गंगा किनारे हरियाली मिशन: 50 एकड़ में बनेगा बायोडायवर्सिटी पार्क; बक्सर में प्रदूषण फैलाने वालों पर सीधी कार्रवाई
बक्सर में जिलाधिकारी साहिला की अध्यक्षता में जिला पर्यावरण और आर्द्रभूमि समिति की बैठक हुई। इसमें गंगा किनारे 50 एकड़ ...और पढ़ें

बक्सर में बनेगा बायोडायवर्सिटी पार्क। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
गंगा किनारे 50 एकड़ में बायोडायवर्सिटी पार्क बनेगा।
वायु गुणवत्ता सुधार हेतु जीआरएपी प्रभावी रूप से लागू होगा।
अवैध खनन और प्रदूषण फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई।
जागरण संवाददाता, बक्सर। जिला पदाधिकारी साहिला की अध्यक्षता में बुधवार को समाहरणालय स्थित सभाकक्ष में जिला पर्यावरण समिति एवं जिला आर्द्रभूमि समिति की संयुक्त बैठक आयोजित की गई।
बैठक में पर्यावरण संरक्षण, संवर्धन और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े मुद्दों की व्यापक समीक्षा की गई और संबंधित विभागों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए।
बैठक में पटना हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप राज्य में वायु गुणवत्ता सुधार के लिए जीआरएपी (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान) के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया गया।
एनजीटी के निर्देश पर बनेगा पार्क
सभी विभागों को समय पर एटीआर (एक्शन टेकन रिपोर्ट) उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
साथ ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशानुसार गंगा नदी के पांच किलोमीटर दायरे में कम से कम 50 एकड़ भूमि पर रिवर बायोडायवर्सिटी पार्क विकसित करने की योजना पर विस्तार से चर्चा हुई।
इसके लिए गठित उपसमिति को शीघ्र प्रतिवेदन सौंपने को कहा गया। बैठक में बक्सर वन प्रमंडल के गठन के बाद वन विभाग के कार्यालय और आवास के लिए भूमि उपलब्ध कराने पर भी विचार-विमर्श किया गया।
अवैध खनन पर सख्ती बरतते हुए जिला खनन पदाधिकारी को नियमित छापेमारी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए। डीटीओ को प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों के विरुद्ध विशेष अभियान चलाने को कहा गया।
ध्वनि प्रदूषण पर लगेगी लगाम
वायु प्रदूषण नियंत्रण के तहत मुख्य सड़कों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर धूल नियंत्रण के लिए नियमित सफाई, जल छिड़काव और कचरा प्रबंधन सुनिश्चित करने पर बल दिया गया। इसके अलावा ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण को भी प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए।
नगर निकायों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के तहत निर्धारित लैंडफिल साइट पर ही कचरे का निस्तारण करने, उसकी क्षमता का आकलन करने तथा आसपास हरियाली बढ़ाने के लिए पौधरोपण कराने को कहा गया।
शहरी क्षेत्रों में हरित आवरण बढ़ाने के उद्देश्य से खाली जमीन पर सिटी फॉरेस्ट विकसित करने की योजना पर भी चर्चा हुई।
जिला आर्द्रभूमि समिति की बैठक में सिमरी प्रखंड स्थित कोलिया खाप आर्द्रभूमि के संरक्षण एवं प्रबंधन पर विचार करते हुए आवश्यक स्वीकृतियां शीघ्र प्राप्त करने के निर्देश दिए गए।
अंत में जिला पदाधिकारी ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ समयबद्ध तरीके से कार्य पूर्ण करने पर जोर दिया।
