दिल्ली के 48 Hotspot रडार पर, 334 दल करेंगे निगरानी; सर्दियों में प्रदूषण नियंत्रण उपायों पर अमल बड़ी चुनौती
दिल्ली में सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए सरकार ने 334 निगरानी दल और 48 हॉटस्पॉट पर विशेष ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।
HighLights
दिल्ली में सर्दियों के प्रदूषण नियंत्रण हेतु 334 दल तैनात।
48 प्रदूषण हॉटस्पॉट पर विशेष निगरानी और कार्रवाई होगी।
उपायों की घोषणा नहीं, सतत और प्रभावी अमल चुनौती।
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दिल्ली में सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए इस बार सरकार और नगर निगम ने कई अतिरिक्त उपाय घोषित किए हैं, लेकिन इनकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अक्टूबर से पहले कितने उपाय वास्तव में जमीन पर उतरते हैं।
सरकार ने 334 निगरानी दलों की तैनाती, 48 प्रदूषण हाटस्पाट पर विशेष कार्रवाई और सड़क व निर्माण से जुड़े काम समय पर पूरा करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, एमसीडी ने सड़क धूल, कूड़ा जलाने और निर्माण एवं विध्वंस कचरे पर नियंत्रण के लिए अपनी तैयारी तेज करने का दावा किया है।
सरकार की नई व्यवस्था में 39 उपमंडलों में दो-दो दल तैनात किए गए हैं, जो दिन-रात निरीक्षण करेंगे। इनके अलावा एमसीडी के वार्ड स्तर पर 250 दल, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद क्षेत्र में चार और दिल्ली छावनी क्षेत्र में दो दल काम करेंगे।
48 हॉटस्पॉट पर विशेष निगरानी
इनकी जिम्मेदारी कूड़ा व जैविक सामग्री जलाने, निर्माण की धूल, औद्योगिक प्रदूषण, अवैध कूड़ा डालने और बिना अनुमति वाले ईंधन के इस्तेमाल पर नजर रखने की होगी। 48 हॉटस्पॉट पर विशेष निगरानी के साथ प्रत्येक क्षेत्र के लिए जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था भी की गई है।
सड़क की धूल कम करने के लिए सरकार ने 100 करोड़ रुपये में 1000 ट्रक आधारित धूल-रोधी मशीनें तीन साल के लिए चलाने की योजना मंजूर की है। इन वाहनों में जीपीएस और काम का दैनिक रिकार्ड रखने की व्यवस्था प्रस्तावित है।
हालांकि विशेषज्ञों और अधिकारियों के बीच इस बात पर जोर है कि केवल पानी का छिड़काव पर्याप्त नहीं होगा। सड़क की नियमित यांत्रिक सफाई, किनारों की सफाई और खुले हिस्सों को पक्का या हरित करना भी जरूरी है।
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एमसीडी ने 870 किलोमीटर सड़क का काम 31 अक्टूबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। लेकिन 14 सितंबर तक संशोधित 1230 किलोमीटर के लक्ष्य में केवल 689 किलोमीटर का काम पूरा हुआ था। यानी सर्दी शुरू होने से पहले काफी काम बाकी है।
एमसीडी ने कूड़ा संग्रह और परिवहन व्यवस्था मजबूत करने, खुले में कूड़ा जलाने पर रोक और निर्माण-विध्वंस कचरा स्थलों पर निगरानी बढ़ाने की भी बात कही है। 125 ऐसे स्थलों में से 110 को नियमों के अनुरूप बताया गया है।
विशेषज्ञों की राय- घोषणा नहीं, रोजाना निगरानी जरूरी
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार प्रदूषण नियंत्रण में सबसे बड़ी जरूरत उपायों की घोषणा के बजाय उनके लगातार पालन की है।
सीएसई के विश्लेषण में भी सामने आया है कि सर्दियों में प्रदूषण केवल एक स्रोत से नहीं बढ़ता, बल्कि वाहन, उद्योग, कूड़ा जलाने, घरेलू ईंधन, निर्माण और क्षेत्रीय प्रदूषण मिलकर स्थिति बिगाड़ते हैं। इसलिए किसी एक उपाय पर निर्भर रहने के बजाय सभी स्रोतों पर एक साथ कार्रवाई जरूरी है।
आइआइटी दिल्ली और टेरी से जुड़े 2026 के अध्ययन में दिल्ली के पीएम 2.5 प्रदूषण में परिवहन क्षेत्र की हिस्सेदारी करीब 18-24 प्रतिशत बताई गई है। ऐसे में भारी वाहनों, यातायात प्रबंधन और सार्वजनिक परिवहन पर भी ठोस कार्रवाई जरूरी होगी।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) पूर्व अपर निदेशक डा एस के त्यागी ने कहा कि प्रभावी अमल के लिए हर हाटस्पाट पर एक जिम्मेदार अधिकारी की ड्यूटी हो, रोजाना निरीक्षण और सार्वजनिक निगरानी हो।
कूड़ा जलाने और निर्माण नियमों के उल्लंघन पर हो कार्रवाई
सड़क की सफाई केवल मशीन चलाने तक सीमित न रहे, बल्कि धूल की मात्रा में आ रही कमी को भी मापा जाए। इसी तरह कूड़ा जलाने या निर्माण नियमों के उल्लंघन पर केवल नोटिस जारी नहीं हो, समयबद्ध कार्रवाई और दोबारा उल्लंघन पर सख्त दंड भी सुनिश्चित हो।
केंद्र सरकार भी मई में दिल्ली के साथ बैठक में सड़क धूल नियंत्रण, यातायात प्रबंधन, इलेक्ट्रिक वाहनों और कचरा प्रबंधन के उपायों में तेजी तथा विभागों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत बता चुकी है।
यानी इस सर्दी दिल्ली के पास उपायों की कमी नहीं, बल्कि उन्हें समय पर और लगातार लागू कराने की चुनौती है।
