साथ साथ देश-विदेश के आर्ट कलाकारों की कलाकृतियों को भी निहार सकेंगे।
यह आयोजन भारत कला, वास्तुकला और डिजाइन द्विवार्षिकी के तहत दूसरे संस्करण के तहत अागामी चार दिसंबर से 21 मार्च 2027 तक दिल्ली में होने जा रहा है। 108 दिन चलने वाले इस आयोजन की थीम ‘तत् त्वम् असि यानी व्याकुलता के युग में फिर से जुड़ना’ रखी गई है।
इसका आयोज आधुनिक जीवन की भागदौड़ और लगातार बढ़ते ध्यान भटकाव के बीच व्यक्ति को स्वयं, समाज और अपने आसपास की दुनिया से दोबारा जोड़ने के प्रयास के तहत किया गया है।
दाे वर्ष बाद होने जा रही इस कला प्रदर्शनी को इस बार लालकिला के साथ साथ पुराना किला, सफदरजंग का मकबरा, कुतुब मीनार, किला राय पिथौरा और लोधी गार्डन जैसे ऐतिहासिक स्थलों पर भी लगाया जाएगा।
इससे लोगों को एक ही समय में दिल्ली की ऐतिहासिक विरासत और आज के कलाकारों की रचनात्मक सोच को देखने का अवसर मिलेगा। इस आयोजन का इस बार विस्तार किया गया है और इसमें विदेशी आर्ट कलाकार भी भाग ले सकेंगे। वहीं देश केे आर्ट छात्रों को भी मौका मिल सकेगा।
‘तत् त्वम् असि’ के जरिए देश
‘तत् त्वम् असि’ उपनिषदों से जुड़ा विचार है, जिसका सामान्य अर्थ ‘वह तुम हो’ माना जाता है। इस अवधारणा के जरिए व्यक्ति और व्यापक अस्तित्व के बीच संबंध की ओर संकेत किया जाता है।
दूसरे संस्करण में इसे कहीं बड़े स्तर पर शहर के विभिन्न हिस्सों और ऐतिहासिक स्थलों तक ले जाने की योजना है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण और संस्कृति मंत्रालय के साथ मिलकर संरक्षित स्मारकों को समकालीन रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने की तैयारी की जा रही है।
संस्कृति मंत्रालय के सचिव, विवेक अग्रवाल ने कहा कि इस द्विवार्षिक आयोजन में राष्ट्रीय राजधानी के प्रमुख ऐतिहासिक धरोहर स्थलों पर कलाकृतियांं प्रदर्शित की जाएंगी।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष के द्विवार्षिक की थीम भारत की प्राचीन परंपराओं और आध्यात्मिक विचारों से प्रेरणा लेती है, जो आत्म-निरीक्षण और व्यापक चेतना के साथ एकता पर जोर देती है।
यह भी पढ़ें- 1648 वाले लुक में वापस लौटा लाल किले का लाहौरी गेट, 378 साल बाद फिर दिखा मुगलकालीन रूप
यह भी पढ़ें- लाल किले पर जेन-जी से रूबरू हुए पीएम मोदी, युवाओं ने कहा- सरकार ने सुनी हमारी बात
