दिल्ली में SIR के दौरान VIP मतदाताओं पर खास मेहरबानी? सत्यापन में अनुपस्थित, फिर भी ड्राफ्ट लिस्ट में नाम
दिल्ली की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में बीएलओ के सत्यापन के बावजूद कई प्रमुख लोगों के नाम 'चिन्हित निर्वाचक' डेटाबेस के कारण वापस सूची में शामिल किए गए।

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HighLights
बीएलओ ने कई प्रमुख लोगों को 'स्थानांतरित' या 'अनुपस्थित' पाया।
'चिन्हित निर्वाचक' डेटाबेस से नाम मतदाता सूची में वापस आए।
मृत और डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम भी सूची में बने रहे।
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दिल्ली की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) में क्षेत्र सत्यापन और ‘चिन्हित निर्वाचक’ के अलग डेटाबेस के बीच एक दिलचस्प विरोधाभास सामने आया है।
बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) ने कई प्रमुख लोगों के घर जाकर सत्यापन के बाद उनके फार्म पर ‘स्थायी रूप से स्थानांतरित’ या ‘अनुपस्थित/ पता नहीं चला’ दर्ज किया। लेकिन बाद में ‘चिन्हित निर्वाचक’ की सूची से मिलान के बाद इनका स्टेटस बदल दिया गया और नाम भी ड्राफ्ट मतदाता सूची में बनाए रखे गए।
वरिष्ठ चुनाव अधिकारियों के मुताबिक यह प्रक्रिया जनप्रतिनिधियों, घोषित पदों पर आसीन लोगों और प्रमुख हस्तियों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पहले से मौजूद ‘चिन्हित निर्वाचक’ डेटाबेस के आधार पर की गई। हालांकि बीएलओ के क्षेत्र सत्यापन में सामने आए तथ्य को बाद की प्रक्रिया में किस तरह बदला गया, यही इस पूरी कवायद का सबसे अहम सवाल है।
30 जुलाई को जुड़ा था मार्क VIP फीचर
रिपोर्ट के मुताबिक बीएलओ एप में 30 जुलाई को ‘मार्क वीआइपी’ फीचर जोड़ा गया था। चुनाव आयोग के आधिकारिक दिशानिर्देशों में हालांकि ‘वीआइपी’ शब्द नहीं है।
लेकिन नियमों में ‘चिन्हित निर्वाचक’ का प्रविधान है, जिसके तहत जनप्रतिनिधियों, न्याय पालिका के सदस्यों, घोषित पदाधिकारियों और विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों के नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल रखने की व्यवस्था है, ताकि दावे-आपत्तियों के दौरान जरूरी दस्तावेज जुटाए जा सकें।
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विडंबना यह है कि ड्राफ्ट रोल में शामिल रखे गए कई नाम बाद में ‘नो मैपिंग’ या तार्किक विसंगतियों के कारण नोटिस के लिए चिह्नित हो गए। इनमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त अरुण गोयल और सुशील चंद्र समेत कई प्रमुख नाम शामिल हैं।
सबसे गंभीर सवाल ‘चिन्हित निर्वाचक’ में मृत और डुप्लीकेट मतदाताओं के अपवाद को लेकर है। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक इन्हें भी बाहर किया जाना था, लेकिन इसका पालन हर मामले में नहीं हुआ।
पूर्व प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष रहे बिबेक देबराय, जिनका 2024 में निधन हो चुका था, का नाम भी ड्राफ्ट रोल में रहा और बाद में ‘नो मैपिंग’ के कारण नोटिस के लिए चिह्नित हुआ।
अब ऐसे मामलों में ईआरओ के निर्देश पर बीएलओ पंजीकृत पते पर जाकर दोबारा सत्यापन करेंगे और रिकार्ड में विसंगतियां दूर की जाएंगी।
दिल्ली में करीब 3,000 वीआइपी मतदाता
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के मुताबिक राजधानी में करीब 3,000 वीआइपी मतदाता हैं। चुनाव आयोग के नियम और मैनुअल में 2018 से वीआइपी मतदाताओं से संबंधित प्रविधान मौजूद हैं।
ऐसे मतदाताओं को ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल करने की प्रक्रिया में विशेष सुविधा दी जा सकती है, लेकिन उन्हें दावे-आपत्तियों या सत्यापन से पूरी तरह छूट नहीं है।
ऐप के जरिए अब बीएलओ घर-घर सत्यापन के दौरान किसी मतदाता को वीआइपी के रूप में चिन्हित कर सकते हैं। बाद में यह जानकारी एईआरओ, ईआरओ और मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के स्तर पर सत्यापित की जाती है।
खास बात है कि यह सुविधा एसआइआर की प्रक्रिया शुरू होने के बाद जोड़ी गई। सीईओ कार्यालय ने बताया कि बीएलओ ऐप में यह बदलाव 30 जुलाई को किया गया था। एप्पल के ऐप स्टोर पर चार अगस्त के अपडेट में इसका विवरण “मार्क वीआइपी निर्वाचक से जुड़ी जानकारी में बदलाव।” पहले से है।
