1648 वाले लुक में वापस लौटा लाल किले का लाहौरी गेट, 378 साल बाद फिर दिखा मुगलकालीन रूप
लालकिला का लाहौरी गेट अपने मूल 1648 के रंग में वापस आ गया है, जिसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) ने ...और पढ़ें

लाल किला पहले और अब। जागरण
HighLights
लालकिला का लाहौरी गेट मूल 1648 के कत्थई रंग में लौटा।
एएसआइ ने सैंड ब्लास्टिंग से पुरानी पेंट परतें हटाईं।
दिल्ली गेट का रंग भी जल्द बदलने की योजना है।
वी के शुक्ला, नई दिल्ली। राष्ट्र की गौरव गाथा का साक्षी विश्व धरोहर लाल किला के जिस लाहौरी गेट की प्राचीर से प्रधानमंत्री हर साल स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र को संबोधित करते हैं। इस गेट का वेल एरिया (गोलाकार एरिया) अब बदला बदला नजर आता है, जो अभी तक गहरे लालरंग में रंगा था अब वहां का एरिया हल्के कत्थई रंग में दिखता है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) ने अध्ययन के बाद लाल रंग को हटा दिया है और इसे उसी रंग में लाया गया है जिस रंग में लालकिला का यह भाग 1648 में बनाए जाने केे समय था। एएसआइ ने लाल किले के दिल्ली गेट का भी अध्ययन कराया है। अगले कुछ समय में इसका भी रंग बदला जाएगा।
कई परतों पर लगा था लाल रंग
लाहौरी गेट के काम से पहले की स्थिति ऐसी थी कि दीवारों पर कई परतों में लाल रंग लगा था, जिससे नमी दीवारों के अंदर जा रही थी। एएसआइ की मानें तो इससे दीवार की प्राकृतिक क्षमता प्रभावित हुई है। मूल मुगलकालीन अनगढ़े पत्थरों की चिनाई और मेहराबों की विशेषताएं भी पेंट के नीचे छिपी थीं।
अब एएसआइ द्वारा पुराने पेंट की परतों को मूल चिनाई को नुकसान पहुंचाए बिना सैंड ब्लास्टिंग तकनीक से हटाया गया है।
सैंड ब्लास्टिंग एक ऐसी सरफेस फिनिशिंग प्रक्रिया है, जिसमें उच्च दबाव वाली कंप्रेस्ड हवा का उपयोग करके तेज गति से बालू के कणों को सतह पर डाला गया है। इसके बाद हिल रहे ढीले पत्थरों को मजबूत किया गया और दरारों की भराई तथा दीवार की मजबूती के लिए चूने के गारे से प्वाइंटिंग की गई है।
यहां बता दें कि लालकिला के लाहौरी गेट के वेल एरिया में ब्रिटिश काल में ईंटों और सीमेंट से बड़े स्तर पर काम किया गया था।
अंग्रेजों ने कब्जे के बाद अपनीतरह से किया था निर्माण
दरअसल बादशाह बहादुर शाह जफर को बंदी बना कर अंग्रेजों ने जब 1857 में लालकिला पर कब्जा कर लिया तो लालकिला का अपने तरीके से उपयोग किया आैर इनके दोनों गेटों के ऊपर भारी तोपें लगाई गईं, जिन्हें ऊपर चढ़ाने के लिए सीढ़ियां बनाई गईं और अतिरिक्त निर्माण कार्य किया गया।
अब यह निर्माण भी धरोहर में शामिल है। इन्हीं सीढ़ियों से प्रधानमंत्री लालकिला की प्राचीर पर पहुंचते हैं जहां झंडा फहराकर राष्ट्र को संबोधित करते हैं। लाहौरी गेट के प्रवेश क्षेत्र की छत और खंभों पर भी काम हुआ है। इन भागों में कील ठोकने से कई दरारें थीं, उसे ठीक किया गया है। खंभों पर लगी कई परतों वाला पेंट था जिसे भी हटाया गया है।
ब्रिटिश काल के इस निर्माण की ईंटों और सीमेंट की पुरानी प्वाइंटिंग वाले मेहराबों पर अब अर्ध-मोल्डेड चूने के प्लास्टर और पारंपरिक चूने की सामग्री से प्वाइंटिंग की गई है। इससे पहले पिछले साल यहां के मीना बाजार में भी काम किया गया है। इसी सैंड ब्लास्टिंग तकनीक का इस्तेमाल मीना बाजार के कुछ हिस्सों में किया गया है।
