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3 दशक और 8000 करोड़ खर्च के बाद भी यमुना मैली, अब नए ब्लूप्रिंट से ढाई साल में सफाई करने का दावा

Published: Wed, 21 Oct 2026 09:03 AM (IST)

1993 से अब तक 8000 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने के बावजूद यमुना नदी अत्यधिक प्रदूषित बनी हुई है, ...और पढ़ें

नदी में पानी की कमी है मुख्य समस्या

नदी में पानी की कमी है मुख्य समस्या

HighLights

  1. 8000 करोड़ खर्च के बावजूद यमुना प्रदूषित बनी हुई।

  2. नदी में पानी की कमी, एसटीपी मानक के अनुरूप नहीं।

  3. अगले ढाई वर्षों में यमुना को स्वच्छ करने का नया लक्ष्य।

संतोष कुमार सिंह, नई दिल्ली। सरकारी उपेक्षा, राजनीतिक इच्छाशक्ति के अभाव और नागरिक लापरवाही के कारण जीवनदायिनी यमुना आज मृतप्राय स्थिति में पहुंच चुकी है।

तीन दशकों से स्वच्छता के दावों और राजनीति का केंद्र रही यमुना में आठ हजार करोड़ रुपये से अधिक बहाए जा चुके हैं, लेकिन योजनाओं में विसंगति और क्रियान्वयन में कमी के चलते नदी की स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ।

हर नई सरकार के साथ यमुना को साफ करने की एक नई डेडलाइन तय हो जाती है। अब दिल्ली की नई भाजपा सरकार ने अगले ढाई वर्षों में यमुना को पूरी तरह स्वच्छ करने का वादा किया है।

पीएम मोदी की निगरानी काम शुरू

इससे पूर्व, वर्ष 2015 में सत्ता में आई आम आदमी पार्टी ने भी पांच वर्षों में यमुना सफाई का वादा किया था, जिसे बाद में पांच साल और बढ़ाया गया, लेकिन नतीजे शून्य रहे। भाजपा द्वारा वर्ष 2025 के चुनाव में इसे प्रमुख मुद्दा बनाने के बाद, अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की निगरानी में केंद्र और पड़ोसी राज्यों के समन्वय से एक व्यापक कार्ययोजना पर काम शुरू हुआ है।

यमुना को बचाने के लिए नए और विकेंद्रीकृत सीवेज उपचार संयंत्र (डीएसटीपी) स्थापित किए जा रहे हैं और पुराने एसटीपी का उन्नयन किया जा रहा है। सरकार ने एसटीपी परियोजनाओं के लिए 6485 करोड़ रुपये और अन्य कार्यों के लिए लगभग 4500 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं।

27 नए डीएसटीपी लगाए जाएंगे

इसके तहत 27 नए डीएसटीपी लगाए जाएंगे और सीवर नेटवर्क का विस्तार कर कुल उपचार क्षमता को बढ़ाना है। प्रदूषण के मुख्य स्रोत नजफगढ़ नाले की सफाई आधुनिक मशीनों से की जा रही है, जबकि पर्यावरणीय प्रवाह बढ़ाने के लिए शोधित जल के साथ उत्तर प्रदेश से गंगा जल लाने का प्रस्ताव है। जल मंत्री प्रवेश वर्मा का दावा है कि इन एकीकृत प्रयासों से अगले ढाई वर्षों में यमुना निर्मल हो जाएगी।

यमुना स्वच्छता की कवायद वर्ष 1993 में यमुना एक्शन प्लान के साथ शुरू हुई थी। फरवरी 2024 की एक संसदीय रिपोर्ट के अनुसार, यमुना एक्शन प्लान एक और दो पर 1514.70 करोड़ रुपये खर्च हुए, जबकि पिछले एक दशक में नमामि गंगे योजना के तहत 5834.7 करोड़ रुपये मंजूर किए गए।

साउथ एशिया नेटवर्क

साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स, रिवर्स एंड पीपल'' (संड्रप) के सह-संयोजक भीम सिंह रावत के अनुसार, अब तक का अधिकांश बजट एसटीपी निर्माण, सुंदरीकरण और घाटों के निर्माण पर खर्च हुआ, जबकि नदी के पारिस्थिकीय तंत्र (इकोलाजी) और पर्यावरणीय प्रवाह पर ध्यान नहीं दिया गया।

वर्ष 2019 में राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान, रुड़की ने हथनीकुंड बैराज से न्यूनतम 812 क्यूमेक्स पानी छोड़ने की सिफारिश की थी, लेकिन सात वर्षों बाद भी गैर-मानसून सीजन में केवल 310 क्यूसेक पानी ही छोड़ा जाता है।

वहीं, 35 एसटीपी में से कई मानक के अनुरूप नहीं हैं और औद्योगिक कचरा भी नदी में गिर रहा है। एनजीटी के 2017 के आदेश के बाद अब 28 एसटीपी का उन्नयन पूरा हो चुका है और सात पर काम जारी है। पड़ोसी राज्यों से आने वाले नालों का गंदा पानी भी एक बड़ी चुनौती रहा है, जिसके निस्तारण के लिए अब अंतर-राज्यीय समन्वय बनाया जा रहा है।

महत्वपूर्ण तथ्यः

  • राजधनी सीवेज उपचार क्षमताः 814 मिलियन गैलन प्रतिदिन (एमजीडी)
  • वर्ष 2028 तक क्षमता 1500 एमजीडी करने का लक्ष्य
  • अगले ढाई वर्षों में 13 नए एसटीपी स्थापित करने के लिए नेशनल मिशन फार क्लीन गंगा (एनएमसीजी) द्वारा 7373 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

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