दिल्ली-अंबाला रेलमार्ग पर बढ़ेगी ट्रेनों की रफ्तार, बिछेंगी तीसरी-चौथी लाइन; 5983 करोड़ होंगे खर्च
दिल्ली-अंबाला रेलमार्ग पर ट्रेनों की गति बढ़ाने और क्षमता विस्तार के लिए तीसरी व चौथी लाइन बिछाई जाएंगी। इस 194 ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।
HighLights
दिल्ली-अंबाला रेलमार्ग पर तीसरी और चौथी लाइन बिछेगी।
परियोजना पर 5983 करोड़ रुपये खर्च होंगे, 194 किमी लंबा।
ट्रेनों की गति बढ़ेगी, पर्यटन और माल ढुलाई में तेजी।
संतोष कुमार सिंह, नई दिल्ली। दिल्ली-अंबाला रेलमार्ग दिल्ली को उत्तर भारत से जोड़ने वाला एक महत्त्वपूर्ण रेलखंड है। इसका पर्यटन के साथ-साथ सामरिक महत्त्व भी है। इस महत्त्वपूर्ण रेलमार्ग पर क्षमता से लगभग 66 प्रतिशत अधिक ट्रेनें चलती हैं, जिससे ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित होती है।
इसके समाधान के लिए दो अतिरिक्त रेल लाइन बिछाने का काम शीघ्र शुरू होने की उम्मीद है। इसके लिए निविदा जारी कर दी गई है और अगले वर्ष निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है। इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ माल ढुलाई में तेज़ी आएगी और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
आउटर पर रोकने की मजबूरी
इस रेलखंड से शताब्दी, राजधानी और वंदे भारत सहित प्रतिदिन डेढ़ सौ से अधिक ट्रेनें इस मार्ग से गुजरती हैं। इसके साथ ही मालगाड़ियों का भी परिचालन होता है। ट्रेनों की संख्या अधिक होने के कारण कई बार उन्हें आउटर या छोटे स्टेशनों पर रोकना पड़ता है।
दिल्ली से श्रीनगर तक ट्रेन कनेक्टिविटी उपलब्ध हो जाने से आने वाले दिनों में ट्रेनों और मालगाड़ियों की संख्या और बढ़ेगी। यदि आवश्यकता के अनुरूप आधारभूत ढांचे का विकास नहीं किया गया, तो परेशानी बढ़ेगी, क्योंकि अभी भी अक्सर ट्रेनें विलंब से चलती हैं।
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इसे ध्यान में रखकर लगभग पांच वर्ष पहले तीसरी और चौथी लाइन के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने का काम शुरू हुआ था। इसी वर्ष फरवरी में केंद्र सरकार ने 194 किमी लंबे इस रेलखंड में दो अतिरिक्त रेल लाइन बिछाने की स्वीकृति दी थी।
इस परियोजना पर 5983 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस मार्ग पर दो रेल ओवर ब्रिज और 79 रेल अंडर ब्रिज बनाए जाएंगे। इसके पहले चरण में सब्ज़ी मंडी से अंबाला कैंट के बीच दो अतिरिक्त लाइनों के निर्माण के लिए 3612 करोड़ रुपये की निविदा आमंत्रित की गई है।
इसके अंतर्गत सिविल, ट्रैक, सिग्नलिंग, टेलीकम्युनिकेशन और ओएचई सहित अन्य कार्य किए जाएंगे। बोली जमा करने की अंतिम तिथि एक फरवरी है।
चार साल में पूरा करने का लक्ष्य
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस परियोजना को चार वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके निर्माण से ट्रेनों को समय पर चलाने और उनकी गति क्षमता बढ़ाने में आ रही बाधा दूर होंगी।
इससे श्री माता वैष्णो देवी, श्रीनगर, जम्मू और शिमला जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों पर जाने वाले पर्यटकों को सुविधा होगी। साथ ही, थर्मल पावर प्लांटों तक कोयले की आपूर्ति तथा कृषि गोदामों व अन्य औद्योगिक इकाइयों से माल ढुलाई में तेजी आएगी।
