किसी ने लगाए लाखों पौधे, कोई कर रहा जागरूक; हरियाली और संरक्षण से दिल्ली की तस्वीर संवारते 'ग्रीन प्रहरी'
दिल्ली में कई व्यक्ति और संस्थाएं "ग्रीन प्रहरी" बनकर पर्यावरण संरक्षण में जुटे हैं, जो पौधरोपण, मियावाकी वनीकरण और जागरूकता अभियानों के माध्यम से शहर को हरा-भरा बना रहे हैं।

कालिंदी कुंज घाट पर पौधरोपण के लिए लोगों को जागरूक करते राहुल। जागरण
HighLights
दिल्ली में कई व्यक्ति और संस्थाएं पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय।
मियावाकी तकनीक से संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर में 80,000 पौधे।
'ग्रीन यात्रा' और 'नई दिल्ली नेचर सोसाइटी' जैसी पहलें महत्वपूर्ण।
शालिनी देवरानी, दक्षिणी दिल्ली। बढ़ती आबादी और सीमित संसाधनों के बीच राजधानी में कई “ग्रीन प्रहरी” पर्यावरण संरक्षण की मिसाल पेश कर रहे हैं। कोई धरती को हरा-भरा बनाने में जुटा है, कोई लोगों पर्यावरण से जोड़ रहा है, तो कोई नदियों के संरक्षण के लिए प्रयासरत हैं।
शहरीकरण और बढ़ते प्रदूषण के बीच दिल्ली समेत एनसीआर में व्यक्तिगत प्रयासों से लेकर संगठित मुहिम तक तक चल रही यह कोशिशें एक स्वच्छ, हरित और संतुलित पर्यावरण की दिशा में उम्मीद जगा रही हैं।

इस बार ‘विश्व पृथ्वी दिवस’ “हमारी शक्ति, हमारा ग्रह” थीम के साथ मनाया जा रहा है, जो इन प्रयासों को और मजबूती देने का संदेश देता है।
पौधरोपण से बदलाव की ‘ग्रीन यात्रा’
गणपति उत्सव के दौरान पीओपी (प्लास्टर आफ पेरिस) और प्लास्टिक की मूर्तियों से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान को देखते हुए वर्ष 2008 में प्रदीप त्रिपाठी और दुर्गेश गुप्ता ने ‘गो ग्रीन गणेशा’ अभियान की शुरुआत की।
इस पहल के माध्यम से उन्होंने सोसाइटियों, स्कूलों, कालेजों और हाउसिंग सोसाइटियों में लोगों को इको-फ्रेंडली विकल्प अपनाने के लिए जागरूक किया। वर्ष 2010 में संस्था के रूप में स्थापित ग्रीन यात्रा आज देशभर में पर्यावरण संरक्षण की एक सशक्त आवाज बन चुकी है।
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‘गो ग्रीन किड्स’ के जरिए बच्चों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित की जा रही है, वहीं ‘ग्रीन यूथ ग्रीन इंडिया’ और ‘जरूरत’ जैसे प्रोजेक्ट्स के माध्यम से जागरूकता और संरक्षण का काम जारी है। ‘मियांवाकी सघन वनीकरण’ जैसी तकनीकों से हर वर्ष लाखों पौधे लगाए जा रहे हैं।

संस्था के संस्थापक प्रदीप त्रिपाठी के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर में अब तक करीब 10 लाख पौधे लगाए जा चुके हैं, जबकि मियावाकी तकनीक के तहत करीब 40 प्रोजेक्ट के तहत सघन वन विकसित किए गए हैं।
इनमें संजय गांधी ट्रांसपोर्ट नगर का प्रोजेक्ट सबसे बड़ा है, जहां 80,000 पौधों का रोपण किया गया है। यह स्वदेशी पौधे होते हैं।
प्रकृति से जोड़ रही नई दिल्ली नेचर सोसाइटी
दिल्ली की नई दिल्ली नेचर सोसाइटी संस्था पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए कार्यरत कर रही है। संस्था से जुड़े वेरहेन खन्ना ने बताया कि बच्चों, युवाओं और परिवारों को प्रकृति से जोड़ने के लिए नेचर वाक, बर्ड वाचिंग, पौधरोपण अभियान, ग्रीन जोन एक्सप्लोरेशन और स्कूल-कालेजों में वर्कशाप जैसे कार्यक्रम आयोजित करती है।

इसके साथ ही घायल पशु-पक्षियों के रेस्क्यू, रिहैबिलिटेशन के साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्यरत है। संस्था कम्पोस्टिंग, ट्री सेंसस और ‘30 डेज 30 नेचर वाक्स’ जैसे अभियानों के जरिए लोगों को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनाने की दिशा में सक्रिय है।
‘पौधा पहचानो-घर ले जाओ’ से कर रहे प्रेरित
दिल्ली में हरियाली का ग्राफ बढ़ाने के लिए द्वारका निवासी संदीप पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मुहिम ‘पौधा पहचानो-घर ले जाओ'''' चला रहे हैं। इसके जरिए वे हर महीने निश्शुल्क पौधे बांटते हैं। वर्ष 2024 में ये पहल शुरू की थी।

इसके तहत अभी तक करीब डेढ लाख पौधे बांट चुके हैं। मुहिम में उनकी बेटी तारुषी और बेटा अग्रिम भी सहयोग देते हैं। दिल्ली समेत एनसीआर के अलावा वे वाराणसी, मेरठ, मोदीनगर, आगरा में भी अभियान चला चुके हैं।
अभियान में मनी प्लांट, बोगनवेलिया, चंपा, हिबिस्कस, तुलसी, करी पत्ता, स्नेक प्लांट, शमी, हारसिंगार, एलोवेरा, अश्वगंधा जैसे औषधीय पौधे बांटते हैं, जिसपर तकरीबन 30 हजार रुपये मासिक खर्च करते हैं।
यमुना से पर्यावरण तक: राहुल की अनोखी हरित पहल
दिल्ली के राहुल 13 सालों से पर्यावरण जागरूकता को कार्यरत हैं। सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ अभियान छेड़कर हजारों कपड़े के थैले बांट चुके है और यमुना बचाओ को लेकर पैदल यात्रा भी की है।
पेड़-पौधे लगाने के साथ ही पक्षियों और जीवों के लिए अनुकूल पौधारोपण पर भी जोर देते हैं, जिससे गौरेया जैसी प्रजातियां वापस लौट सकें। घर की छत पर किचन वेस्ट से प्राकृतिक खाद बनाते हैं और लोगों को बताते हैं कि कैसे गीला कचरा लैंडफिल में जाने से रोका जा सकता है।
