VIP के लिए घर पर सुनवाई, केंद्रों के चक्कर लगाने को मजबूर आम वोटर; दिल्ली SIR में 31.63 लाख को नोटिस
दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत लाखों मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं, जिसमें वीआईपी के मामलों ...और पढ़ें

दिल्ली एसआईआर में कई दग्गजों को नोटिस। फाइल फोटो
HighLights
दिल्ली में लाखों मतदाताओं को एसआइआर के तहत नोटिस जारी।
वीआईपी को घर पर सुविधा, आम जनता को सुनवाई केंद्र।
चुनाव विभाग ने मानी कमी, नोटिसों का जल्द निपटारा प्रयास।
संजीव गुप्ता, नई दिल्ली। दिल्ली में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) में देश के कई नामचीन लोगों को नोटिस जारी होने के बाद निर्वाचन विभाग ने उनके मामलों के निपटारे के लिए अधिकारियों को उनके घर भेजना शुरू कर दिया है। वहीं आम मतदाताओं को अपने नोटिस के जवाब और दस्तावेज जमा कराने के लिए सुनवाई केंद्रों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार एसआइआर में करीब 33.13 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए जाने हैं, जिनमें से 31,63,930 को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इनमें अधिकांश मामले पिछले एसआइआर से नाम का मिलान (मैपिंग) नहीं होने से जुड़े हैं। इसके अलावा तार्किक विसंगतियों के कारण भी बड़ी संख्या में नोटिस जारी हुए हैं।
नोटिस पाने वालों में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और उनकी पत्नी, पूर्व सेनाध्यक्ष उपेंद्र द्विवेदी, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और उनकी बेटी प्रतिभा व बहू गीतिका, निर्वाचन आयुक्त एस एस संधू, पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और उनकी पत्नी कल्पना दास, सांसद बांसुरी स्वराज, पूर्व मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की पत्नी तेजस्विनी भूषण गवई, दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, उनकी पत्नी सीमा और बेटे मीर तथा सीबीआइ निदेशक प्रवीण सूद समेत कई नाम शामिल हैं।
अधिकारी ने माना, हर स्तर पर नहीं बरती गई सतर्कता
निर्वाचन विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक बीएलओ, सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ) और निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) को पहले ही वीआइपी मतदाताओं की सूची तैयार रखने और उनसे दस्तावेज लेते समय विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए थे।
अधिकारी के अनुसार कोशिश थी कि ज्यादातर मामलों का समाधान नोटिस जारी होने से पहले ही हो जाए। यदि नोटिस जारी करना पड़े तो केवल नोटिस देकर लौटने के बजाय संबंधित मतदाता की समस्या का समाधान भी कराया जाए।
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अधिकारी ने माना कि इस स्तर की सतर्कता हर जगह नहीं बरती गई। उन्होंने बताया कि जिन केंद्रों पर सुनवाई हो रही है, वहां बीएलओ को निर्देश दिया गया है कि मतदाताओं को उनके नोटिस के आधार पर जरूरी दस्तावेजों की जानकारी पहले ही दे दी जाए, ताकि उन्हें बार-बार केंद्र के चक्कर न लगाने पड़ें।
उन्होंने कहा कि क्षेत्र में काम कर रहे चुनाव अधिकारियों पर भी काफी दबाव है और इसी कारण कुछ परेशानियां सामने आ रही हैं। सभी नोटिस का जल्द निपटारा करने का प्रयास किया जा रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि सोमवार को दिन भर नामचीन लोगों के नोटिस का विवाद सुलझाने का काम चला और देर रात तक जारी रहा। अधिकांशत: काम निपटा भी लिया गया है, आंकड़ों को मिलाने का कार्य अभी चल रहा है। संभवतया मंगलवार को इस आशय की रिपोर्ट भी जारी कर दी जाएगी।
इन वजहों से जारी हो रहे नोटिस
- पिछले एसआइआर की सूची से नाम का मिलान नहीं होना
- माता-पिता के नाम में अंतर
- मतदाता के नाम में अंतर
- बच्चे के जन्म और माता-पिता की उम्र के बीच नौ माह से कम का अंतर
- माता-पिता की उम्र में 15 वर्ष से कम का अंतर
- छह या उससे अधिक संतान
- माता-पिता की उम्र में 50 वर्ष से अधिक का अंतर
- दादा-दादी की उम्र में 40 वर्ष से कम का अंतर
- माता-पिता का पिछले एसआइआर में अयोग्य पाया जाना
