दिल्ली-NCR में आतंकियों के सोलर कैमरे की तलाश तेज, रेलवे ट्रैक पर जासूसी का खुलासा
गाजियाबाद में छह आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली-एनसीआर में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। आतंकियों ने रेलवे ट्रैक के पास सोलर कैमरे लगाकर जासूसी की योजना बनाई थी।
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आतंकियों के सनसनीखेज खुलासे के बाद दिल्ली-एनसीआर में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट। (फाइल फोटो)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। गाजियाबाद पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए छह आतंकियों के सनसनीखेज खुलासे के बाद दिल्ली-एनसीआर में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। पूछताछ में यह बात सामने आई है कि आतंकी रेलवे स्टेशनों और ट्रैक के किनारे सोलर कैमरे लगाकर जासूसी की योजना बना रहे थे।
इस इनपुट के बाद रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ), जीआरपी और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने संयुक्त रूप से सघन तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। स्पेशल सेल सूत्रों के मुताबिक पिछले तीन दिनों से आरपीएफ और जीआरपी के जवान दिल्ली के सभी छोटे-बड़े रेलवे स्टेशनों और पटरियों के आसपास खाक छान रहे हैं।

टेक्निकल टीम के साथ पुलिस टीमें पटरियों के किनारे लगे हर खंभे और पेड़ की जांच कर रही हैं। जांच में पाया गया है कि कई जगहों पर रेलवे ट्रैक के किनारे बसी झुग्गियों में लोगों ने निजी कैमरे लगा रखे हैं, जिनका रुख ट्रैक की तरफ है। पुलिस अब ऐसे कैमरों के मालिकों और उनकी पृष्ठभूमि की गहन जांच कर रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इनका इस्तेमाल किसी गलत गतिविधि के लिए तो नहीं हो रहा है?
आतंकियों द्वारा सोलर कैमरा लगाने के इस मामले ने केंद्रीय एजेंसियों को भी हैरान कर दिया है। सोलर कैमरों के इस्तेमाल की बात पहली बार सामने आई है। यह सीमा पार बैठे हैंडलरों और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता है।
क्या था आतंकियों का प्लान?
खुफिया ब्यूरो और स्पेशल सेल ने गाजियाबाद पुलिस के संपर्क साध आतंकियों के बारे में जानकारी प्राप्त की है। जांच का मुख्य केंद्र यह है कि क्या आईएसआई इन कैमरों के जरिए देशव्यापी बम धमाकों की लाइव मॉनिटरिंग या ट्रेनों की आवाजाही पर नज़र रखने की योजना बना रहा था।
इस तरह की जानकारी मिलने के बाद दिल्ली के सात बड़े और दर्जनों छोटे स्टेशनों पर सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद कर दिया गया है। आरपीएफ के पास सीसीटीवी कंट्रोल रूम, सामान की स्कैनिंग व ट्रैक के किनारे सघन गश्त और संदिग्ध कैमरों की खोज की जिम्मेदारी है। आरपीएफ के पास कानून व्यवस्था संभालने, किसी तरह का आपराध होने पर उसकी जांच व झुग्गियों में लगे कैमरों और संदिग्धों की पहचान करना है।
ढिलाई बरतने के मूड में नहीं एजेंसियां
स्पेशल सेल, गाजियाबाद पुलिस से इनपुट लेकर साजिश के बारे में पता लगा रही है। वहीं आईबी आईएसआई और सीमा पार हैंडलरों के कनेक्शन की जांच कर रही है। दिल्ली में अब तक किसी संदिग्ध सोलर कैमरे के मिलने की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पुलिस और एजेंसियां किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं हैं।
आरपीएफ और जीआरपी को बेहतर समन्वय के साथ हर संदिग्ध गतिविधि पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं। रेलवे स्टेशनों पर लगे कैमरों की जांच शुरू कर दी गई है। यह पता लगाया जा रहा है कि रिकार्ड में जितने कैमरे हैं उतने ही कैमरे लगे हैं या उससे कम या ज्यादा कैमरे लगे हैं। कितने सही और कितने खराब हैं।
क्या बोले स्पेशल सेल के अधिकारी?
स्पेशल सेल के एक अधिकारी का कहना है कि सीमा पार के आतंकियों द्वारा सोलर कैमरों के इस्तेमाल का पहला मामला 2023 के अंत में जम्मू-कश्मीर के राजौरी और पुंछ में सामने आया था।
सुरक्षा बलों ने आपरेशंस के दौरान पाया था कि घने जंगलों में छिपे आतंकी सुरक्षा बलों की मूवमेंट ट्रैक करने के लिए पेड़ों पर ऊंचे स्थानों पर सोलर कैमरे लगा रहे थे। चूंकि ये कैमरे सोलर पैनल से चलते हैं, इन्हें बार-बार चार्ज करने या बैटरी बदलने की जरूरत नहीं होती, जिससे आतंकियों को लंबे समय तक एक ही जगह से लाइव फीड मिलती रहती है।
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इन कैमरों का इस्तेमाल से सेना की टुकड़ी के आने की सूचना आतंकियों को उनके स्मार्टफोन पर पहले ही मिल जाती है। ऊंचे पहाड़ों और घने जंगलों में जहां मानवीय निगरानी कठिन है, वहां ये कैमरे ''तीसरी आंख'' का काम करते हैं। ये कैमरे अक्सर 4जी/5जी सिम कार्ड या स्थानीय वाई-फाई हाटस्पाट से जुड़े होते हैं, जिससे इनका डाटा दूर बैठे हैंडलर्स तक पहुंच सकता है।
