Delhi Zoo में ईंट, सीमेंट और रेत के इस्तेमाल का हिसाब कहां? PMO से फाइनेंशियल ऑडिट और स्वतंत्र जांच की मांग
राष्ट्रीय प्राणी उद्यान में निर्माण सामग्री की आपूर्ति और उपयोग की व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ...और पढ़ें

दिल्ली स्थित चिड़ियाघर में निर्माण सामग्री की आपूर्ति और उसके इस्तेमाल की व्यवस्था सवालों के घेरे में है।
HighLights
चिड़ियाघर में निर्माण सामग्री के उपयोग पर सवाल.
पीएमओ से स्वतंत्र जांच की मांग की गई.
स्टॉक रजिस्टर और उपयोग प्रमाण पत्र गायब.
रीतिका मिश्रा, नई दिल्ली। राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (चिड़ियाघर) में निर्माण सामग्री की आपूर्ति और उसके इस्तेमाल की व्यवस्था सवालों के घेरे में है। विभागीय दस्तावेजों में बड़ी मात्रा में ईंट, सीमेंट, रेत और अन्य निर्माण सामग्री चिड़ियाघर के मेंटेनेंस प्रभारी को सौंपे जाने का रिकाॅर्ड है।
मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की
सवाल यह है कि जब निर्माण और मरम्मत कार्यों के लिए सिविल कंस्ट्रक्शन यूनिट (सीसीयू) मौजूद है, तो सामग्री हस्तांतरण और उसके इस्तेमाल का हिसाब किस व्यवस्था के तहत रखा गया है। वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय को शिकायत भेजकर इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
अलग-अलग तारीखों पर सौंपी गई सामग्री
18 जून 2025 को हाथियों के बाड़े में सीमेंट-कंक्रीट का फर्श बनाने और अन्य कार्यों के लिए मेंटेनेंस प्रभारी रजनीश पांडेय को 313 घनमीटर बढ़िया मिट्टी, 31.20 घनमीटर महीन रेत और 15.60 घनमीटर मोटी रेत सौंपे जाने का उल्लेख है।
तीन नवंबर 2025 के हस्तांतरण रिकॉर्ड में 76.50 घनमीटर गुड अर्थ, 46.81 घनमीटर मोटी रेत, 1048 सीमेंट की बोरियां और 24 हजार ईंटें दर्ज हैं। इसके अलावा ट्रैक्टर-ट्राली और बेलदारों की सेवाएं भी उपलब्ध कराने का उल्लेख है।
वित्तीय अनियमितता साबित नहीं करते
19 जनवरी 2026 के रिकार्ड में भी 60 सीमेंट की बोरियां, 18.08 घनमीटर मोटी रेत और 46 दिन के बेलदारों की सेवाएं सौंपे जाने की जानकारी दर्ज है। यानी अलग-अलग तारीखों पर सामग्री और श्रमबल हस्तांतरित किए जाने के दस्तावेज मौजूद हैं। हालांकि, ये रिकाॅर्ड सामग्री सौंपे जाने की पुष्टि करते हैं, उसके अंतिम इस्तेमाल या किसी वित्तीय अनियमितता को अपने आप साबित नहीं करते।
सामग्री कहां लगी, इसकी जांच जरूरी
वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे का आरोप है कि सामग्री की प्राप्ति, भंडारण और खपत का सत्यापन करने वाले स्टाॅक रजिस्टर, मटेरियल इश्यू रजिस्टर, माप पुस्तिका और उपयोगिता प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि मेंटेनेंस प्रभारी को निर्माण सामग्री सौंपे जाने के बावजूद, पशु बाड़ों और अन्य जगहों पर सिविल कंस्ट्रक्शन यूनिट (सीसीयू) के जरिए काम कराए जा रहे थे। अजय दुबे ने इसे संभावित रूप से एक ही काम पर दोहरे खर्च का मामला बताया है।
उनका आरोप है कि बची हुई निर्माण सामग्री निजी ठेकेदारों को कम दर पर लौटाई गई और कुछ सामग्री का इस्तेमाल निदेशक के सरकारी आवास पर कराया गया।
शिकायतकर्ता ने खरीद और स्वीकृति संबंधी फाइलों, सामग्री हस्तांतरण रिकार्ड, भुगतान दस्तावेज और कार्यस्थलों के भौतिक सत्यापन के आधार पर वित्तीय व तकनीकी आडिट की मांग की है।
मेंटेनेंस सेक्शन चिड़ियाघर में मिलने वाली जरूरतों के आधार पर आपातकालीन कार्य और मरम्मत करता है। इस्तेमाल की जाने वाली सभी सामग्रियों का रिकार्ड संबंधित स्टाक रजिस्टर में दर्ज किया जाता है और उनके उपयोग का ब्योरा संबंधित सेक्शन प्रभारी द्वारा रखा जाता है।
-संजीत कुमार, निदेशक, चिड़ियाघर।
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